बिहार के समस्तीपुर जिले में निर्माणाधीन बख्तियारपुर-ताजपुर गंगा महासेतु पर शनिवार को बड़ा हादसा हो गया. निर्माण कार्य के दौरान पुल के स्लैब का एक हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर गया. हादसे के समय वहां काम कर रहे पांच मजदूर इसकी चपेट में आ गए. सभी घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जिनमें तीन मजदूरों की हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया गया.
दरअसल, यह परियोजना बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट मानी जाती है. हादसे के बाद निर्माण स्थल पर अफरा-तफरी मच गई. राहत और बचाव कार्य में जुटे अन्य मजदूरों और कर्मचारियों ने घायलों को मलबे से निकालकर इलाज के लिए भेजा.
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घटना की सूचना मिलते ही पुल निर्माण निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी. हालांकि, निर्माण कंपनी के अधिकारियों ने फिलहाल इस मामले पर खुलकर कुछ भी कहने से इनकार किया है.
CFT मशीन में खराबी के बाद टूटा स्लैब
जानकारी के मुताबिक, बख्तियारपुर-ताजपुर फोर लेन परियोजना के तहत गंगा नदी पर पुल का निर्माण कार्य चल रहा था. गंगा नदी में बने 38वें पिलर पर पांच मजदूर स्लैब निर्माण का काम कर रहे थे.
इसी दौरान निर्माण में इस्तेमाल हो रही CFT मशीन में अचानक तकनीकी खराबी आ गई. इसके बाद स्लैब का एक हिस्सा भरभराकर नीचे गिर गया. स्लैब गिरने के साथ ही वहां काम कर रहे मजदूर भी नीचे जा गिरे.
हादसे में तीन मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि दो मजदूरों को मामूली चोटें आई हैं. पहले सभी घायलों को पटोरी अनुमंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से तीन मजदूरों को बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया गया.
सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं. बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर विशेषज्ञ लगातार सख्ती की जरूरत बताते रहे हैं.
निर्माण कंपनी के अधिकारियों से हादसे के कारणों को लेकर जानकारी लेने की कोशिश की गई, लेकिन किसी ने भी आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया. पुल निर्माण निगम के अधिकारी पूरे मामले की तकनीकी जांच में जुटे हैं.
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार में पुल और पुलिया से जुड़े कई हादसे सामने आए हैं. ऐसे में इस घटना ने निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली, गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं.
51 किलोमीटर लंबा है महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट
बख्तियारपुर-ताजपुर फोर लेन परियोजना बिहार की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2011 में इस परियोजना का शिलान्यास किया था. इसका उद्देश्य मगध और मिथिलांचल के बीच की दूरी कम करना और आवागमन को आसान बनाना है.
करीब 51.26 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में गंगा नदी पर लगभग 5.51 किलोमीटर लंबा महासेतु बनाया जा रहा है. परियोजना पूरी होने के बाद बख्तियारपुर, ताजपुर, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और दरभंगा के बीच सीधा और तेज संपर्क स्थापित होगा.
इसके अलावा गांधी सेतु और राजेंद्र पुल पर वाहनों का दबाव कम होने की उम्मीद है. ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार होगा और लंबे समय से बनी रहने वाली जाम की समस्या से भी लोगों को राहत मिलेगी. हालांकि, 2011 में शुरू हुई यह परियोजना 15 साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है. अब इस हादसे के बाद इसकी सुरक्षा और निर्माण प्रक्रिया को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.