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बिहार में रोजी-रोटी के मुद्दे पर आमने-सामने आए Gen-Z छात्र नेता, डिबेट में छिड़ा जबरदस्त घमासान

'बिहार पंचायत आजतक' में रोजी-रोटी और रोजगार के मुद्दे पर बिहार के छात्र नेता एक दूसरे के अलग बात रखते नजर आए. रोजगार, पेपर लीक और सुरक्षा के मुद्दों पर एनडीए और विपक्षी छात्र संगठनों के नेता आमने-सामने आए, जहां एक ओर विकास के दावे किए गए तो दूसरी ओर युवाओं ने सरकारी नीतियों पर तीखे सवाल उठाए.

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आजतक के मंच पर बिहार के छात्र नेता (Photo-ITG)
आजतक के मंच पर बिहार के छात्र नेता (Photo-ITG)

'बिहार पंचायत आजतक' के विशेष सत्र में बिहार और देश के सबसे ज्वलंत मुद्दे 'रोजी, रोटी और रोजगार' पर जोरदार बहस छात्र नेताओं के बीच देखने को मिली. इस खास चर्चा में सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्ष से जुड़े प्रमुख छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम के दौरान पेपर लीक, छात्रों पर लाठीचार्ज, कैंपस सुरक्षा और विकास के दावों को लेकर तीखी बहस हुई.

Gen-Z के मुद्दे पर जेडीयू के छात्र ईकाई के प्रदेश अध्यक्ष धीरज कुमार, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की बिहार उपाध्यक्ष सबा अफरीन, बीजेपी युवा मोर्चा के नेता वरुण कुमार सिंह और एनएसयूआई से शाश्वत शेखर ने हिस्सा लिया. 

रोजगार के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर-विकास की नींव जरूरी
सत्र की शुरुआत करते हुए छात्र जनता दल यूनाइटेड (Chhatra JDU) के प्रदेश अध्यक्ष धीरज कुमार ने सरकार के कामकाज का बचाव किया. उन्होंने कहा कि रोजगार देने के लिए सबसे पहले प्रदेश में मूलभूत ढांचे (Infrastructure) का होना जरूरी है.

धीरज कुमार ने कहा, "रोजगार की बात करते समय हमें 20 साल के उस दौर को भी देखना होगा जब इंफ्रास्ट्रक्चर का नामोनिशान नहीं था. हमारी सरकार ने पहले रोड, बिजली और सुरक्षा जैसी प्राथमिक व्यवस्थाओं को मजबूत किया. जीविका जैसे माध्यम आज रोजी-रोटी का सबसे बड़ा और सफल उदाहरण बनकर उभरे हैं."

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'शिक्षा का बाजारीकरण और नफरत की राजनीति' का आरोप
विपक्ष की ओर से ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की बिहार उपाध्यक्ष सबा अफरीन ने केंद्र और राज्य सरकार पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने का सीधा आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में सरकार ने युवाओं को शिक्षा और रोजगार देने के बजाय केवल नफरत की राजनीति परोसने का काम किया है.

उन्होंने "आज का युवा इस बात को भली-भांति समझ चुका है कि कैसे शिक्षा का बाजारीकरण किया जा रहा है और रोजगार हमारे हाथों से छीना जा रहा है. यही वजह है कि देश का छात्र अपनी मांगों और हक के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हुआ है."

'पटना यूनिवर्सिटी पर छात्र नेता कैसे भिड़ गए'
आईसा के आरोपों पर पलटवार करते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के प्रतिनिधि वरुण सिंह ने केंद्र और राज्य सरकार के रिपोर्ट कार्ड को सामने रखा. उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल कैंपस में ध्रुवीकरण और अशांति फैलाना चाहता है.

वरुण ने कहा, "केंद्र की मोदी सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव किए हैं. पीएम श्री योजना के तहत 14,500 स्कूल खोले गए हैं. वहीं पटना यूनिवर्सिटी को पीएम उषा (PM-USHA) योजना के तहत 160 करोड़ रुपये की राशि दी गई है. आज वहां नए एकेडमिक ब्लॉक और आधुनिक हॉस्टल बन रहे हैं. 2047 के विकसित भारत के विजन को धरातल पर उतारने का काम केवल बीजेपी ही कर रही है."

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'पेपर लीक और लाठीचार्ज पर घिरी सरकार'
नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के नेता शाश्वत शेखर ने रोजगार और परीक्षाओं में हो रही धांधली को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने पटना से लेकर सिवान और रांची तक छात्रों पर हुए प्रशासनिक रवैये पर सवाल खड़े किए. शाश्वत ने कहा कि उत्तराखंड में जब धांधली का मामला सामने आया तो संबंधित नेताओं ने जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़े, जबकि सत्ता पक्ष ऐसे मामलों में टालमटोल करता है. उन्होंने बिहार में परीक्षाओं की अनिश्चितता और गर्दनीबाग में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर प्रशासनिक रवैये पर सवाल उठाए.

शाश्वत ने कहा, बिहार में रोजगार और भर्तियों की स्थिति यह है कि अनियमितताओं के कारण अभ्यर्थियों को निलंबित किया जा रहा है. राज्य के 3 करोड़ युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है. परीक्षाओं के नियंत्रक छात्रों के प्रति संवेदनहीन भाषा का इस्तेमाल करते हैं. जब छात्र अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, तो उन पर मुकदमे दर्ज किए जाते हैं.

वहीं, छात्र जदयू के धीरज कुमार ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार या संगठन कभी भी छात्रों पर लाठीचार्ज या पुलिस कार्रवाई का समर्थन नहीं करता. उन्होंने कहा कि डिग्रियों में हो रही देरी एक पुरानी और व्यवस्थागत समस्या है, जिसके समाधान के लिए संगठन शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर समयबद्ध व्यवस्था की मांग करेगा.

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'कौशल विकास और स्टार्टअप्स ही हैं भविष्य'
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के प्रतिनिधि हर्षवर्धन ने छात्रों के संघर्ष को जायज ठहराते हुए कहा कि एबीवीपी हमेशा से ही सबसे पहले छात्र हितों के लिए आगे आई है. उन्होंने नीट (NEET) मामले का जिक्र करते हुए कहा कि एबीवीपी ने सबसे पहले इस पर प्रदर्शन किया था.

ABVP के हर्षवर्धन ने कहा कि देश में कुल रोजगार में सरकारी नौकरियों की हिस्सेदारी केवल 2 से 3 प्रतिशत है. इसलिए छात्रों को सिर्फ पारंपरिक डिग्रियों तक सीमित न रहकर स्किल डेवलपमेंट, एमबीए, फाइनेंस और स्टार्टअप्स जैसे नए विकल्पों को अपनाना होगा.

भविष्य के समाधान पर बात करते हुए हर्षवर्धन ने कहा, "केवल सरकारी नौकरियों पर निर्भर रहने के बजाय युवाओं को स्किल डेवलपमेंट और इनोवेशन की तरफ बढ़ना होगा. देश में कुल रोजगार का 2 से 3 प्रतिशत ही सरकारी क्षेत्र में है. आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है और इनमें से 51% से अधिक स्टार्टअप छोटे शहरों (Tier-2 और Tier-3) से निकल रहे हैं."

आइसा की छात्र नेता ने हर्षवर्धन के दावों का विरोध करते हुए कहा कि बिहार के अधिकांश आम छात्रों के लिए बड़े प्राइवेट संस्थानों में भारी फीस देकर पढ़ना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार को परीक्षाओं का नियमित कैलेंडर जारी करना होगा, पारदर्शिता लानी होगी और समय पर डिग्रियां देनी होंगी.

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पटना यूनिवर्सिटी और परिसरों की सुरक्षा पर सवाल

बहस में पटना यूनिवर्सिटी की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता जताई गई. लॉ डिपार्टमेंट के छात्र ने बताया कि 'समर्थ पोर्टल' जैसी व्यवस्थाओं के कारण मार्कशीट में गलतियां और रिजल्ट में देरी हो रही है. उन्होंने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक स्थिति सुधारने के लिए विशेष पहल करने का आग्रह किया.

 एबीवीपी प्रतिनिधि ने यूनिवर्सिटी हॉस्टलों की स्थिति और परिसरों में सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विकास के साथ-साथ छात्रों की सुरक्षा भी प्राथमिक होनी चाहिए. वहीं, अन्य छात्र नेताओं ने हॉस्टलों में सभी वर्गों के छात्रों के समान अधिकार और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने की बात कही.

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