बिहार के सासाराम से आने वाले टीम इंडिया के तेज गेंदबाज आकाश दीप ने पटना में आयोजित पंचायत आजतक के मंच से "खेलोगे कूदोगे बनोगे नवाब" सत्र में अपनी अनसुनी कहानी सुनाई. आकाश दीप ने बताया कि बचपन में गांव में बैटिंग किट खरीदने के पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने बैटिंग छोड़कर बॉलिंग शुरू कर दी. साथ ही उन्होंने अपने पिता और बड़े भाई को कुछ ही महीनों के अंदर खोने का दर्द भी साझा किया, जिसने उन्हें घर से बाहर निकलने के लिए मजबूर कर दिया.
आकाश दीप ने बताया कि उनके गांव में क्रिकेट खेलना किसी अपराध जैसा माना जाता था, क्योंकि उस दौर में बिहार से कोई भी खिलाड़ी खेल के जरिए अपना भविष्य सुरक्षित नहीं कर पाया था. उनके पिता खुद टीचर थे और मिडल क्लास परिवार होने के कारण सभी माता-पिता चाहते थे कि बच्चों का भविष्य पढ़ाई से सुरक्षित हो. गांव में क्रिकेट के लिए मैदान भी नहीं था. जब वे 20-21 साल के थे, तभी उनके पिता और बड़े भाई का निधन हो गया.
इसी दौर ने उन्हें मजबूत बनाया और दिल्ली जाने का हौसला दिया, जहां उनकी बहन और फौजी जीजा रहते थे. वहां उन्होंने पहली बार लेदर बॉल क्रिकेट देखा, क्योंकि गांव में वे सिर्फ सॉफ्टबॉल क्रिकेट खेलते थे. बैटिंग किट महंगी होने की वजह से उन्होंने बॉलिंग को अपनाया, क्योंकि बॉलर को खुद कोई सामान नहीं खरीदना पड़ता था.
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इसके बाद वे कोलकाता गए, कड़ी मेहनत की और अगले ही साल क्लब क्रिकेट से प्रोफेशनल क्रिकेट में जगह बना ली. साल 2023 में उनका चयन हुआ. टेस्ट टीम में चुने जाने की खबर उन्हें राहुल द्रविड़ के मैसेज से मिली, जिसे नंबर सेव न होने की वजह से वे पहले पहचान नहीं पाए. उनका डेब्यू मैच रांची में हुआ, जहां उनकी मां और परिवार भी मौजूद रहे. उन्होंने सचिन तेंदुलकर को अपना आदर्श बताया और बिहार सरकार की खेल नीतियों की तारीफ की, जिसमें खेल का बजट तीस करोड़ से बढ़कर पांच सौ साठ करोड़ हो गया है. वे खुद एक क्रिकेट अकादमी भी चलाते हैं.