'बिहार पंचायत आजतक' के विशेष मंच पर राज्य के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी और उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. संजय सिंह टाइगर ने शिरकत की. इस दौरान दोनों मंत्रियों ने बिहार के शैक्षणिक परिदृश्य को बदलने और युवाओं के पलायन को रोकने के लिए अपनी सरकार का विस्तृत एक्शन प्लान पेश किया.
शिक्षा मंत्री शैक्षणिक चुनौतियों, प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक के कायाकल्प, शिक्षकों की स्थानांतरण नीति और युवाओं के पलायन को रोकने के लिए सरकार के रोडमैप पर विस्तार से अपनी बात रखी.
शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग नीति में पूर्ण पारदर्शिता, उच्च शिक्षा के विस्तार और 2030 तक 1 करोड़ नौकरियों व रोजगार के अवसरों के सृजन का संकल्प दोहराया. इसकए साथ ही बिहार से होने वाले पलायन को रोकने की रूप रेखा भी रखी.
स्कूलों का कायाकल्प का डेडलाइन-बेस्ड प्लान
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि राज्य के सरकारी शैक्षणिक संस्थानों के ढांचे को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर काम शुरू किया गया है. उन्होंने कहा कि प्राथमिक, माध्यमिक स्कूलों और कॉलेजों की स्थिति सुधारने के लिए 'कायाकल्प अभियान' चलाया जा रहा है. इसे 30 नवंबर तक मिशन मोड में पूरा करने का लक्ष्य है.
उन्होंने कहा कि राज्य में वर्तमान में लगभग 1,100 से 1,300 ऐसे स्कूल चिन्हित किए गए हैं, जिनके पास अपनी जमीन उपलब्ध नहीं है. मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग एक विशेष एक्शन प्लान के तहत अगले 6 महीनों के भीतर इन स्कूलों को भूमि उपलब्ध कराएगा.
शिक्षा मंत्री ने दावा किया बिहार 2,014 ऐसे विद्यालय हैं, जहां भूमि तो उपलब्ध है, लेकिन भवन जर्जर हैं, पहुंच मार्ग नहीं हैं या अतिक्रमण की समस्या है. ऐसे सभी स्थलों को चिन्हित कर 31 मार्च-2027 तक भवन निर्माण व अन्य बाधाओं को दूर करने की समयसीमा तय की गई है.राज्य के सरकारी स्कूलों से पढ़कर निकले पूर्व छात्रों को अपने पुराने विद्यालयों से जोड़ने और उनके विकास में सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान शुरू किया गया है.
ड्रॉपआउट रेट पर नियंत्रण और स्मार्ट क्लासेस
शिक्षा मंत्री ने माना कि कक्षा 5 के बाद, कक्षा 9 में और फिर 12वीं के बाद ड्रॉपआउट की संख्या में भारी वृद्धि होती है. इसके मुख्य तीन कारण बताएं. उन्होंने कहा कि पारिवारिक और आर्थिक समस्याओं के कारण बच्चों का कम उम्र में ही आजीविका में लगना. विद्यालयों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित रहना.
मिथिलेश तिवारी ने बताया कि ड्रॉपआउट रोकने के लिए सरकार कक्षा 6 से ही छात्रों की 'ब्रेन मैपिंग' करेगी. जो छात्र केवल पारंपरिक/अकादमिक शिक्षा में रुचि नहीं रखते, उन्हें वोकेशनल और स्किल-बेस्ड कोर्स की ओर मोड़कर 'लर्न टू अर्न' मॉडल से जोड़ा जाएगा.
उन्होंने कहा कि साथ ही राज्य के मॉडल स्कूलों के लगभग 4 लाख विद्यार्थियों को स्मार्ट क्लास, लाइव क्लास और 'फ्लो ऐप' से जोड़ा जा रहा है. ज्ञान भवन में 700 प्रधानाध्यापकों की कैपेसिटी बिल्डिंग (विशेष प्रशिक्षण) जारी है, ताकि बिहार के बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोटा, सीकर या दिल्ली न जाना पड़े.
बिहार में शिक्षक ट्रांसफर की डेडलाइन तय
शिक्षकों के तबादले से जुड़े मुद्दे पर मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सरकार ने एक ऐतिहासिक और पूरी तरह पारदर्शी नीति बनाई है.राज्य में स्वीकृत पदों से अधिक (सरप्लस) पदस्थापित शिक्षकों की सूची तैयार की गई. पहले चरण में ई-शिक्षा पोर्टल पर 73,000 शिक्षकों ने आवेदन किया, जिनमें से 47,000 का उनकी इच्छित जगह पर स्थानांतरण पूरा हो चुका है.
उन्होंने कहा कि महिलाओं को उनकी पंचायत या निकटतम वार्ड के स्कूल में और पुरुष शिक्षकों को उनके गृह जिले के निकटतम ब्लॉक/प्रखंड में ऐच्छिक पोस्टिंग का कानूनी अधिकार दिया गया है. 12-13 जिलों में आई बाढ़ और आगामी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनावों के कारण तिथियों में थोड़ा संशोधन किया गया है. अक्टूबर में जनरल ट्रांसफर पोर्टल खोला जाएगा और 15 नवंबर तक पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से संपन्न कर ली जाएगी.
बिहार की उच्च शिक्षा में आ रहा बदलाव-शिक्षा मंत्री
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. संजय सिंह टाइगर ने बिहार की ऐतिहासिक विरासत (नालंदा व विक्रमशिला) का उल्लेख करते हुए उच्च शिक्षा में किए जा रहे सुधारों को रेखांकित किया. 15 जुलाई को राज्य के 211 प्रखंडों में एक साथ नए डिग्री कॉलेजों की शुरुआत की गई, ताकि 12वीं के बाद दूरी के कारण लड़कियों का ड्रॉपआउट रोका जा सके.
संजय सिंह ने कहा कि युवाओं को हुनरमंद और रोजगारपरक बनाने के लिए बिहार में जननायक कर्पूरी ठाकुर के नाम पर कौशल विश्वविद्यालय बनाया जा रहा. एआई (AI) और कंप्यूटर साइंस की आधुनिक पढ़ाई के लिए के लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई. उन्होंने कहा कि पारंपरिक कला और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए.जुबा साहनी शिल्पकला विश्वविद्यालय बनाया दया है.
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि बिहार में बेटी स्टार्टअप चैलेंज है. इसीलिए शोध और उद्यमिता के लिए 50,000 से 2,00,000 रुपये तक की आर्थिक मदद दी जा रही है.
मुख्यमंत्री पीएचडी फिलॉसफी योजना
शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रतिवर्ष 1,000 मेधावी छात्राओं को पीएचडी पूरी होने तक (4 वर्षों के लिए) ₹10,000 प्रति माह की छात्रवृत्ति. विश्वविद्यालयों में नामांकन, परीक्षा और परिणाम समय पर हों, इसके लिए 'समर्थ पोर्टल' और 'शैक्षणिक कैलेंडर' लागू किया गया है. निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2013 का सरलीकरण किया गया है ताकि राज्य में बेहतर निजी संस्थान भी खुल सकें.
साथ ही उन्होंने कहा कि कॉलेजों में शैक्षणिक, छात्रावास या प्रशासनिक समस्याओं की शिकायत व सुझाव के लिए यह पोर्टल चालू है. इसमें शिकायतकर्ता का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है और 30 दिनों के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है.
2030 तक 1 करोड़ रोजगार देने का दावा
बिहार से अलग अलग राज्यों में होने वाले पलायन को रोकने की रूप रेखा शिक्षा मंत्री ने रखा. उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक 1 करोड़ युवाओं को सरकारी नौकरियों और रोजगार के अवसरों से जोड़ना है. राज्य में उद्योग और निवेश बढ़ाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम और औद्योगिक प्रोत्साहन नीति लागू की गई है. सरकार का लक्ष्य ₹5,00,000 करोड़ का निवेश बिहार में लाना है.
बिहार में अपराध पर जीरो टॉलरेंस नीति
बिहार में बीजेपी सरकार बनने के बाद एक बात साफ है कि कानून का राज. उन्होंने कहा कि सरकार ने स्पष्ट किया कि राज्य में 'रूल ऑफ लॉ' पूरी तरह स्थापित है. अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति से निवेशकों, पर्यटकों और आम नागरिकों में विश्वास मजबूत हुआ है. बिहार में एक बात साफ है कि अगर कोई कानून तोड़ेगा तो फिर उसका अंतिम संस्कार तय है.
बिहार के दोनों शिक्षा मंत्रियों ने प्रतिबद्धता व्यक्त की कि दलीय राजनीति से ऊपर उठकर बिहार को पुनः शिक्षा, कौशल और रोजगार का अग्रणी केंद्र बनाया जाएगा.