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गुस्से में छोड़ा घर, रेड लाइट एरिया से रेस्क्यू... 85 दिनों तक तस्करों के चंगुल में रही 12वीं की छात्रा की कहानी

मुजफ्फरपुर में 12वीं की छात्रा भाई की डांट से नाराज होकर घर से निकली थी. स्टेशन पर उसे नौकरी का झांसा देकर मानव तस्करी के जाल में फंसा लिया गया. उसे पहले कोलकाता और फिर भागलपुर के रेड लाइट एरिया में ले जाया गया. करीब 85 दिन बाद पुलिस ने भागलपुर में छापेमारी कर उसे बरामद किया है. इसी दौरान नालंदा की एक अन्य किशोरी को भी मुक्त कराया गया है.

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पुलिस ने दो किशोरियों को किया बरामद. (Photo: Screengrab)
पुलिस ने दो किशोरियों को किया बरामद. (Photo: Screengrab)

कभी-कभी घर से गुस्से में उठाया गया एक छोटा सा कदम जिंदगी को ऐसी जगह ले जाता है, जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता. मुजफ्फरपुर की 12वीं की एक छात्रा के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. घर में भाई ने डांट दिया तो वह नाराज होकर घर से निकल गई. शायद उसने सोचा होगा कि कुछ देर बाद गुस्सा शांत होगा और वह वापस लौट आएगी. लेकिन घर से निकलने के बाद मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन पर उसकी मुलाकात एक ऐसे शख्स से हुई, जिसने उसे नौकरी का सपना दिखाया.

छात्रा उस पर भरोसा कर बैठी. फिर शुरू हुआ 85 दिनों का ऐसा सफर, जिसमें उसे एक शहर से दूसरे शहर ले जाया गया. पुलिस के मुताबिक, पहले उसे कोलकाता ले जाया गया और फिर वहां कथित तौर पर रेड लाइट एरिया में बेच दिया गया. बाद में उसे भागलपुर के एक रेड लाइट एरिया में दोबारा बेचने का आरोप है. आखिरकार मुजफ्फरपुर पुलिस की स्पेशल टीम ने उसे वहां से बरामद कर लिया.

मामला मुजफ्फरपुर के गायघाट इलाके का है. पुलिस के मुताबिक, 12वीं में पढ़ने वाली छात्रा 10 मई को भाई की डांट से नाराज होकर घर से निकल गई थी. परिवार ने उसे ढूंढने की काफी कोशिश की, लेकिन जब उसका कोई पता नहीं चला तो 12 मई को उसके भाई ने गायघाट थाने में अपहरण की शिकायत दर्ज कराई.

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पुलिस ने मामला दर्ज कर तलाश शुरू की. शुरुआती जांच में एक युवक पर शक गया, लेकिन बाद की जांच में उसकी भूमिका सामने नहीं आई. इसके बाद सीनियर पुलिस अफसरों के निर्देश पर छात्रा की तलाश के लिए एक स्पेशल टीम बनाई गई. रेस्क्यू के बाद छात्रा ने पुलिस को जो जानकारी दी, उसके मुताबिक घर से निकलने के बाद वह मुजफ्फरपुर जंक्शन पर अकेली बैठी थी. वह परेशान थी और रो रही थी.

इसी दौरान एक युवक उसके पास आया. उसने बातचीत की और कोलकाता में अच्छी नौकरी दिलाने की बात कही. छात्रा उसके साथ कोलकाता चली गई. लेकिन जिस नौकरी के भरोसे वह घर से दूर गई थी, वहां पहुंचकर कहानी बिल्कुल बदल गई. पुलिस के मुताबिक, उसे कोलकाता के रेड लाइट एरिया में बेच दिया गया. छात्रा ने वहां विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई और उसे जबरन वहां रखा गया. पुलिस को दिए बयान में उसने अपने साथ हुई हिंसा की जानकारी भी दी है.

एक महीने बाद फिर बदला ठिकाना

पुलिस के अनुसार, करीब एक महीने बाद छात्रा को कोलकाता से भागलपुर के इशीपुर बरहट थाना क्षेत्र के सिवानपुर स्थित रेड लाइट एरिया में ले जाया गया. यानी एक बार फिर उसे एक जगह से दूसरी जगह पहुंचा दिया गया. उधर दूसरी तरफ मुजफ्फरपुर में परिवार अपनी बेटी की तलाश में लगा था और पुलिस की टीम भी लगातार सुराग जुटा रही थी. छात्रा की तस्वीर को मानव तस्करी से जुड़े संभावित ठिकानों तक पहुंचाया गया.

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अलग-अलग इलाकों में मुखबिरों को एक्टिव किया गया और पुलिस टीम लगातार इनपुट जुटाती रही. फिर दो दिन पहले पुलिस को एक सूचना मिली. पुलिस को जानकारी मिली कि जिस लड़की की तलाश की जा रही है, वह भागलपुर के सिवानपुर इलाके में एक मकान के अंदर है. इसके बाद मुजफ्फरपुर पुलिस की टीम भागलपुर पहुंची. टीम ने पहले इलाके की रेकी की और संदिग्ध मकान की पहचान की. फिर छापेमारी की गई.

पुलिस के मुताबिक, वहां मौजूद लोगों ने टीम का विरोध किया. धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू हो गई. हालात बिगड़ते देख महिला जांच अधिकारी पूजा कुमारी को अपनी सर्विस पिस्टल निकालनी पड़ी. करीब 52 मिनट तक चले इस संघर्ष के बाद पुलिस टीम छात्रा को सुरक्षित बाहर निकालने में सफल रही. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई.

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पुलिस को उसी मकान से नालंदा जिले की एक और किशोरी भी मिली. उसने भी पुलिस से मदद की गुहार लगाई. पुलिस ने उसे भी सुरक्षित मुक्त कराया और उसके संबंध में नालंदा पुलिस को जानकारी दी गई है. दोनों किशोरियों को मुजफ्फरपुर लाया गया.

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मुजफ्फरपुर पुलिस के मुताबिक, छात्रा का कोर्ट में बयान दर्ज कराया गया है. उसने अपनी बड़ी बहन के साथ रहने की इच्छा जताई है. इसके बाद पुलिस ने उसे परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की.

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डीएसपी पूर्वी-1 अलय वत्स के मुताबिक, छात्रा के लापता होने के बाद से ही पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी. मिले इनपुट के आधार पर भागलपुर के सिवानपुर से उसे सुरक्षित बरामद किया गया. इसी कार्रवाई में नालंदा की एक अन्य किशोरी को भी मुक्त कराया गया.

अब पुलिस की जांच सिर्फ छात्रा की बरामदगी तक नहीं है. जांच इस बात की भी हो रही है कि इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं, छात्रा को मुजफ्फरपुर से कोलकाता कौन लेकर गया, उसे वहां किसके हवाले किया गया. फिर भागलपुर तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका रही.

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