बिहार के बेतिया में एक ऐसी बारात निकली, जिसने लोगों को पुराने दौर की याद दिला दी. जहां आजकल शादियों में लग्जरी कार, डीजे और दिखावे का चलन बढ़ गया है, वहीं इस शादी में सादगी और परंपरा की ऐसी मिसाल देखने को मिली कि लोग तारीफ करते नहीं थक रहे हैं. यह अनोखी बारात थरूहट क्षेत्र के हरनाटांड़ से करीब 2 किलोमीटर दूर कटैया गांव की है. यहां स्वर्गीय मनबहाली महतो के बेटे देवशील कुमार, जो पेशे से इंजीनियर हैं, और नंद किशोर महतो की बेटी सोनिया कुमारी, जो बिहार पुलिस में कार्यरत हैं, उन्होंने अपनी शादी को यादगार बनाने के लिए अनोखा तरीका अपनाया.
30 बैलगाड़ियां संग बारात
आधुनिक गाड़ियों और भव्य काफिलों से दूर इस बारात में करीब 30 बैलगाड़ियां मंगवाई गईं, जिन पर बाराती सवार होकर दुल्हन के घर पहुंचे. सबसे खास बात यह रही कि दूल्हा देवशील कुमार ने भी स्कॉर्पियो या किसी लग्जरी कार की जगह पालकी में बैठकर बारात निकाली. बैलगाड़ियों पर लाउडस्पीकर के साथ निकली यह बारात देखकर लोग हैरान भी हुए और खुश भी. पूरे इलाके में यह शादी चर्चा का विषय बन गई है.
दरअसल, पश्चिम चंपारण के थरूहट इलाके में रहने वाला थारू जनजाति समुदाय अपनी परंपराओं और प्रकृति से जुड़े जीवन के लिए जाना जाता है. जब दुनिया तेजी से आधुनिकता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में आगे बढ़ रही है, तब भी यह समुदाय अपनी पुरानी संस्कृति और रीति-रिवाजों को संजोए हुए है.
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
9 मार्च को हुई इस शादी का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. लोग इस बारात की जमकर सराहना कर रहे हैं और कह रहे हैं कि “ऐसी बारात अब शायद ही देखने को मिलती है, इसने 90 के दशक की यादें ताजा कर दीं.
कई लोगों का कहना है कि इंजीनियर दूल्हा और बिहार पुलिस की दुल्हन ने मिलकर एक बार फिर साबित कर दिया कि शादी की असली खूबसूरती दिखावे में नहीं, बल्कि परंपरा और सादगी में होती है.