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420 किलोमीटर का सफर, हाइवे पर स्केटिंग और हर-हर महादेव... देवघर के लिए निकली अनोखी कांवड़ यात्रा

सावन में कोई नंगे पैर चलता है, कोई कांवड़ कंधे पर उठाकर... लेकिन बिहार के कुछ युवाओं ने बाबा भोले तक पहुंचने के लिए ऐसा रास्ता चुना है, जिसे देखकर हाइवे पर गुजरने वाले लोग भी रुक जा रहे हैं. गेरुआ वस्त्र, पीठ पर तिरंगा, भोले का ध्वज... और पैरों में स्केट्स. करीब 420 किलोमीटर की यह यात्रा उनकी आस्था के साथ जुनून की भी कहानी है.

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सड़क पर स्केटिंग करते हुए जा रहे युवा कांवड़िये. (Photo: ITG)
सड़क पर स्केटिंग करते हुए जा रहे युवा कांवड़िये. (Photo: ITG)

बिहार के समस्तीपुर, मोतिहारी और वैशाली के करीब दर्जन भर युवाओं की टोली इन दिनों सड़क पर दौड़ती नजर आ रही है. ये किसी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले रहे. इनकी मंजिल है बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर, जहां ये स्केटिंग करते हुए पहुंचकर जलाभिषेक करेंगे. हाइवे पर तेज रफ्तार से स्केटिंग करते, बीच-बीच में स्टंट दिखाते और हर-हर महादेव के जयकारे लगाते ये युवा जहां से गुजर रहे हैं, वहां लोगों की नजरें कुछ देर के लिए इन्हीं पर ठहर जा रही हैं.

begusarai youths skate 420 km to deoghar for baba baijnath dham kanwar yatra

इस अनोखी यात्रा की शुरुआत समस्तीपुर के उजियारपुर के रहने वाले शशि कुमार गोस्वामी के एक आइडिया से हुई. शशि खुद स्केटिंग करते हैं और सोशल मीडिया के जरिए उनकी दोस्ती अलग-अलग जिलों के कई युवाओं से हुई. 

यह भी पढ़ें: रास्ता पूछने की जरूरत नहीं... बस QR कोड स्कैन कीजिए, कांवड़ यात्रा का पूरा नक्शा मोबाइल पर मिल जाएगा

बातों-बातों में सभी ने तय किया कि इस बार सावन में देवघर तक की यात्रा पैदल या बाइक से नहीं, बल्कि स्केटिंग करते हुए करेंगे. इसके बाद समस्तीपुर, मोतिहारी और वैशाली के युवा एक साथ आए और बाबा भोले का आशीर्वाद लेकर यात्रा शुरू कर दी.

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यात्रा की शुरुआत 30 जुलाई को समस्तीपुर के मंदिर से हुई. दूसरे दिन यह टोली बेगूसराय पहुंची, जहां खटोपुर शिव मंदिर में रात का विश्राम किया. अगले दिन सुबह मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद फिर स्केट्स पहनकर देवघर की ओर निकल पड़ी. युवाओं का लक्ष्य 4 अगस्त तक देवघर पहुंचकर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करना है. इससे पहले ये सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा धाम जाएंगे.

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सिर्फ स्केट्स नहीं... पूरा इंतजाम भी साथ

करीब 420 किलोमीटर की इस यात्रा को आसान बनाने के लिए पूरी टीम ने व्यवस्था भी की है. दो बाइक पर साथी आगे-पीछे चलते हैं, जबकि एक साइकिल पर खाने-पीने का सामान और जरूरी सामान रखा गया है. यात्रा के दौरान अगर कोई स्केटर थक जाए या चोट लग जाए तो साथी तुरंत उसकी मदद करते हैं. स्केटिंग करते हुए मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि हाइवे पर लगातार स्केटिंग करना आसान नहीं है. कई बार बैलेंस बिगड़ता है, गिर भी जाते हैं, लेकिन बाबा भोले की भक्ति उन्हें दोबारा खड़ा कर देती है.

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उनका कहना है कि यह यात्रा सिर्फ रोमांच के लिए नहीं, बल्कि श्रद्धा के लिए है. साथ ही उनका सपना है कि वे सोशल मीडिया और यूट्यूब पर अपनी पहचान बनाएं और आगे चलकर जरूरतमंद लोगों की मदद कर सकें.

गेरुआ वस्त्र, पीठ पर तिरंगा, हाथ में बाबा भोले का ध्वज और पैरों में स्केट्स... यह दृश्य हाइवे पर रोज नहीं दिखता. यही वजह है कि राहगीर रुककर इन युवाओं की तस्वीरें और वीडियो बनाते हैं. सावन में लाखों श्रद्धालु बाबा धाम पहुंचते हैं. कोई पैदल, कोई साइकिल से, कोई दौड़ते हुए. लेकिन स्केटिंग करते हुए बाबा के दरबार पहुंचने निकली यह टोली अपनी अनोखी यात्रा की वजह से हर किसी का ध्यान खींच रही है.

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