यूरोप और दुनिया के दूसरे हिस्सों में कई देश हिंसक प्रोटेस्ट की आग में झुलस रहे हैं. सबसे बुरा हाल फ्रांस का है. महंगाई समेत कई मुद्दों पर शुरू जेन-जी प्रोटेस्ट हिंसक रूप लेकर बेकाबू हो चुका है. राजधानी पेरिस समेत फ्रांस के अधिकांश बड़े शहर इसकी चपेट में हैं.
सड़कों पर आगजनी हो रही, स्टोर्स लूटे जा रहे हैं, पुलिस के साथ हिंसक प्रदर्शनकारी जगह-जगह भिड़ रहे हैं. राष्ट्रपति मैक्रों ने सख्ती से उपद्रवियों से निपटने का ऐलान किया है. ऐसे ही हालात इटली में मिलान समेत कई शहरों का है और स्पेन भी इस हिंसक उपद्रव से अछूता नहीं है. पढ़ें इन देशों की ताजा अपडेट...
1. क्राइसिस मीटिंग के बाद फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने कहा कि लोकल मेयरों को जहां जरूरत हो वहां कर्फ्यू लगाने का अधिकार दिया जा रहा है. फ्रांस में अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को हाल के प्रदर्शनों से प्रभावित इलाकों से बचने की सलाह देते हुए एक अलर्ट भी जारी किया है.
2. स्पेन में सेकेंडरी और एलीमेंट्री स्कूल टीचर्स के प्रोटेस्ट से शुरू हुआ विरोध बढ़ती महंगाई समेत कई मुद्दों पर तेज होता जा रहा है. बार्सीलोना में घरों की महंगी कीमतें और न्यूनतम वेतन भी विरोध का मुद्दा बन चुका है.
3. दूसरे यूरोपीय देश इटली की बात करें तो मिलान जैसे बड़े शहरों में सड़क उपद्रवियों के हवाले हैं. सरकार ने मिलान में लूटपाट और पुलिस के साथ झड़पों के बाद हालात काबू करने के लिए 500 सैनिकों को उतारा है.
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4. ऐसे ही हालात अल्बानिया में भी हैं. तिराना शहर में विपक्ष प्रधानमंत्री की मांग के साथ सड़कों पर है तो यूनिवर्सिटी और कॉलेज के छात्र भी प्रोटेस्ट में शामिल हो चुके हैं. प्रदर्शनकारी करप्शन रोकने, हेल्थकेयर-एजुकेशन और पब्लिक पेंशन को लेकर तमाम मांगें उठा रहे हैं.
5. ब्राजील में फेसबुक चलाने वाली कंपनी मेटा समेत कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विरोध हो रहा है. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ये कंपनियों उनके चुनावी सिस्टम में प्रभावित करने की कोशिश कर रही हैं. यहां बोलेंसारो और लूला डा सिल्वा के समर्थक सड़कों पर आमने-सामने हैं.
6. वहीं अर्जेंटीना में हाल ही में यूनिवर्सिटी की फंडिंग में कटौती को लेकर विरोध देखने को मिला.
7. बेल्जियम में बढ़ती महंगाई को लेकर सड़कों पर भारी संख्या में लोग उतरे और उन्होंने सरकार की नीतियों का विरोध किया.
दुनिया के इन तमाम देशों में चल रहे प्रोसेट्स को लेकर वैश्विक नेताओं की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यूरोपीय देशों खासकर फ्रांस की इमिग्रेशन पॉलिसी के लिबरल होने पर सवाल उठाए और कहा कि अगर ऐसे ही चलता रहा तो पेरिस जल्द मुस्लिम शहर बन जाएगा.
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