'...तो ट्रंप की उन 35 लोगों की लिस्ट में PM मोदी टॉप पर होंगे', Exclusive इंटरव्यू में बोले अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि भारत-अमेरिका रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति ट्रंप की करीब 35 नेताओं से मिलने की पसंद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे ऊपर होंगे. गोर ने क्वाड, रक्षा, व्यापार और निवेश में बढ़ते सहयोग का जिक्र किया.

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अमेरिकी राजदूत ने कहा कि बातचीत आगे बढ़ रही है. (File Photo- PTI) भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अमेरिकी राजदूत ने कहा कि बातचीत आगे बढ़ रही है. (File Photo- PTI)

रोहित शर्मा

  • वॉशिंगटन,
  • 04 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:19 PM IST

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर आजतक से खास बातचीत की है. इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पूछा जाए कि दुनिया के 35 नेताओं में से वह किससे मिलना चाहेंगे, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम उनकी लिस्ट में सबसे ऊपर होगा. 

एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में अमेरिकी राजदूत गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा लगातार बढ़ रहा है. भारत और अमेरिका के रिश्ते आज से पांच साल पहले की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत हैं. दोनों देश लगभग हर क्षेत्र में साथ काम कर रहे हैं. चाहे वह व्यापार हो, टेक्नोलॉजी, फार्मा, स्पेस, डिफेंस या सैन्य अभ्यास, हर क्षेत्र में सहयोग बढ़ रहा है.

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क्वाड को बताया बेहद महत्वपूर्ण

सर्जियो गोर ने दिल्ली में हुई क्वाड शेरपा बैठक को बेहद महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधियों के लिए एक साथ बैठना जरूरी था. विदेश सचिव की मेजबानी में हुई इस बैठक में चारों देशों ने क्वाड के अगले लक्ष्यों और प्राथमिकताओं पर चर्चा की.

उन्होंने कहा कि क्वाड ऐसे साझेदार देशों का समूह है, जो एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं. अमेरिका के लिए जापान और ऑस्ट्रेलिया बेहद करीबी सहयोगी हैं और भारत भी इस साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

गोर के मुताबिक, क्वाड की अगली मंत्रीस्तरीय बैठक अक्टूबर में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में होगी, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अपने समकक्षों के साथ शामिल होंगे. उन्होंने उम्मीद जताई कि इसके बाद इस साल के अंत में क्वाड नेताओं का शिखर सम्मेलन भी हो सकता है. हालांकि, उन्होंने कहा कि इसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है.

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उन्होंने बताया कि क्वाड मानवीय सहायता, आपदा राहत, संयुक्त प्रशिक्षण और चारों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल जैसे क्षेत्रों में काम कर रहा है. इसके अलावा नई और उभरती तकनीक भी क्वाड के एजेंडे में महत्वपूर्ण है. इसमें AI, डेटा सेंटर और महत्वपूर्ण खनिज जैसे मुद्दे शामिल हैं. उनका प्रयास है कि जब भी चारों देशों के नेता या मंत्री किसी एक जगह मौजूद हों, तो क्वाड की बैठक हो. उनके मुताबिक, इससे सहयोग को और आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.

‘भारत को उच्चस्तरीय बैठकों की आदत डाल लेनी चाहिए’

अमेरिकी राजदूत ने भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते उच्चस्तरीय संपर्क का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को ऐसी बैठकों की आदत डाल लेनी चाहिए. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अक्टूबर में दोबारा भारत आ रहे हैं. रुबियो की पिछली भारत यात्रा चार दिन की थी, जो राष्ट्रपति के बिना अमेरिका से बाहर उनकी सबसे लंबी यात्राओं में से एक थी. उन्होंने कहा कि इतनी कम अवधि में किसी अमेरिकी विदेश मंत्री का दोबारा भारत आना असामान्य है, लेकिन इसकी आदत डाल लीजिए.

उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ रिश्ते को और मजबूत करना चाहता है और इसके लिए दोनों देशों को लगातार एक-दूसरे के संपर्क में रहना होगा.

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राजदूत ने कहा कि आने वाले समय में केवल विदेश मंत्री ही नहीं, बल्कि अमेरिका के कई अन्य कैबिनेट स्तर के अधिकारी भी भारत आएंगे. इसके अलावा साल खत्म होने से पहले अमेरिका के करीब तीन राज्यों के गवर्नरों के भारत आने की उम्मीद है. ये गवर्नर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और दूसरे क्षेत्रों में मौजूद अवसरों को देखकर यहां आ रहे हैं.

‘भारत में स्थिरता के लिए पीएम मोदी को श्रेय’

भारत की आर्थिक वृद्धि और अमेरिकी कंपनियों के भारत में निवेश को लेकर पूछे गए सवाल पर सर्जियो गोर ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश दोनों दिशाओं में बढ़ रहा है. अमेरिकी दूतावासों के जरिए अमेरिका में नए निवेश लाने के मामले में भारत स्थित अमेरिकी दूतावास सबसे आगे रहा. अमेरिकी कंपनियां भी भारत में लगातार निवेश कर रही हैं. माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, डेटा सेंटर, एआई सेंटर और फार्मा कंपनियों समेत कई क्षेत्रों में अमेरिकी कंपनियों की मौजूदगी बढ़ रही है.

उन्होंने कहा कि इसके पीछे भरोसा और स्थिरता महत्वपूर्ण है. भारत की आर्थिक प्रगति को अमेरिका के लिए अच्छा बताते हुए गोर ने कहा कि अमेरिका एक स्थिर भारत के साथ काम करना चाहता है.

उन्होंने कहा, ‘आपके प्रधानमंत्री भारत में ऐसी स्थिरता लाते हैं, जो दुनिया के दूसरे हिस्सों में देखने को नहीं मिलती.’ गोर ने प्रधानमंत्री मोदी के लंबे कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि इतनी जीवंत लोकतांत्रिक व्यवस्था में 12 साल तक प्रधानमंत्री बने रहना एक बड़ी उपलब्धि है और स्थिरता दुनिया के लिए अच्छी चीज है.

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240 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार

सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका व्यापार का आंकड़ा भी साझा किया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार करीब 240 अरब डॉलर है. दोनों देशों के नेताओं ने आने वाले वर्षों में इसे 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है.

उन्होंने कहा कि व्यापार दोनों तरफ से होना चाहिए और दोनों देशों की कंपनियां एक-दूसरे के बाजार में अवसर तलाश रही हैं. अमेरिकी कंपनियां भारत आ रही हैं और भारतीय कंपनियां भी अमेरिका में निवेश कर रही हैं.

रक्षा क्षेत्र में भारत पर अविश्वसनीय भरोसा

रक्षा सहयोग पर अमेरिकी राजदूत ने कहा कि भारत और अमेरिका का रक्षा संबंध केवल हथियारों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भरोसे पर आधारित है. उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया के हर देश को अपने सैन्य उपकरण नहीं बेचता. भारत उन देशों में शामिल है, जिन पर अमेरिका भरोसा करता है. अमेरिका के पास दुनिया की सबसे बेहतरीन और उन्नत तकनीक है और भारत जैसे भरोसेमंद साझेदार के साथ काम करना उसके लिए महत्वपूर्ण अवसर है.

गोर ने भारत में जेवलिन मिसाइल के सह-निर्माण से जुड़े समझौते का जिक्र किया. इसके अलावा उन्होंने अपाचे हेलीकॉप्टर की आपूर्ति और रक्षा क्षेत्र में चल रही अन्य परियोजनाओं का भी उल्लेख किया.

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उन्होंने कहा कि आने वाले समय में रक्षा क्षेत्र में और भी समझौते और बिक्री हो सकती है. इसके साथ ही दोनों देश लगातार सैन्य अभ्यास भी कर रहे हैं. उन्होंने राजस्थान में होने वाले आगामी बड़े सैन्य अभ्यास का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अमेरिका के साथ किसी भी अन्य देश की तुलना में ज्यादा सैन्य अभ्यास करता है.

गोर ने एक बार फिर भारत-अमेरिका संबंधों को दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के व्यक्तिगत संबंधों से भी जोड़ते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच वास्तविक दोस्ती है. उन्होंने जी-7 के दौरान ट्रंप के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया था कि जब तक उनके मित्र प्रधानमंत्री मोदी वहां हैं, भारत अमेरिका पर भरोसा कर सकता है.

व्यापार समझौते पर क्या बोले गोर?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अमेरिकी राजदूत ने कहा कि बातचीत आगे बढ़ रही है. उन्होंने बताया कि भारत में अमेरिकी राजदूत के तौर पर उनकी नियुक्ति के एक महीने के भीतर दोनों देशों ने व्यापार समझौते को लेकर घोषणा की थी.

हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा अमेरिका के एक कानून को खारिज किए जाने के बाद समझौते के कुछ हिस्सों पर दोबारा काम करना पड़ा. गोर ने कहा कि समझौते को फिर से तैयार किया जा रहा है और उन्हें पूरा भरोसा है कि दोनों देश इसे अंतिम रूप देने में सफल होंगे.

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उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले कुछ हफ्तों या कुछ महीनों में व्यापार समझौता अंतिम रूप ले सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे साझेदारों की तुलना में भारत के साथ अमेरिका काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है. उदाहरण के तौर पर उन्होंने यूरोपीय संघ का जिक्र किया और कहा कि वहां व्यापार समझौते को 20 साल से ज्यादा समय हो चुका है और वह अब भी पूरा नहीं हुआ है.

जी-20 में पीएम मोदी की यात्रा को लेकर उत्साह

अमेरिकी राजदूत ने दिसंबर में अमेरिका के फ्लोरिडा में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की संभावित यात्रा का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि भारत के कई वरिष्ठ मंत्री आने वाले महीनों में अमेरिका की यात्रा करेंगे.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर के सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर में अमेरिका जाने की संभावना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगले चार महीनों में तीन बार किसी भारतीय विदेश मंत्री की अमेरिका यात्रा होना सामान्य बात नहीं है. उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच बढ़े संपर्क को दोनों देशों के रिश्तों की मजबूती का संकेत बताया.

जी-20 में प्रधानमंत्री मोदी की संभावित यात्रा को लेकर उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी को अपना मित्र मानते हैं. इसलिए मोदी की यात्रा केवल समूह की बैठक तक सीमित नहीं रहेगी और इसके अलावा भी कुछ होने की उम्मीद है.

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‘35 नेताओं में से चुनना हो तो मोदी सबसे ऊपर’

सर्जियो गोर ने कहा कि अगर राष्ट्रपति ट्रंप के सामने दुनिया के करीब 35 नेता हों और उनसे पूछा जाए कि वह इनमें से किससे मिलना चाहेंगे, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम सबसे ऊपर होगा. उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री सबसे ऊपर उस सूची में होंगे.’ गोर ने इसे भारत और अमेरिका के बीच व्यक्तिगत और रणनीतिक संबंधों की मजबूती से जोड़ते हुए कहा कि ट्रंप और मोदी के बीच दोस्ती इस रिश्ते को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.

‘रिश्ते की दिशा को आंकड़े बताते हैं’

भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा को लेकर अपने भरोसे की वजह बताते हुए गोर ने कहा कि टेलीविजन और राजनीतिक चर्चाओं में हर दिन अलग-अलग राय सामने आती है, लेकिन आंकड़े झूठ नहीं बोलते. उन्होंने कहा कि साल-दर-साल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़ रहा है. रक्षा खरीद बढ़ रही है और सैन्य अभ्यासों की संख्या भी बढ़ रही है. उनके मुताबिक, जब रिश्ते की दिशा को आंकड़ों के आधार पर देखा जाता है तो यह लगातार ऊपर जाती हुई दिखाई देती है.

गोर ने कहा कि इतनी तेजी से विकसित हो रहा भारत-अमेरिका संबंध दूसरे देशों के लिए ईर्ष्या का विषय भी हो सकता है. उन्होंने इसकी एक वजह दोनों देशों के नेताओं की काम करने की शैली को बताया. उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप दोनों परिणाम हासिल करने और तेजी से काम करने में विश्वास रखते हैं. जब दोनों नेताओं की प्राथमिकताएं एक-दूसरे से मेल खाती हैं तो अच्छे परिणाम सामने आते हैं.

‘ट्रंप को भारत की यात्रा की बहुत अच्छी यादें हैं’

राष्ट्रपति ट्रंप की भारत यात्रा को लेकर पूछे गए सवाल पर अमेरिकी राजदूत ने कहा कि ट्रंप के मन में भारत को लेकर बेहद अच्छी यादें हैं. उन्होंने बताया कि उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप से बात की थी और ट्रंप ने अपनी भारत यात्रा को बहुत अच्छे ढंग से याद किया. गोर के मुताबिक, ट्रंप को भारत में बिताया समय, वहां मिले लोगों और प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी मुलाकातें आज भी अच्छी तरह याद हैं.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत आने के लिए उत्साहित हैं, लेकिन फिलहाल वह यात्रा को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं करना चाहते. उन्होंने बस इतना कहा- ‘बने रहिए, अगले साल आपके सामने होगा.’

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