'लेबनान में अपने प्रॉक्सी रोके ईरान, वरना इस बार तबाही मचा देंगे', ट्रंप ने फिर दी खुली धमकी

स्विट्जरलैंड में जारी अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और उसके सहयोगी संगठन हिज्बुल्लाह को लेकर बेहद सख्त चेतावनी दी है. ट्रंप ने कहा कि जरूरत पड़ी तो अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण कर सकता है और वहां से गुजरने वाले तेल पर टोल भी वसूलेगा.

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स्विट्जरलैंड वार्ता के बीच ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने हिज्बुल्लाह को नहीं रोका तो अमेरिका फिर से हमले करेगा. (Photo: AFP) स्विट्जरलैंड वार्ता के बीच ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने हिज्बुल्लाह को नहीं रोका तो अमेरिका फिर से हमले करेगा. (Photo: AFP)

aajtak.in

  • वॉशिंगटन,
  • 21 जून 2026,
  • अपडेटेड 9:42 PM IST

डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसने अपने प्रॉक्सी समूह हिज्बुल्लाह को नहीं रोका, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है. यह बयान ऐसे समय आया है जब स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए उच्चस्तरीय वार्ता जारी है. मीडिया से फोन पर बातचीत में ट्रंप ने ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की धमकी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो अमेरिका इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर नियंत्रण कर सकता है.

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फॉक्स न्यूज के मुताबिक ट्रंप ने कहा, 'जरूरत पड़ी तो हम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकते हैं. इसका मतलब होगा कि वहां से गुजरने वाले 20 प्रतिशत तेल पर अमेरिका का नियंत्रण होगा.' उन्होंने कहा कि यदि ईरान वार्ता को लेकर गंभीरता नहीं दिखाता, तो अमेरिका के पास कई विकल्प मौजूद हैं. ट्रंप ने कहा, 'अगर उन्होंने समझौता नहीं किया, तो हम उनसे टोल वसूलेंगे. मेरे पास 60 दिन का विकल्प है. उसके बाद मैं जो चाहूं कर सकता हूं.'

उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के कारण 20 जून को फारस की खाड़ी से 1.9 करोड़ बैरल कच्चा तेल बाहर निकल सका. ट्रंप ने इजरायल की भी आलोचना करते हुए कहा कि वह हिज्बुल्लाह को प्रभावी तरीके से खत्म नहीं कर पा रहा है. उन्होंने कहा, 'मुझे निराशा है कि इजरायल हिज्बुल्लाह को खत्म नहीं कर पा रहा. वे इमारतें गिराए बिना कुछ नहीं कर सकते. मैं यह जिम्मेदारी सीरिया को देने के करीब हूं, क्योंकि वह ज्यादा सटीक कार्रवाई कर सकता है.'

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ईरान मसला सुलझा तो क्षेत्र में आ जाएगी शांति

ट्रंप ने कहा कि फिलहाल सबसे बड़ा मुद्दा ईरान है और अगर यह मामला सुलझ गया, तो क्षेत्र के कई अन्य विवाद भी अपने आप सुलझ सकते हैं. इसी बीच, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान को लेकर एक और कड़ा संदेश पोस्ट किया. उन्होंने लिखा, 'ईरान को तुरंत लेबनान में अपने भारी फंडिंग वाले प्रॉक्सी समूहों को रोकना होगा. अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हम ईरान पर फिर बहुत बड़ा हमला करेंगे, पिछले सप्ताह से भी ज्यादा ताकत के साथ.'

इस महीने की शुरुआत में दोनों देशों ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत 60 दिनों तक क्षेत्रीय सुरक्षा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और विभिन्न मोर्चों पर युद्धविराम को लेकर बातचीत होनी है. ईरान के साथ स्विट्जरलैंड में हो रही वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने मीडिया से कहा कि लेबनान में युद्धविराम बनाए रखने की दिशा में पिछले कुछ दिनों में अच्छी प्रगति हुई है, हालांकि स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है.

लेबनान में संघर्ष विराम कायम रखने की कोशिश

वेंस ने कहा, 'ऐसे युद्धविराम हमेशा थोड़े जटिल होते हैं, लेकिन हमने यह सुनिश्चित करने में अच्छी प्रगति की है कि लेबनान में संघर्ष विराम कायम रहे.' उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन पूरे मध्य पूर्व में व्यापक शांति समझौता चाहता है और लेबनान में संघर्ष विराम को उसी दिशा में एक अहम कदम मानता है. वेंस ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के साथ रिश्तों में नई शुरुआत करना चाहता है, बशर्ते तेहरान उन नीतियों को छोड़ दे जिन्हें वॉशिंगटन क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण मानता है.

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दूसरी ओर, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह तब तक वार्ता के अगले चरण में आगे नहीं बढ़ेगा जब तक उसकी कुछ प्रमुख शर्तें पूरी नहीं होतीं. तेहरान का कहना है कि लेबनान पर इजरायली हमले बंद होने चाहिए, तभी परमाणु कार्यक्रम समेत अन्य अहम मुद्दों पर सार्थक बातचीत संभव होगी. ईरानी अधिकारियों ने यह भी मांग की है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा किए गए आर्थिक वादों को लागू किया जाए. ईरान का आरोप है कि अमेरिका लेबनान में जारी संघर्ष को रोकने में विफल रहा है, जहां मार्च से इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच लगातार हमले हो रहे हैं.

हिजबुल्लाह को ईरान का सबसे शक्तिशाली क्षेत्रीय सहयोगी माना जाता है और दशकों से उसे ईरान से आर्थिक, सैन्य और राजनीतिक समर्थन मिलता रहा है. वार्ता को ईरान के उस फैसले से भी झटका लगा है, जिसमें उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर फिर से नाकेबंदी लागू कर दी. यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है. हालांकि इस महीने हुए समझौता ज्ञापन में इस समुद्री मार्ग को फिर से खोलने और क्षेत्रीय तनाव कम करने की बात कही गई थी, लेकिन ईरान ने लेबनान में इजरायली कार्रवाई को लेकर होर्मुज को फिर से बंद कर दिया है.

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