अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच व्हाइट हाउस में अहम बैठक हुई. इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. इनमें से पांच मुद्दे बेहद अहम और संवेदनशील रहे जो दुनिया की इन दो महाशक्तियों के भविष्य के रिश्तों की दिशा तय करेंगी.
1. व्यापार समझौता दो महीने के लिए बढ़ा
अमेरिका ने इस हफ्ते अपने व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने में सफलता हासिल की है, लेकिन ये राहत बहुत लंबी नहीं है. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने जानकारी दी कि दोनों पक्ष उस ट्रेड डील को दो महीने के लिए बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं, जिसने पिछले साल के ट्रेड वॉर को खत्म किया था और जो नवंबर में खत्म होने वाली थी.
इस छोटी अवधि के विस्तार का मतलब है कि टैरिफ, चीनी खरीद, रेयर-अर्थ सप्लाई और तकनीकी प्रतिबंधों जैसे बड़े और जटिल सवाल अब अगले दौर की बातचीत पर टाल दिए गए हैं.
2. दिखावे और शान-शौकत का अनूठा अंदाज
राष्ट्रपति ट्रंप के लिए जिनपिंग का ये दौरा व्हाइट हाउस को अपनी पसंद के रंग-ढंग में दिखाने का एक बेहतरीन मौका था. बीजिंग में मिंग राजवंश के मंदिर और शाही बगीचे की खूबसूरती से इतर, ट्रंप ने अमेरिकी अंदाज में सैन्य शान-शौकत का प्रदर्शन किया.
बुधवार और गुरुवार को आयोजित समारोहों के दौरान त्रिकोणीय टोपियों और विशेष वेशभूषा में सजे सैनिकों ने मार्च किया और म्यूजिक बजाया. इस दौरान आसमान में गड़गड़ाहट करते हुए फाइटर जेट्स और बमवर्षक विमान भी गुजरे. एक मौके पर तो जेट की आवाज इतनी तेज थी कि राष्ट्रपति ट्रंप भी चौंक गए थे.
इसके अलावा, ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति को व्हाइट हाउस के नए हेलीपैड और 'मरीन वन' हेलीकॉप्टर का दीदार कराया.
3. ताइवान के मुद्दे पर चीन की 'सावधानी' की मांग
चीन की आधिकारिक समाचार एजेंसी के मुताबिक, शी जिनपिंग ने ताइवान के मुद्दे पर ट्रंप से बात की. उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका ताइवान के सवाल को पूरी सावधानी के साथ संभालेगा. चीनी एजेंसी ने ये भी कहा कि बीजिंग चाहता है कि अमेरिका ताइवान की स्वतंत्रता का खुलकर विरोध करे.
हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने अपने पुराने रुख में कोई बदलाव नहीं किया है, क्योंकि किसी भी तरह के बदलाव से ताइवान की सुरक्षा और अमेरिकी कांग्रेस में भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है.
4. 'थ्यूसीडाइड्स ट्रैप' और रणनीतिक जोखिम
ट्रंप से मुलाकात के दौरान जिनपिंग ने एक बार फिर 'थ्यूसीडाइड्स ट्रैप' का जिक्र किया. ये एक ऐसा अकादमिक सिद्धांत है जो यहेबताता है कि कैसे एक उभरती हुई महाशक्ति और एक स्थापित महाशक्ति के बीच की प्रतिस्पर्धा अक्सर युद्ध की ओर ले जाती है.
हालांकि जिनपिंग ने ये भी कहा कि इस जोखिम से पार पाया जा सकता है, लेकिन उनका ये संदर्भ इस बात की गवाही देता है कि दुनिया की इन दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच सैन्य संघर्ष का डर अभी भी गहराई से छाया हुआ है.
5. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर अलग-अलग राय
AI के भविष्य को लेकर दोनों नेताओं के रुख में साफ अंतर दिखाई दिया. राष्ट्रपति ट्रंप AI को 'सुपर इंटेलिजेंस' या 'SI' कहने पर जोर देते हैं. उनका मानना है कि इस तकनीक पर कोई नया कंट्रोल नहीं लगाया जाना चाहिए. इसके उलट, जिनपिंग ने गुरुवार को कहा कि दुनिया के अग्रणी देश होने के नाते अमेरिका और चीन को इसके डेवलपमेंट को कंट्रोल करना चाहिए.
जिनपिंग का कहना था कि ये तय करना हमारी जिम्मेदारी है कि AI हमेशा इंसानों के कंट्रोल में रहे और मानवता की भलाई के लिए काम करे.
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बता दें कि ट्रंप ने जिनपिंग के साथ बैठक के बाद व्हाइट हाउस में चीनी राष्ट्रपति के लिए शानदार स्टेट डिनर का आयोजन किया था. इस डिनर में सुंदर पिचई, सैम ऑल्टमैन और जेनसेन ह्वांग जैसे टेक जगत के दिग्गज भी शामिल हुए.
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