सऊदी अरब में पाकिस्तान की सेना की मौजूदगी को लेकर अब खुद पाकिस्तान की तरफ से पुष्टि हो गई है. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक अमेरिकी मीडिया से बातचीत में कहा है कि पाकिस्तानी सैनिक सऊदी अरब में पहले से मौजूद हैं और अलग-अलग क्षमताओं और क्षेत्रों में ड्यूटी कर रहे हैं.
अहमद शरीफ चौधरी ने कहा, "मैं पुष्टि कर सकता हूं कि पाकिस्तान की सेनाएं पहले से ही सऊदी अरब में मौजूद हैं." जब उनसे पूछा गया कि क्या मक्का डिफेंस अलायंस के तहत पाकिस्तानी सैन्यकर्मी सऊदी अरब में तैनात हैं, तो उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सैनिक दशकों से सऊदी अरब में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर रहे हैं.
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मक्का डिफेंस एग्रीमेंट के बाद बढ़ी चर्चा
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने 7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट साइन किया था. इस समझौते के तहत तीनों देश एक सदस्य पर सशस्त्र हमले को सभी पर हमला मानने पर सहमत हुए हैं.
हाल के हफ्तों में यमन के हूती विद्रोही सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहे हैं. इन हमलों में नागरिक और आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश हो रही है. इसी के बाद 5 अक्टूबर को रियाद में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें सऊदी अरब की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ किसी भी हमले या धमकी को साफ तौर पर खारिज किया गया.
अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान की सऊदी अरब के साथ सैन्य और राजनीतिक साझेदारी नई नहीं है. उनके मुताबिक, तीनों देशों के बीच लंबे समय से राजनयिक, राजनीतिक, सैन्य और लोगों के स्तर पर रिश्ते हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना अलग-अलग क्षमताओं में सऊदी अरब में पहले से काम कर रही है.
सऊदी अरब को सैन्य मदद देता रहा है पाकिस्तान
पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी अरब को सैन्य ट्रेनिंग और सलाह से जुड़ी मदद देता रहा है. वहीं, सऊदी अरब ने आर्थिक संकट के दौर में पाकिस्तान की कई बार आर्थिक मदद भी की है.
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रॉयटर्स की मई में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल हुए एक अलग द्विपक्षीय रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान ने सऊदी अरब में 8,000 सैनिक, लड़ाकू विमानों की एक स्क्वाड्रन और एयर डिफेंस सिस्टम भी तैनात किया था.
अब मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट के बाद इस सैन्य सहयोग पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है. वहीं, रॉयटर्स के मुताबिक तुर्की भी हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब को मुख्य तौर पर रक्षात्मक और तकनीकी मदद दे रहा है.
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