आबह सऊदी अरब (Abha, Saudi Arabia) के असीर प्रांत की राजधानी है. यह शहर दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब में असीर पर्वतों के बीच स्थित है. समुद्र तल से करीब 2,270 मीटर की ऊंचाई पर बसे आबह का क्षेत्र असीर नेशनल पार्क के आसपास फैला हुआ है. ऊंचाई के कारण यहां का मौसम सऊदी अरब के कई अन्य हिस्सों की तुलना में अपेक्षाकृत हल्का रहता है. इसी वजह से यह शहर सऊदी नागरिकों के बीच एक पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है.
आबह को असीर क्षेत्र के प्रशासनिक और प्रमुख शहरी केंद्र के रूप में देखा जाता है. शहर का इतिहास असीर क्षेत्र के राजनीतिक और सामाजिक बदलावों से जुड़ा रहा है. उस्मानी साम्राज्य के दौर में आबह असीर के शासक इब्न अयद के अधीन राजधानी के रूप में रहा. प्रथम विश्व युद्ध के समय क्षेत्र में राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं. 1918 में असीर के शासक याह्या बिन हसन अल अयद ने आबह में अपने परिवार के शासन को फिर स्थापित किया और क्षेत्र को स्वतंत्र रूप से संचालित किया.
1920 के आसपास असीर क्षेत्र पर नज्द के इखवान कबीलों का नियंत्रण स्थापित हुआ, जो इब्न सऊद के नेतृत्व में सऊदी अरब के एकीकरण की प्रक्रिया का हिस्सा था. इसके बाद आबह भी आधुनिक सऊदी राज्य के राजनीतिक ढांचे में शामिल हो गया.
आबह में असीर क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कई पुराने स्थल मौजूद हैं. शहर की पहचान पहाड़ी किलों और ऊंचाई वाले दुर्गों से भी जुड़ी है. शहर को कई हिस्सों में बांटा गया है और इसके एक प्रमुख हिस्से में ऐतिहासिक किला स्थित है. 1927 में बनाया गया शद्दा महल अब एक संग्रहालय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जहां स्थानीय हस्तशिल्प और घरेलू वस्तुओं को प्रदर्शित किया जाता है.
आबह में अबहा ग्रेट मस्जिद, आबह पैलेस होटल और साद झील के आसपास के क्षेत्र प्रमुख स्थानों में शामिल हैं. झील के पास नया आबह होटल भी स्थित है. शहर में मनोरंजन और पर्यटन से जुड़ी सुविधाएं भी विकसित हुई हैं.
आबह असीर क्षेत्र की कृषि, प्रशासन, पर्यटन और स्थानीय व्यापार गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र है. यहां से जुड़े कई कस्बे और क्षेत्र आसपास के पहाड़ी भूभाग में फैले हुए हैं. शहर में सऊदी अरब के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र अल वतन का मुख्य कार्यालय और प्रमुख मुद्रण केंद्र भी स्थित है. अगस्त 2015 में आबह की एक मस्जिद पर हुए आतंकी हमले में 15 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें अधिकतर पुलिसकर्मी थे.
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि पाकिस्तानी सैनिक सऊदी अरब में पहले से मौजूद हैं और अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर रहे हैं. यह बयान मक्का संयुक्त रक्षा समझौते, रियाद बैठक और हूती हमलों के बीच आया है, जिससे दोनों देशों के सैन्य सहयोग पर फिर चर्चा तेज हो गई है.