यमन में हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब की जंग के बीच पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नए सवाल उठ रहे हैं. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि पाकिस्तान और तुर्की सऊदी अरब की मदद कर रहे हैं. हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि पाकिस्तान की तरफ से आखिर किस तरह की सैन्य मदद दी जा रही है.
जियो न्यूज को दिए इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि सऊदी अरब को जिस भी मदद की जरूरत होगी, पाकिस्तान और तुर्की उसे उपलब्ध करा रहे हैं. साथ ही उन्होंने साफ किया कि हूतियों के खिलाफ सीधे कॉम्बैट ऑपरेशन सऊदी अरब की सेना ही कर रही है. उनके मुताबिक, पाकिस्तान और तुर्की की सेनाएं संघर्ष में सपोर्ट का रोल निभा रही हैं.
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रियाद में मौजूद हैं पाकिस्तान-तुर्की के सैनिक
ख्वाजा आसिफ के मुताबिक पाकिस्तान और तुर्की दोनों की सैन्य मौजूदगी रियाद में है. दोनों देशों का काम सीधे यमन में जमीनी हमला करना नहीं, बल्कि सऊदी अरब की सुरक्षा में मदद करना बताया जा रहा है.
दिए गए विवरण के मुताबिक, पाकिस्तान और तुर्की मुख्य तौर पर सऊदी अरब के इंफ्रास्ट्रक्चर और पवित्र स्थलों के लिए एक तरह की डिफेंसिव शील्ड तैयार कर रहे हैं. खास तौर पर हूतियों की मिसाइल और ड्रोन से सुरक्षा मजबूत करने पर जोर है.
क्या पाकिस्तान हथियार भी दे रहा है?
पाकिस्तान की सैन्य मदद के तौर-तरीकों को लेकर पूरी तस्वीर अभी साफ नहीं है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने सऊदी अरब में एयरक्राफ्ट और दूसरी अहम जगहों की सुरक्षा के लिए एंटी-एयरक्राफ्ट गन, आर्टिलरी सिस्टम और अटैक ड्रोन तैनात किए हैं या उन्हें भेजा जा रहा है. हालांकि, ख्वाजा आसिफ ने अपने इंटरव्यू में इस बारे में कोई साफ जानकारी नहीं दी.
दोनों देशों की मदद सिर्फ हथियारों तक सीमित नहीं बताई जा रही. गठबंधन की तरफ से रडार नेटवर्क, अर्ली वॉर्निंग सिस्टम, बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्शन और एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी को जोड़ने पर भी काम किया जा रहा है. लाल सागर के किनारे समुद्री सुरक्षा मजबूत करने की कोशिश भी चल रही है.
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तुर्की की क्या भूमिका है?
तुर्की अपनी नाटो क्षमता और डिफेंस सिस्टम के अनुभव के जरिए सऊदी अरब की मदद कर रहा है. इसमें एयर डिफेंस को बेहतर तरीके से चलाने, ड्रोन वॉरफेयर और सैन्य ऑपरेशन से जुड़ी जानकारी साझा करना शामिल है.
इस पूरे घटनाक्रम से इतना साफ है कि सऊदी अरब हूतियों के खिलाफ जंग में सीधे लड़ रहा है, जबकि पाकिस्तान और तुर्की फिलहाल उसके साथ सपोर्ट और डिफेंस के मोर्चे पर खड़े हैं. लेकिन पाकिस्तान वास्तव में कौन से हथियार और कितनी सैन्य क्षमता सऊदी को दे रहा है, इस पर अभी आधिकारिक तौर पर पूरी जानकारी सामने नहीं आई है.
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