विदेशी मदद पर नेपाल का यू-टर्न! अब भारत-चीन से मांगी हेल्प, दिल्ली ने तुरंत दिखाया बड़ा दिल

नेपाल ने लापता नागरिकों को लेकर अंतर्राष्ट्रीय दबाव के बाद विदेशी बचाव सहायता न लेने के अपने फैसले को बदला है. बचाव कार्य, DNA टेस्टिंग और फॉरेंसिक जांच के लिए नेपाल अब अंतर्राष्ट्रीय मदद लेगा.

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पंकज दास / आशुतोष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 29 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:26 AM IST

नेपाल में आई भीषण बाढ़ में प्रभावित इलाकों में अंतर्राष्ट्रीय खोज और बचाव टीमों की मदद न लेने के अपने फैसले को नेपाल सरकार ने बदला है. यह फैसला उन देशों के राजनयिक दबाव के बाद लिया गया जिनके नागरिक इस आपदा में लापता है. 

भारत की टेक्निकल टीम मदद के लिए काठमांडू पहुंच गई हैं. भारतीय वायु सेना भी नेपाल में राहत-बचाव अभियान में जुटी है. भारत ने दवाइयों और खाने-पीने की चीजें समेत 10 टन जरूरी राहत सामग्री नेपाल भेजी है. प्रभावित लोगों की मदद के लिए भारतीय वायु सेना का सी-130 विमान 10 टन जरूरी राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचा है.

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नेपाल सरकार ने बुधवार 26 जून को कहा था कि उसके बचाव कर्मी खोज अभियान संभालने में सक्षम हैं और विदेशी बचाव टीमों को अनुमति नहीं दी जाएगी. हालांकि अब नेपाल सरकार ने अपना रुख बदलते हुए DNA टेस्ट, फॉरेंसिक जांच और बचाव कार्य जैसे क्षेत्रों में सीमित अंतर्राष्ट्रीय मदद लेने का फैसला लिया है. 

यह भी पढ़ें: नेपाल बाढ़: स्कूल तबाह, टूटी उम्मीद... फिर एक फोन ने 8 साल के लापता बेटे को मां से मिलाया

'द काठमांडू पोस्ट' के मुताबिक एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से सरकार पर विदेशी सर्च एंड रेस्क्यू टीमों और विशेषज्ञों की मदद लेने का काफी दबाव था. बाढ़ में कई विदेशी नागरिक लापता हुए हैं. हम कुछ खास क्षेत्रों में सीमित संख्या में एक्सपर्ट्स को आने की इजाज़त दे रहे हैं."

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बता दें, चीन-नेपाल सीमा के पास अचानक आई बाढ़ में 77 ईशा तीर्थयात्रियों के अब भी लापता होने की खबर है. विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने रॉयटर्स से कहा, "नेपाल को उन तकनीकी क्षेत्रों में विदेशी मदद की जरूरत है, जहां उसके पास एक्सपर्टाइज की कमी है. लेकिन सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए विदेशी मदद की जरूरत नहीं है." 

नेपाल में आई भीषण बाढ़ में तबाही का आंकड़ा 600 के पार पहुंच गया है. अब तक 626 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग लापता हैं. इस आपदा में बड़ी संख्या में भारतीय भी फंसे हुए हैं. करीब 320 भारतीयों समेत भारतीय मूल के 100 लोगों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है. राहत की बात है कि तिब्बत में मौजूद करीब 400 भारतीयों से संपर्क हो चुका है और वे सुरक्षित हैं.

रसुवा की भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के कारण लापता हुए लोगों में से नवलपरासी जिले में शुक्रवार शाम तक 158 शव बरामद किए गए. आज ही, 48 शव और बरामद किए गए हैं.

पुलिस के मुताबिक, नवलपरासी पूर्व से होकर बहने वाली नारायणी नदी के अलग-अलग जगहों पर शुक्रवार शाम तक 158 शव मिले. DSP ने बताया कि नारायणी नदी के किनारे मिले शवों को विभिन्न अस्पतालों और वन कार्यालय के भवनों में सुरक्षित रखा गया है. उन्होंने बताया कि 9 शव अभी नदी किनारे ही हैं और उन्हें सुरक्षित स्थान पर लाने की तैयारी की जा रही है.

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