नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, इस आपदा के बीच अपनी मां से बिछड़े 8 वर्षीय जोयल घाले आखिरकार अपनी मां से सुरक्षित शुक्रवार को मिल गए. बेटे के लापता होने के बाद मां को डर था कि वह और उसका भाई स्कूल में बाढ़ की चपेट में आ गए होंगे.
आठ वर्षीय जोयल घाले नेपाल में आई बाढ़ से बचने के लिए जंगल में भाग गया था और पेड़ पर चढ़कर अनपी जान बचाई थी. शुक्रवार को जोयल को बाढ़ प्रभावित जिले रसुवा से एयरलिफ्ट कर सुरक्षित बाहर निकाला गया था. उसके पैर में चोट आई है और चेहरे पर कट के निशान हैं. जोयल की मां मट्टी माया तमांग अपने बच्चों की तलाश में तमाम राहत शिविरों का चक्कर लगा रही थी.
बुधवार 26 अगस्त की सुबह जोयल और उसका भाई स्कूल की गाड़ी से स्कूल गए थे. उस वक्त उनकी मां घर पर बुनाई कर रही थी. तभी अचानक उन्हें भूकंप जैसी आवाज सुनाई दी. इसके बाद इलाके में पानी और मलबे का सैलाब आ गया. बताया गया कि लांगटांग लिरुंग पर्वत के पास ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया था. इसके कारण बर्फ, चट्टानों और मलबे का तेज बहाव घाटी में आ गया और भीषण तबाही मची.
अपने बेटों की तलाश में मट्टी माया उनके स्कूल पहुंचीं तो यहां का मंजर देखकर वह दंग रह गई. स्कूल की इमारत पूरी तरह से तबाह हो चुकी थी और इलाका पहचान में भी नहीं आ रहा था. स्कूल उनके घर से महज 15-20 मिनट की ड्राइव की दूरी पर था. उन्होंने कई दिनों तक अपने बच्चों की तलाश की लेकिन उनके न मिलने के कारण उनकी उम्मीदें टूटने लगी थी.
इसी दौरान रॉयटर्स के एक पत्रकार से उनकी बात हुई. इसी पत्रकार ने उनके बेटे घाले से भी बात की थी. यह जानकारी मिलते ही मट्टी माया के मन में उम्मीद की एक किरण जगी. शुक्रवार को उन्होंने फोन पर अपने बेटे से बात की और फिर उसे लेने काठमांडू के अस्पताल पहुंच गई. मट्टी माया ने बताया कि घाले के पिता भी परिवार से मिलने के लिए आ रहे हैं.
घाले का परिवार उन खुशकिस्मत लोगों में से एक है जो इस भीषण आपदा में बच गए. हालांकि नेपाल और तिब्बत की बाढ़ में अब तक 580 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. जबकि 2500 लोग लापता बताए जा रहे हैं.
इस भीषण बाढ़ ने रसुवा जिले की जिंदगी बदल दी. लेकिन घाले और उनके परिवार के लिए कम से कम अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होने की ओर बढ़ रहे हैं.
aajtak.in