Ground Report: बाढ़ की तबाही के बाद अब नेपाल में महामारी का खतरा, मलबे और दलदल में दबे शवों से फैली बदबू

नेपाल में राहत-बचाव अभियान के बीच निचले इलाकों में मलबे और दलदल में फंसे शवों से महामारी का खतरा बढ़ रहा है. प्रशासन जिंदा लोगों के साथ लापता लोगों की तलाश में जुटा है. वहीं, भोटेकोशी नदी के तेज बहाव ने बड़े पेड़, लोहे के पुल और रास्ते में आए कई ढांचों को बहा दिया.

Advertisement
नेपाल में राहत-बचाव के बीच बढ़ा महामारी का खतरा, मलबे और दलदल में फंसे शव.(Photo- ITG) नेपाल में राहत-बचाव के बीच बढ़ा महामारी का खतरा, मलबे और दलदल में फंसे शव.(Photo- ITG)

आशुतोष मिश्रा

  • काठमांडू,
  • 31 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:31 AM IST

नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है. अब तक मरने वालों की संख्या 939 से ज्यादा पहुंच चुकी है, जबकि 4,000 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. इसके साथ ही 11,379 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है, जबकि राहत और बचाव अभियान के लिए 21,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है. इसमें 187 भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित निकाला जा चुका है. सेना और प्रशासन की टीमें प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के साथ-साथ मलबे और दलदल में दबे शवों की तलाश में जुटी हैं. पानी कम होने के बाद अब प्रभावित इलाकों में एक नई चुनौती सामने आ गई है. कई जगहों पर शवों के फंसे होने से तेज बदबू फैल रही है और महामारी का खतरा बढ़ता जा रहा है.

Advertisement

देवीघाट इलाके में त्रासदी के छह दिन बाद अब बदबू फैलने लगी है. पहाड़ी इलाकों में आपदा के दौरान मारे गए लोगों के शव पानी के साथ बहकर निचले इलाकों तक पहुंचे हैं. गर्मी और ज्यादा तापमान के बीच मलबे और दलदल में फंसे शव धीरे-धीरे सड़ रहे हैं, जिससे बदबू बढ़ रही है. ऐसे में प्रभावित इलाकों में सैनिटेशन और महामारी से बचाव की चुनौती भी बढ़ गई है.

प्रशासन के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता जिंदा लोगों को सुरक्षित निकालना है. इसके साथ ही उन लोगों की तलाश भी की जा रही है, जो अब तक लापता हैं. मलबे और दलदल में दबे शवों को निकालने की कोशिश हो रही है, ताकि उनकी पहचान की जा सके और परिवारों को उनके बारे में जानकारी मिल सके.

सेना कर रही शवों की तलाश

Advertisement

नेपाल की सेना उन इलाकों में ऑपरेशन चला रही है, जहां से शवों के होने की जानकारी मिल रही है. देवीघाट में भी एक घर से तेज बदबू आने के बाद अंदर दबे शव को निकालने की कोशिश की जा रही है. अभी यह साफ नहीं है कि वहां मिला शव घर के मालिक का है या पहाड़ों से बहकर आया कोई व्यक्ति वहां मलबे में दब गया.

प्रभावित इलाकों में सड़कों को खोलने का काम भी काफी हद तक किया जा चुका है. इससे लोग अपने घरों तक पहुंच पा रहे हैं और राहत-बचाव के लिए सेना और पुलिस की टीमें भी प्रभावित इलाकों तक पहुंच रही हैं. हालांकि, घरों के मलबे को हटाना और इलाकों में कनेक्टिविटी बहाल करना अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है.

तिनके की तरह बह गए पुल

फ्लैश फ्लड की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई बड़े पेड़, लोहे के पुल और दूसरे ढांचे पानी के तेज बहाव की चपेट में आकर बह गए. देवीघाट में एक बेली ब्रिज भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर पड़ा है. कई जगहों पर घर और दुकानें भी तबाह हो गई हैं. अब पानी घटने के बाद लोग अपने घरों से बचा हुआ सामान निकालने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन मलबे, कीचड़ और दलदल के बीच राहत-बचाव का काम आसान नहीं है. ऊपर से सड़ते शवों और दबे हुए जानवरों से फैल रही बदबू ने स्थिति को और मुश्किल बना दिया है.

Advertisement

प्रभावित इलाकों में सफाईकर्मी मास्क लगाकर काम कर रहे हैं. मलबे में दबे शवों और जानवरों को समय रहते नहीं निकाला गया तो बदबू और संक्रमण का खतरा और बढ़ सकता है. ऐसे में प्रशासन के सामने एक तरफ लापता लोगों और शवों की तलाश पूरी करने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ प्रभावित इलाकों में सफाई और महामारी से बचाव की तैयारी करना भी जरूरी हो गया है.  प्रशासन कोशिश कर रहा है कि एक तरफ जिंदा लोगों को निकाला जाए, लेकिन उसके साथ-साथ जो लोग कीचड़ और दलदल में फंसे हो सकते हैं और लापता हैं, उन्हें भी निकाल लिया जाए.

---- समाप्त ----

TOPICS:
Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »