डोनाल्ड ट्रंप भले जल्द युद्ध खत्म होने का दावा करते हों, लेकिन ईरान के इरादे कुछ और ही हैं. उसकी ताजा प्लानिंग कुछ ऐसी है कि अमेरिका, इजरायल और 'दुश्मन' देशों के जहाज कभी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ना गुजर पाएं. साथ ही नियम तोड़ने वाले जहाजों पर तगड़ा फाइन भी लगेगा.
दरअसल, ईरान की एक संसदीय समिति एक शुरुआती बिल की समीक्षा कर रही है. इसके तहत अमेरिका, इजरायल और अन्य 'दुश्मन' देशों के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरने से रोका जाएगा. इसकी जानकारी खुद एक ईरानी सांसद ने ईरान की समाचार एजेंसी 'फार्स' को दी है.
इस प्रस्तावित बिल के तहत, प्रस्तावित पाबंदियों का उल्लंघन करने पर जहाज पर लदे सामान (कार्गो) की कीमत का 20% तक जुर्माना लगाया जा सकता है.
सांसद ने बताया कि इस कानून की अभी विशेषज्ञ समीक्षा कर रहे हैं. साथ ही संसद ने विशेषज्ञों को आमंत्रित किया है ताकि वे ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिए जाने से पहले अपनी सिफोरिशें दे सकें.
बता दें कि ईरान युद्ध को 160 दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है. कुल मिलाकर ट्रंप शुरू से जिस जंग को कुछ हफ्तों में खत्म करने की बात करते थे, उसमें अब करीब छह महीनों से फंसे हैं. इतना ही नहीं, अमेरिका से ऐसी भी खबरें आई हैं कि उसके पास हथियारों की कमी होती जा रही है. बीते कुछ वक्त से उसने ईरान पर कोई बड़ा हमला भी नहीं किया है, जिससे इस खबर को और हवा मिला है.
ताजा हालात की बात करें तो स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर कंट्रोल को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत के बाद अंतरिम डील हो रही है. इससे दोनों को होर्मुज पर ऐसा कंट्रोल मिल जाएगा जो जंग से पहले उसके पास कभी नहीं था. वहीं ट्रंप इस बात पर अड़े हैं कि होर्मुज सबके लिए खुला रहे. मतलब वहां से गुजरने वाले जहाजों पर पहले की तरह कोई रोक-टोक ना हो, न ही उनसे किसी तरह का टोल या फीस ली जाए, जिसकी तैयारी ईरान-ओमान कर रहे हैं.
जंग पर बात करते हुए ट्रंप ने गुरुवार को भी कहा कि ईरान के साथ चल रहा टकराव जल्द ही खत्म हो सकता है. साथ ही, उन्होंने यह भी माना कि महीनों की लड़ाई के बाद अमेरिकी सेना को कुछ हथियारों और गोला-बारूद की सप्लाई में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने युद्ध के भविष्य को लेकर उम्मीद जताई और कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह टकराव और ज्यादा समय तक खिंचेगा.
उनकी यह टिप्पणी उस घोषणा के कुछ दिनों बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान और मिडिल ईस्ट के कई देशों की गुजारिश पर अमेरिका ने अपनी प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को रोक दिया है. उन्होंने कहा कि ऐसा एक व्यापक समझौते की गुंजाइश बनाने के मकसद से किया गया था.
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