ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि उस पर कोई नया हमला हुआ तो जवाब पहले से ज्यादा कड़ा होगा. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को तेहरान में विदेशी राजनयिकों से बातचीत के दौरान यह बात कही. उन्होंने अमेरिका से सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने को कहा. अराघची ने यह भी दावा किया कि 'अमेरिका जंग और कूटनीति, दोनों में हार चुका है'.
अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान की जंग आठवें महीने में चल रही है. ऐसे में अराघची ने कहा कि उनका देश अब पहले से ज्यादा तैयार है और किसी भी नए हमले का जवाब देने के लिए जरूरी कदम उठाएगा. हालांकि, उन्होंने बातचीत की संभावना भी खुली रखी. उनका कहना था कि ईरान जंग खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाने को तैयार है.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, तेहरान में राजनयिकों को संबोधित करते हुए अराघची ने अमेरिका से समझदारी दिखाने की अपील की. उन्होंने कहा कि जंग का कोई सैन्य समाधान नहीं है. इसे खत्म करने के लिए बातचीत ही एकमात्र रास्ता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अराघची ने कहा कि ऐसा समझौता होना चाहिए, जो न्याय और निष्पक्षता पर आधारित हो और जिसके जरिए सम्मानजनक तरीके से जंग खत्म की जा सके.
प्रतिबंधों से हल नहीं निकलेगा: अराघची
ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिका की ओर से और प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना पर भी बात की. उन्होंने कहा कि ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने से अमेरिका को कोई फायदा नहीं होगा. उनके मुताबिक, सैन्य कार्रवाई और प्रतिबंधों से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा. अमेरिका को जंग खत्म करने के लिए बातचीत पर ध्यान देना चाहिए.
सात दिन में खुल सकता है होर्मुज स्ट्रेट
इस दौरान, अराघची ने बताया कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए अमेरिका के सामने एक प्रस्ताव रखा है. अगर अमेरिका इसे स्वीकार कर लेता है तो सात दिनों के भीतर समुद्री रास्ता खोला जा सकता है. हालांकि, ईरान ने इसके लिए कुछ शर्तें भी रखी हैं. यह प्रस्ताव उन प्रतिबद्धताओं से जुड़ा है जिन्हें अमेरिका को पूरा करना होगा.
अराघची ने अमेरिका को लेकर अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि वह जंग और कूटनीति, दोनों में हार चुका है. उन्होंने वॉशिंगटन से सैन्य विकल्पों के बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकालने को कहा. ईरान के विदेश मंत्री ने एक तरफ कूटनीति के लिए अपने देश की तैयारी जाहिर की, तो दूसरी तरफ यह भी स्पष्ट किया कि किसी नए हमले की स्थिति में ईरान पहले से ज्यादा कड़ा जवाब देगा.
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