रूसी तेल-गैस खरीद पर भारत को टैरिफ से छूट क्यों? ट्रंप ने बताई ये वजह

डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ पर अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह बहुत अच्छा निर्ण. है. यह अमेरिका के लिए अच्छा होगा. दुनिया के लिए भी यह अच्छा ही साबित होगा.

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डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ पर अपने फैसले का बचाव किया. (Photo: White House) डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ पर अपने फैसले का बचाव किया. (Photo: White House)

aajtak.in

  • वॉशिंगटन,
  • 18 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:34 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अक्सर अपने फैसले से दुनिया को चौंकाते रहे हैं. इस बार उन्होंने रूसी तेल-गैस खरीद पर ऐसा ऐलान किया, जिससे उनके समर्थक भी हैरान रह गए. ट्रंप ने कहा कि बदलते वैश्विक हालात के बीच रूस से तेल और गैस खरीदने वाले टॉप-5 मुल्कों पर 100 फीसदी टैरिफ संबंधित कानून को प्रभाव में नहीं लाया जाएगा.

ट्रंप की इस घोषणा का साफ मतलब है कि भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान... ऐसे पांच देश जो रूस से तेल-गैस सबसे अधिक खरीदते हैं, उन पर कोई टैरिफ नहीं लगाया जाएगा. ट्रंप के इस फैसले का अमेरिका में ही कई सांसदों ने तीखा विरोध किया. 

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अब ट्रंप ने इस पर चुप्पी तोड़ी है. तीखी आलोचनाओं के बीच अपने फैसले का बचाव करते हुए उन्होंने इसे अच्छा निर्णय बताया. अमेरिकी प्रेसिडेंट ने कहा कि कई लोगों को अभी तक यह समझ नहीं आया है कि उनके फैसले का वास्तव में क्या अर्थ है.

शनिवार शाम मियामी स्थित मार-ए-लागो रिसॉर्ट में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, 'आपमें से बहुत से लोगों को अभी तक यह नहीं पता कि मेरा फैसला क्या है? लेकिन हम इसे समझ लेंगे और आप भी इसे समझ जाएंगे.'

''दुनिया के लिए अच्छा साबित होगा'
ट्रंप ने कहा, 'यह बहुत अच्छा फैसला है. यह अमेरिका के लिए अच्छा होगा. मुझे लगता है कि दुनिया के लिए भी अच्छा साबित होगा, क्योंकि हम वास्तव में वैश्विक मंच पर हैं.'

बता दें कि शुक्रवार को ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तखत किए थे. इसके तहत रूस को नए प्रतिबंध कानून ‘ग्राहम एक्ट’ (Graham Act) से छूट दी गई.

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अमेरिकी कांग्रेस ने पिछले महीने इस कानून को पारित किया था. इस आदेश के तहत रूस के तेल और गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों पर लगाए जाने वाले 100 प्रतिशत टैरिफ से भी छूट दी गई. इन देशों में चीन और भारत शामिल हैं.

आदेश में कहा गया है कि यह छूट तब तक लागू रहेगी, जब तक राष्ट्रपति या विदेश मंत्री, वित्त मंत्री और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि से उचित परामर्श के बाद यह तय नहीं कर लेते कि आगे कार्रवाई करना आवश्यक है.

ट्रंप के फैसले पर उठे सवाल
ट्रंप के इस फैसले की रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक- दोनों दलों के नेताओं ने आलोचना की. पिछले महीने ही दोनों दलों के सांसदों ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ को बहुमत से पारित किया था.

दक्षिण कैरोलिना की रिपब्लिकन सीनेटर डार्लिन ग्राहम ने ट्रंप के फैसले पर सवाल उठाए. यह कानून उनके दिवंगत भाई लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया था, जिन्होंने इसकी पैरवी की थी.

डार्लिन ने कहा, 'व्यक्तिगत रूप से मैं रूस पर दबाव बनाने का ऑप्शन चुनती, ताकि युद्ध समाप्त हो. साथ ही गैस की कीमतें कम हों. मुझे रूसी राष्ट्रपति पुतिन पर भरोसा नहीं है और न ही रूस पर.'

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दिवंगत भाई की मृत्यु के बाद खाली हुई सीनेट सीट के लिए डार्लिन ग्राहम का समर्थन किया था.

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रिपब्लिकन सीनेटर ने भी की आलोचना
उत्तरी कैरोलिना के रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने सोशल मीडिया पर इस फैसले को बेहद गैर-जिम्मेदाराना बताया. टिलिस ने कहा कि सीनेट में 86-11 के भारी बहुमत से पारित कानून को लागू करने की बात राष्ट्रपति और उनके सलाहकारों को समझ में क्यों नहीं आ रही है?

उन्होंने कहा, 'यह अक्षम्य है. ट्रंप प्रशासन उस रूसी तानाशाह (पुतिन) के सामने झुक रहा है, जिसने यूक्रेन पर हमला किया. यदि ट्रंप वास्तव में ऊर्जा की कीमतें कम करना चाहते हैं, तो उन्हें ईरान युद्ध का हल निकालना चाहिए, जिसे ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है.

टेक्सास के रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कॉर्निन ने कहा, 'लिंडसे यह देखकर स्तब्ध रह जाते. उन्होंने दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम का जिक्र करते हुए यह टिप्पणी की, जिन्होंने अपनी मृत्यु से पहले इस विधेयक पर लगातार काम किया था.

मैसाचुसेट्स की डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने कहा कि ट्रंप कांग्रेस की अवहेलना कर रहे हैं. वे पुतिन को अपना आक्रामक युद्ध जारी रखने में मदद कर रहे हैं. वॉरेन ने अपने साथी सांसदों से इस फैसले को पलटने के लिए कदम उठाने की अपील भी की.

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