उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) चुनावों के परिणामों को लेकर सूबे का सियासी पारा चढ़ गया है. समाजवादी पार्टी को इन चुनावों में बढ़त मिली है जिसपर पार्टी काफी उत्साहित है. इसे लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने सपा पर पलटवार किया है.
ओम प्रकाश राजभर ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, 'एमएलसी का चुनाव हुआ है. इसमें कुल मतदाता 14 लाख के आसपास थे और हमें अंदाजा है कि करीब 60 प्रतिशत यानी 6 लाख के आसपास ही वोटिंग हुई है. इसी को आधार बनाकर समाजवादी पार्टी के लोग कह रहे हैं कि वो अब सरकार बना लेंगे.
राजभर ने सपा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें थोड़ा सोचना चाहिए. जिस गांव में 2,000 से 5,000 मतदाता हैं, वहां से बमुश्किल 20, 25 या 50 लोग ही वोट डालने गए होंगे. ये चुनाव आम जनता का नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे लोगों का चुनाव था. इसे आधार मानकर अगर सपा उत्साहित है, तो वो बहुत बड़ी गलतफहमी में है.
'जिनके खातों में सीधे पेंशन पहुंच रही है, वो सरकार के साथ हैं'
राजभर का कहना है कि एमएलसी चुनाव और विधानसभा चुनावों में जमीन-आसमान का फर्क होता है. उनके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकास कार्यों से गरीब और कमजोर वर्ग पूरी तरह खुश है. जिन लोगों को मुफ्त राशन मिल रहा है, जिनकी आय बढ़ी है, जिन्हें किसान सम्मान निधि मिल रही है और जिनके खातों में सीधे पेंशन पहुंच रही है, वो सरकार के साथ हैं.
उन्होंने बताया कि इसके अलावा राज्य में कानून-व्यवस्था बेहतर है, दंगे और कर्फ्यू बंद हो चुके हैं. इन तमाम चीजों का प्रभाव इस विशेष चुनाव से अलग है, क्योंकि इसमें सिर्फ पढ़े-लिखे वर्ग ने मतदान किया है.
उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में 14 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं, जहां 60 प्रतिशत मतदान होने पर करीब 8 करोड़ वोट पड़ते हैं, जबकि इस एमएलसी चुनाव में मात्र 6 लाख के करीब वोट पड़े. दोनों की तुलना में जमीन-आसमान का अंतर है.
सपा पर PDA और जाति की राजनीति का आरोप
समाजवादी पार्टी और राहुल गांधी के रिश्तों पर तंज कसते हुए राजभर ने कहा, 'उत्तर प्रदेश में बेचारे अखिलेश को कांग्रेस ने सीटें नहीं दीं. राहुल भाषण देते हैं कि समाजवादी पार्टी को वोट दीजिए और अखिलेश भाषण देते हैं कि कांग्रेस बहुत चालू पार्टी है, इसे वोट मत देना.'
गोरखपुर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां सपा ने संजय त्रिपाठी को मैदान में उतारा, लेकिन राजीव यादव निर्दलीय के रूप में खड़े हो गए, जिससे सारा सपा का वोट उधर चला गया. इस चक्कर में संजय त्रिपाठी बलि का बकरा बन गए.
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राजभर ने इस दौरान ये सवाल भी उठाया कि अखिलेश यादव का 'पीडीए' फॉर्मूला कहां गया? कौन ब्राह्मण, पिछड़ा या दलित इनके साथ जाएगा? ये स्थिति ये साबित करती है कि न तो ये पीडीए के हितैषी हैं और न ही दलितों या ब्राह्मणों के. समाजवादी पार्टी के लोग सिर्फ अपनी ही कम्युनिटी (यादव) और उसमें भी खास लोगों का भला चाहते हैं, आम जनता या दूसरे वर्गों से इन्हें कोई सरोकार नहीं है.
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