सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट में आवासीय प्लॉटों पर अवैध तरीके से किए गए व्यावसायिक निर्माण के मामले में सुनवाई की. शीर्ष अदालत ने अवैध निर्माण पर सख्त रुख अपनाते हुए सेंट्रल मार्केट के दुकानदारों को किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने ज़ोन ए में चिन्हित किए गए 16,726 अवैध निर्माणों को सील करने और पहले से चिन्हित संपत्तियों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया है. इसके अलावा कोर्ट ने ज़ोन बी, सी और डी में भी अवैध निर्माणों को चिन्हित कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं.
अवैध निर्माण ढहाने और सील करने के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अवैध निर्माण अवैध ही रहता है और उस पर कार्रवाई आवश्यक है. सुनवाई के दौरान बताया गया कि पहले चिन्हित की गई 44 संपत्तियों में से 20 को ढहा दिया गया है. कोर्ट ने बाकी बची अवैध संपत्तियों को जल्द से जल्द ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं. इसके साथ ही करीब 800 से ज्यादा संपत्तियों को सेटबैक छोड़ने के लिए कहा गया था.
यह भी पढ़ें: मेरठ बंद: सेंट्रल मार्केट में सीलिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे व्यापारी, जरूरी सेवाओं को छोड़ थम गया शहर
ज़ोन A के सर्वे में खुली पोल
स्टेट रिपोर्ट के अनुसार मेरठ को चार ज़ोन (ए, बी, सी, डी) में बांटा गया है. ज़ोन ए के सर्वे में 16 टीमें लगाई गई थीं, जिसमें 16,726 अवैध निर्माण चिन्हित किए गए. इनमें 12,960 रिहायशी इमारतें हैं और बाकी व्यावसायिक व अन्य भवन हैं. शीर्ष अदालत ने ज़ोन ए की इन सभी 16,726 अवैध संपत्तियों को सील करने का स्पष्ट आदेश दिया है.
अगली सुनवाई 9 दिसंबर को, मांगी पूरी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के बाहरी क्षेत्र स्थित उदयपुर में बनी बड़े पैमाने की अवैध कॉलोनियों पर भी हैरानी जताते हुए कार्रवाई के आदेश दिए हैं. ज़ोन बी, सी और डी के अवैध निर्माणों की रिपोर्ट अभी जमा नहीं की गई है. कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 9 दिसंबर तय करते हुए तब तक सभी ज़ोन का पूरा ब्योरा देने के निर्देश दिए हैं.
उस्मान चौधरी