सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मेरठ के शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आवासीय प्लॉटों पर संचालित 44 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील करने का निर्देश दिया. इन इमारतों में 6 स्कूल, 6 निजी अस्पताल, 4 बैंकट हॉल और 28 व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स शामिल हैं, जिन्हें नियमों के खिलाफ आवासीय क्षेत्र में बनाया गया था.
आवास विकास परिषद की टीम ने कोर्ट के आदेश के बाद व्यापारियों को तत्काल भवन खाली करने की चेतावनी दी है. इस मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होनी है, जिससे पहले प्रशासन और पुलिस सीलिंग की कार्रवाई को अंजाम देने की तैयारी में जुट गए हैं.
मरीजों और छात्रों को शिफ्ट करने का निर्देश
अदालत ने मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिया है कि जो छात्र इन स्कूलों में पढ़ रहे हैं, उनका दाखिला दूसरी जगह कराया जाए. साथ ही, अस्पतालों में भर्ती मरीजों को भी दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करने के लिए कहा गया है. कोर्ट की इस सख्ती के बाद व्यापारियों ने दुकानों से अपना सामान हटाना शुरू कर दिया है. हालांकि, व्यापारियों का आरोप है कि लैंड यूज चेंज करने के लिए पैसा जमा करने के बावजूद उन्हें कोई राहत नहीं मिली है.
व्यापारियों का प्रदर्शन और 'जीवन-मरण' का संकट
शास्त्री नगर में इस कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों, डॉक्टरों और स्कूल प्रबंधन ने संयुक्त बैठक की है. व्यापारियों ने छाती पीट-पीटकर प्रदर्शन किया और इसे अपने लिए जीवन-मरण का संकट बताया. उनका कहना है कि वे सरकार को टैक्स और जीएसटी देते हैं, फिर भी उनके व्यवसाय को उजाड़ा जा रहा है. प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान भी व्यापारियों का समर्थन करने पहुंचे. बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है.
1400 से ज्यादा दुकानें रडार पर
सेंट्रल मार्केट का यह विवाद लंबे समय से कोर्ट में है. इससे पहले एक परिसर की 23 दुकानों को ध्वस्त किया जा चुका है. आवास विकास ने सेक्टर 1 से 13 तक ऐसी 1400 से ज्यादा दुकानों को चिन्हित किया है जो आवासीय प्लॉटों पर बनी हैं. फिलहाल उन 44 आवासीय भवनों पर गाज गिरी है जो पूरी तरह से कमर्शियल कामों में इस्तेमाल हो रहे थे. प्रशासन अब 9 अप्रैल की सुनवाई से पहले सख्त कार्रवाई की तैयारी में है.
उस्मान चौधरी