उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव और नए राम मंदिर के सर्वेसर्वा चंपत राय सबके निशाने पर हैं. और निशाने पर होना लाजिमी भी है, क्योंकि अगर राम मंदिर को खड़ा कर बनवाने का श्रेय चंपत राय को मिला है, तो चढ़ावा चोरी में हुई गड़बड़ियों की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी.
यूं तो RSS और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े पूर्णकालिक प्रचारक चंपत राय बेहद सख्त और ईमानदार माने जाते रहे हैं, लेकिन जिद्दी और किसी की न सुनने वाले व्यक्ति की उनकी छवि ने उन्हें राम मंदिर से जुड़े एक अनकंप्रोमाइजिंग शख्स के तौर पर स्थापित कर दिया. राम मंदिर बनने से पहले तक चंपत राय मंदिर निर्माण के लिए समर्पित सबसे बड़े चेहरों में शामिल हो चुके थे.
जिन्होंने अपना पूरा जीवन मंदिर निर्माण के नाम कर दिया, उन्हें काम के प्रति समर्पित और अयोध्या का बड़ा जानकार भी माना गया. चूंकि कई दशकों से अयोध्या ही चंपत राय की कर्मभूमि रही है, ऐसे में अयोध्या के तमाम साधु-संतों, छावनियों, अखाड़ों और संत समाज से उनका अच्छा तालमेल बन गया था. लेकिन जब मंदिर निर्माण की बारी आई, तो चंपत राय ने अयोध्या के ज्यादातर साधु-संतों की बातों को नहीं माना. चाहे ट्रस्ट का गठन हो या मंदिर निर्माण, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई नेताओं और संतों को राम जन्मभूमि ट्रस्ट और मंदिर निर्माण प्रक्रिया से दूर रखा गया.
राम मंदिर ट्रस्ट के गठन के समय से ही ज्यादातर साधु-संत और मंदिर आंदोलन से जुड़े पुराने लोग इस बात से नाराज थे कि मंदिर आंदोलन में जिन लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिन्होंने लाठियां और गोलियां खाईं, जिन साधु-संतों, मठों और छावनियों ने राम मंदिर आंदोलन में अपनी भूमिका निभाई, उन्हें पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया.
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जब राम जन्मभूमि ट्रस्ट का गठन हुआ, तो उसके अध्यक्ष छोटी छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास जरूर बनाए गए, लेकिन उनकी भूमिका एक पदेन अध्यक्ष तक ही सीमित कर दी गई. सारी ताकत और अधिकार चंपत राय में निहित थे. अयोध्या के कई मठों के महंत राम जन्मभूमि ट्रस्ट बनने के बाद से ही चंपत राय से नाराज चल रहे थे, लेकिन चूंकि सरकार ने चंपत राय को काफी अधिकार दे रखे थे, इसलिए सभी चुप ही रहते थे.
कई मौके ऐसे आए जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी भी दिखाई दी. खासकर धर्मध्वजा आरोहण के वक्त चंपत राय के काम करने के तरीके को लेकर सरकार की नाराजगी सामने आई थी.
ट्रस्ट में अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद मौजूद हैं. मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी भी ट्रस्ट में रहे. अयोध्या के डीएम भी इसके ट्रस्टी होते हैं. लेकिन कहा जाता है कि चंपत राय अकेले सब पर भारी थे. इसलिए ट्रस्ट के ज्यादातर सदस्यों ने मंदिर के कामकाज और फैसलों से अपनी दूरी बना ली थी.
अब जबकि चढ़ावे में चोरी का मामला तूल पकड़ चुका है और चंपत राय पर सवाल उठने लगे हैं, उन्हें कटघरे में खड़ा किया जाने लगा है, तो वर्षों से नाराज पुराने आंदोलन से जुड़े बड़े चेहरे, संत और महंत भी उनके खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं. चाहे विनय कटियार हों, संतोष दुबे हों या छोटी छावनी के महंत कमल नयन दास, सभी ने चंपत राय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.
विनय कटियार ने तो साफ कह दिया था कि चंपत राय ने अपराध किया है और वह जल्द ही चढ़ावे में हुई चोरी का खुलासा करेंगे. हालांकि बाद में उन्होंने यू-टर्न ले लिया और चुप हो गए.
सभी को मालूम है कि चंपत राय अक्खड़, जिद्दी और किसी की न सुनने वाले हो सकते हैं, लेकिन भ्रष्ट नहीं हो सकते. क्योंकि दशकों से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों ने उनका सादगी भरा जीवन देखा है, जो आज भी जारी है. लेकिन चढ़ावे में चोरी का मामला लोगों की आस्था से इस तरह जुड़ गया है कि लोग चंपत राय को क्लीन चिट देने के लिए तैयार नहीं हैं.
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वजह साफ है कि अब तक ट्रस्ट और पूरा राम मंदिर परिसर उनकी ही देखरेख में चलता रहा है. अगर उनकी जानकारी के बिना भी चढ़ावे में चोरी हुई, तो जिम्मेदारी उनकी तो बनती ही है.
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर इतने गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं कि अगर चंपत राय को क्लीन चिट मिल भी जाती है, तो भी ट्रस्ट में उनका बने रहना अब लगभग असंभव माना जा रहा है.
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री के बेहद करीबी माने जाने वाले नृपेंद्र मिश्र ने भी मंदिर के कामकाज में व्याप्त बड़ी गड़बड़ियों की बात स्वीकार की, लेकिन चंपत राय के जीवन को निष्कलंक करार दिया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भले ही अपने कार्यक्रम से चंपत राय को दूर रखा, लेकिन उन्होंने भी कहा कि किसी का चरित्र हनन नहीं होना चाहिए. इशारा चंपत राय की ओर ही माना गया.
अब ऐसा लगता है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नए सिरे से पुनर्गठित किया जा सकता है. एक नया प्रोफेशनल सिस्टम लागू किया जा सकता है. और इतने सवाल उठने के बाद चंपत राय, अनिल मिश्रा जैसे लोग ट्रस्ट से दूरी बना सकते हैं.
लेकिन नजर इस बात पर जरूर रहेगी कि क्या SIT इस पूरे चढ़ावा चोरी मामले में इन बड़े चेहरों, जिनमें चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव जैसे नाम शामिल हैं, को कहीं दोषी करार देती है या नहीं.
कुमार अभिषेक