मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र के चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में अब बुधवार, 30 सितंबर का दिन अहम होने जा रहा है. जिला जज की अदालत में पहले यह तय होगा कि मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में आरोपी मुस्कान और साहिल दोषी हैं या नहीं. अगर अदालत दोनों को दोषी ठहराती है, तो इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी. इस मामले में अंतिम बहस 17 सितंबर को पूरी हो चुकी है. अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और मामले से जुड़े तथ्यों को रखा है. अभियोजन की ओर से दोनों आरोपियों के लिए अधिकतम सजा के तौर पर मृत्युदंड की मांग की गई है.
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने हत्या से पहले और उसके बाद की कथित तैयारियों को भी अदालत के सामने रखा. इनमें नशीली दवाओं, चाकू, नीले ड्रम, सीमेंट और रेत की खरीद से जुड़े साक्ष्य शामिल हैं. मृतक सौरभ के परिवार की ओर से मुकदमा लड़ रहे अधिवक्ता विजय बहादुर के मुताबिक वादी पक्ष की ओर से कुल 22 गवाह पेश किए गए. इनमें सौरभ का भाई बबलू, उसकी मां और सौरभ का दोस्त शामिल हैं.
हत्या से पहले और बाद की तैयारियों का हवाला
इसके अलावा ड्रम, दवाइयां, चाकू, सीमेंट और अन्य सामान की खरीद से जुड़े दुकानदारों की भी गवाही कराई गई. हत्या के बाद आरोपी जहां घूमने गए थे, वहां से जुड़े साक्ष्य भी अदालत के सामने रखे गए. अधिवक्ता विजय बहादुर के मुताबिक अभियोजन पक्ष ने अदालत में तर्क रखा कि हत्या से पहले नशीली दवा और चाकू की व्यवस्था की गई थी. वहीं हत्या के बाद शव को छिपाने के लिए ड्रम, सीमेंट और रेत की व्यवस्था की गई.
अभियोजन पक्ष का कहना है कि शव को ड्रम में भरकर सीमेंट से सील करने और उसे किसी दूसरी जगह ले जाकर ठिकाने लगाने की योजना थी. हालांकि, इससे पहले ही मामला सामने आ गया. इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों और गवाहों को अदालत के सामने रखा गया है. अब अदालत को इन्हीं पहलुओं पर फैसला करना है.
मुस्कान की ओर से अधिवक्ता रेखा जैन ने बचाव पक्ष रखा. विजय बहादुर के अनुसार बचाव पक्ष ने दोनों आरोपियों द्वारा हत्या किए जाने से ही इनकार किया है. वादी पक्ष की ओर से अपने सभी साक्ष्य और गवाह अदालत के सामने रखे जा चुके हैं. अभियोजन पक्ष ने अपने तर्क के समर्थन में ऐसे मामलों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी हवाला दिया है. अधिवक्ता विजय बहादुर ने बताया कि हत्या के मामले में न्यूनतम सजा आजीवन कारावास और अधिकतम सजा मृत्युदंड है. उनकी ओर से अदालत से अधिकतम सजा की मांग की गई है.
मुस्कान की बेटी के संबंध में DNA जांच की मांग को लेकर भी अधिवक्ता विजय बहादुर ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि फिलहाल हत्या का ट्रायल चल रहा है और इस दौरान इस तरह की मांग का मुकदमे पर प्रभाव पड़ सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि सौरभ के परिवार से इस विषय में उनकी कोई बातचीत नहीं हुई है. बच्ची के संबंध में अदालत ही यह फैसला करेगी कि सहानुभूति का कोई आधार बनता है या नहीं.
मेरठ जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने जेल में मुस्कान और साहिल की दिनचर्या के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अदालत में चल रही कार्यवाही के संबंध में उन्हें जानकारी नहीं है. हालांकि जेल में मुस्कान पहले की तुलना में अधिक धार्मिक गतिविधियों में समय दे रही है. वह नियमित रूप से संध्या और सुंदरकांड करती है.
इसके अलावा शिव पूजा भी कर रही है. जेल अधीक्षक के मुताबिक बच्ची के अलावा मुस्कान को जो समय मिलता है, उसमें वह पूजा-पाठ करती है. जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि साहिल अन्य बंदियों से ज्यादा बातचीत नहीं करता. वह अपने काम में लगा रहता है. इस बीच अदालत की कार्यवाही अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. अंतिम बहस पूरी होने के बाद अब 30 सितंबर को अदालत में फैसला सुनाए जाने की तारीख तय है.
पहले दोष पर फैसला, फिर सजा पर सुनवाई
30 सितंबर को अदालत सबसे पहले यह तय करेगी कि मुस्कान और साहिल सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी हैं या नहीं. यदि दोनों दोषी पाए जाते हैं, तो इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी. अभियोजन पक्ष ने दोनों के लिए मृत्युदंड की मांग की है. वहीं बचाव पक्ष ने हत्या किए जाने से इनकार किया है. ऐसे में अब सभी की नजरें जिला जज की अदालत की कार्यवाही पर टिकी हैं. ब्लू ड्रम हत्याकांड की सुनवाई में अभियोजन पक्ष की ओर से 22 गवाहों को पेश किया गया है और हत्या से पहले तथा बाद की कथित तैयारियों से जुड़े कई साक्ष्य अदालत के सामने रखे गए हैं. अब 30 सितंबर को अदालत का अगला फैसला इस मामले की आगे की कानूनी दिशा तय करेगा.
उस्मान चौधरी