एक समय था जब NRI (नॉन-रेजिडेंट इंडियन) दूल्हे से शादी करना कई भारतीय परिवारों का सपना माना जाता था. विदेश में नौकरी, बेहतर कमाई और स्थायी जीवन की उम्मीद की वजह से ऐसे रिश्तों को प्राथमिकता दी जाती थी. लेकिन अब यह ट्रेंड धीरे-धीरे बदलता दिख रहा है.
हाल के सालों में खासकर अमेरिका में रहने वाले NRI युवकों के लिए भारत में रिश्ते ढूंढना पहले जितना आसान नहीं रहा. इसकी वजह सिर्फ वीजा नियम नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं और उनके परिवारों की बदलती सोच भी मानी जा रही है.
VisaVerge की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में रहने वाले NRI युवकों के रिश्तों में रुचि करीब 25 फीसदी तक घटी है. रिपोर्ट के अनुसार, इसके पीछे सख्त इमिग्रेशन नियम, वीजा से जुड़ी अनिश्चितताएं, जीवनसाथी के काम करने के अधिकार और विदेश में लंबे समय तक बसने को लेकर बढ़ती चिंताएं प्रमुख कारण हैं.
रेडिट पर छिड़ी बहस
इसी मुद्दे पर रेडिट पर एक यूजर ने सवाल पूछा कि क्या अब NRI लड़कों के लिए भारत में शादी का रिश्ता ढूंढना मुश्किल हो गया है?यूजर ने लिखा कि उनके आसपास कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां अच्छी नौकरी और स्थिर करियर होने के बावजूद NRI युवकों को सिर्फ कुछ धारणाओं की वजह से मना कर दिया गया.
पोस्ट के मुताबिक, कई लोगों का मानना होता है कि NRI पति वफादार नहीं होंगे, विदेश में उनके पास कई विकल्प होंगे, शादी के बाद उनका व्यवहार बदल सकता है, वे पहले से लिव-इन रिलेशनशिप में रहे होंगे या फिर विदेश में जाकर जीवनसाथी को अकेलापन और करियर से समझौता करना पड़ सकता है.
महिलाओं ने क्या कहा?
इस पोस्ट पर कई महिलाओं और अन्य रेडिट यूजर्स ने अपनी राय दी. एक यूजर ने लिखा कि यदि कोई महिला भारत में अच्छी नौकरी कर रही है, तो वह सिर्फ शादी के लिए अपना करियर छोड़कर विदेश क्यों जाए, खासकर तब जब वहां नौकरी मिलने की कोई गारंटी न हो.
एक अन्य यूजर ने कहा कि भारत में नौकरी करते हुए घरेलू मदद मिल जाती है, जबकि विदेश में नौकरी न मिलने की स्थिति में महिला को घर के काम भी संभालने पड़ सकते हैं और सामाजिक दायरा भी सीमित हो सकता है.
कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि हर NRI को एक ही नजरिए से देखना सही नहीं है. शादी जैसा बड़ा फैसला लेने से पहले दोनों परिवारों को एक-दूसरे के बारे में पूरी जानकारी जुटानी चाहिए, मिलना-जुलना चाहिए और सभी तथ्यों की जांच करनी चाहिए.
बदल रही हैं प्राथमिकताएं
सोशल मीडिया पर हुई इस चर्चा से साफ है कि आज कई भारतीय युवाओं के लिए सिर्फ विदेश में बसने का सपना ही शादी का आधार नहीं रह गया है. अब करियर, आर्थिक स्वतंत्रता, पारदर्शिता, भरोसा और रिश्ते में बराबरी जैसे पहलुओं को पहले से ज्यादा महत्व दिया जा रहा है.
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