Tesla Roadster कार लॉन्च हो गई है, जिसको तीन वेरिएंंट में लॉन्च किया है. यह कार सड़क पर चलने के साथ हवा में उड़ने की भी काबिलियत रखती है. इस कार में पीछे वाले बंपर के पास चार नोजल लगे हैं, जो इस कार का हवा में लंबी छलांग लगाने की ताकत देते हैं. इस कार में चलने के लिए टायर और उड़ने के लिए रॉकेट जैसी टेक्नोलॉजी दी है.
अब सवाल आता है कि Tesla Roadster एक इलेक्ट्रिक कार है, तो वह एक रॉकेट इंजन की तरह थ्रस्ट कैसे जनरेट कर रही है. इसका जवाब छिपा है कार के पीछे वाली सीट के नीचे मौजूद एक गोलाकार सिलेंडर के अंदर है. हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि डेमो में दिखाए गए स्टंट, असली कार कर पाएंगी या नहीं.
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया है कि Tesla Roadster के अंदर कंपोसिट ओवररैप्ट प्रेशर वेजेल (COPV) नाम दिया है. इस तरह की टेक्नोलॉजी और सिलेंडर सिस्टम बनाने वाली कंपनी को स्पेसएक्स ने साल की शुरुआत में खरीद लिया था, जिसका नाम हेक्सगॉन मास्टरवर्क है. इस कंपनी को खरीदने से टेस्ला को फायदा मिला है. SpaceX के रॉकेट में भी COPV का इस्तेमाल किया जाता है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीट के नीचे लगा सिलेंडर हाई प्रेशर एयर जनरेट करता है, जिसमें नाइट्रोजन की मात्रा काफी ज्यादा होती है. इस हाई प्रेशर एयर की बदौलत कार हवा में लंबी छलांग लगा सकती है और संतुलन भी बना लेती है, जैसा कि टेस्ला के शेयर वीडियो में देखा जा सकता है.
Tesla का पोस्ट
COPV को दो पाइप के जरिए चार नोजल से कनेक्ट किया है. यह सिलेंडर पलक झपकने की स्पीड से एयर प्रेशर तैयार करता है, जिसको चार नोजल के जरिए बाहर निकाला जाता है. फिर यह नोजल प्रेशर कार को फ्लाई करने में मदद करता है.
COPV की मदद से रॉकेट जैसी पावर
COPV के अंदर तेज प्रेशर को स्टोर किया है और उसको कंट्रोल भी करता है. इसका आकार एक बड़े एक्सरसाइज गेंद के जैसा होता है. आसान भाषा में COPV को कार में लगा CNG सिलेंडर मान सकते हैं. बस इसमें CNG गैस नहीं होती है बल्कि कार को हवा में उड़ाने के लिए नाइट्रोजन के साथ हवा होती है. इसका दबाव 10 हजार पीएसआई तक हो सकता है. इसकी कैपिसिटी करीब 200 लीटर तक है.
लंबे समय से यूज हो रही है COPV तकनीक
COPV कोई नई टेक्नोलॉजी नहीं है लेकिन किसी कार में इसका ऐसा इस्तेमाल ये पहली बार हुआ है.यह एक हाई प्रेशर दबाव सहने वाला टैंक रॉकेट तकनीक का शुरुआत से पार्ट रहा है. शुरुआती दौर में ऐसे टैंक को स्टील से बनाया जाता था, जिसके बाद एल्युमिनियम और बाद में टाइटेनियम तक का इस्तेमाल हुआ है.
नासा ने इसको हल्का और मजबूत बनाया
COPV जैसे टैंकों को हल्का और मजबूत बनाया जाता है, जिसको बाद में नासा ने बेहद ही खास तरीके से तैयार किया. COPV टैंक के अंदर बहुत ज्यादा प्रेशर को बनाए रखने में बाहरी कंपोजिट परत यानी ओवररैप का अहम रोल होता है. इस तरह के सिलेंडर बनाने में Kevlar और कार्बन फाइबल जैसे बेहद हल्के और मजबूत कंपोजिट मैटेरियल की कई परतें लपेटी जाती हैं.
रोहित कुमार