भारतीय हॉकी टीम के अनुभवी मिडफील्डर मनप्रीत सिंह के लिए आगामी हॉकी वर्ल्ड कप सिर्फ एक और टूर्नामेंट नहीं है. नीदरलैंड्स और बेल्जियम में 15 से 30 अगस्त तक होने वाले इस बड़े टूर्नामेंट से पहले मनप्रीत ने अपने दिल की बात कही है.
दो बार ओलंपिक मेडल जीत चुके मनप्रीत अपना चौथा वर्ल्ड कप खेलने जा रहे हैं. लेकिन इस बार उनके लिए यह टूर्नामेंट इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह उनका आखिरी वर्ल्ड कप हो सकता है. ऐसे में वह भारत को खिताब दिलाकर इसे यादगार बनाना चाहते हैं.
मनप्रीत ने JioStar से कहा- यह वर्ल्ड कप मेरे लिए बहुत मायने रखता है, क्योंकि ऐसा चौथी बार है. हमने लगातार दो ओलंपिक मेडल जीते हैं, लेकिन वर्ल्ड कप मेडल अभी भी हमारे पास नहीं है. हर खिलाड़ी का सपना होता है कि उसके पास दोनों हों.
उन्होंने आगे कहा- मेरे लिए यह मेरा आखिरी वर्ल्ड कप हो सकता है, इसलिए मैं इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा हूं. मैं वह हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हूं, जो हम अब तक नहीं कर पाए हैं.
51 साल से भारत को वर्ल्ड कप ट्रॉफी का इंतजार
भारतीय हॉकी टीम ने आखिरी बार 1975 में वर्ल्ड कप का खिताब जीता था. इसके बाद से टीम इस प्रतिष्ठित ट्रॉफी को दोबारा हासिल नहीं कर सकी है. मनप्रीत के लिए यही अधूरा सपना अब सबसे बड़ी प्रेरणा है. उनका मानना है कि टीम के पास इस बार इतिहास बदलने की क्षमता है.
उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को भावनाओं पर नियंत्रण रखना होगा, अपनी जिम्मेदारियों पर टिके रहना होगा और अनुशासन के साथ खेलना होगा. उनके मुताबिक यही चीजें भारत को खिताब तक पहुंचने का सबसे अच्छा मौका देंगी.
हॉकी वर्ल्ड कप में क्या भारतीय टीम फाइनल में पहुंचेगी?
मनप्रीत को अपनी टीम की तैयारियों पर पूरा भरोसा है. उन्होंने कहा कि भारतीय टीम में अनुभव और प्रतिभा का अच्छा तालमेल है और खिलाड़ी टूर्नामेंट में बड़ी उपलब्धि हासिल करने के लिए तैयार हैं. मनप्रीत ने यहां तक कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि भारत वर्ल्ड कप के फाइनल तक पहुंचेगा. उन्होंने बताया कि कैम्प काफी एनर्जी है. हर खिलाड़ी हर ट्रेनिंग सेशन में अपना 100 फीसदी दे रहे हैं. उनके मुताबिक टीम के हर सदस्य का लक्ष्य कुछ खास हासिल करना है.
पूल डी में भारत, पाकिस्तान भी साथ
भारत को वर्ल्ड कप में पूल डी में रखा गया है. इस ग्रुप में भारत के साथ वेल्स, इंग्लैंड और पाकिस्तान हैं. भारतीय टीम शनिवार (15 अगस्त) को वेल्स के खिलाफ मुकाबले से अपने अभियान की शुरुआत करेगी.
ग्रुप में पाकिस्तान की मौजूदगी के कारण भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर भी सभी की नजरें रहेंगी. हालांकि मनप्रीत का कहना है कि टीम किसी भी विपक्षी के नाम या उसकी प्रतिष्ठा से प्रभावित नहीं होगी.
पाकिस्तान संग मुकाबले पर क्या बोले मनप्रीत
उन्होंने कहा- हम पाकिस्तान के खिलाफ खेलें या किसी और टीम के खिलाफ, हम अपनी गेम प्लान पर ही टिके रहते हैं. हम विपक्षी टीम के नाम या उसकी प्रतिष्ठा में नहीं उलझते.
'किसी टीम को हल्के में नहीं ले सकते'
पूर्व भारतीय कप्तान ने साफ किया कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में किसी भी टीम को कमजोर मानना भारी पड़ सकता है. मनप्रीत ने कहा कि पिछले वर्ल्ड कप के अनुभवों से टीम ने सीखा है कि हर मुकाबले में पूरी तरह फोकस रहना जरूरी है.उन्होंने कहा- मुझे इस टीम पर पूरा भरोसा है. हर खिलाड़ी वर्ल्ड कप को लेकर उत्साहित और तैयार है. हमने पिछले टूर्नामेंट से सीखा है कि आप किसी भी टीम को हल्के में नहीं ले सकते. भारतीय टीम में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का संतुलन भी मनप्रीत को काफी मजबूत नजर आता है.
मनप्रीत, हरमनप्रीत और मंदीप बांट रहे अनुभव
मनप्रीत ने बताया कि टीम के सीनियर खिलाड़ी युवा खिलाड़ियों के साथ अपने अनुभव साझा कर रहे हैं. कप्तान हरमनप्रीत सिंह, मंदीप सिंह और खुद मनप्रीत इस भूमिका में अहम योगदान दे रहे हैं.उन्होंने बताया कि सीनियर खिलाड़ी युवाओं को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि अलग-अलग परिस्थितियों में क्या काम आया, क्या नहीं चला और हर मैच को किस मानसिकता के साथ खेलना चाहिए.यह अनुभव खास तौर पर बड़े मुकाबलों में भारत के काम आ सकता है.
फिटनेस और डिफेंस पर भी खास जोर
वर्ल्ड कप से पहले भारतीय टीम ने सिर्फ आक्रमण पर ही नहीं, बल्कि फिटनेस और डिफेंस पर भी काफी काम किया है. मनप्रीत के मुताबिक कोच ने खिलाड़ियों की फिटनेस को प्राथमिकता दी है, क्योंकि दुनिया की टॉप टीमों के खिलाफ मुकाबला करने के लिए शारीरिक रूप से पूरी तरह तैयार रहना जरूरी है. उन्होंने कहा कि टीम ने डिफेंस को भी मजबूत करने पर काफी मेहनत की है. उनका मानना है कि मजबूत डिफेंस खिलाड़ियों को आक्रमण करने और मैच पर नियंत्रण बनाने का आत्मविश्वास देता है.
भारतीय टीम के सामने चुनौती सिर्फ टूर्नामेंट जीतने की नहीं, बल्कि 1975 के बाद चले आ रहे 51 साल के इंतजार को खत्म करने की भी है. वहीं मनप्रीत के लिए यह चौथा वर्ल्ड कप उनके अंतरराष्ट्रीय करियर के सबसे भावुक पड़ावों में से एक हो सकता है. ऐसे में उनकी नजर उस ट्रॉफी पर है, जो उनके शानदार करियर की सबसे बड़ी कमी अब तक बनी हुई है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क