विराट कोहली ने तिरुवनंतपुरम में सिर्फ 15 हजार ODI रन का आंकड़ा पार नहीं किया, बल्कि 139 रनों की नाबाद पारी के साथ यह भी दिखा दिया कि इस मुकाम तक उनका सफर सचिन तेंदुलकर से कितना अलग रहा है. वेस्टइंडीज के खिलाफ 88 गेंदों में नाबाद शतकीय पारी के दौरान विराट ने 15 हजार का आंकड़ा छुआ, अपना 55वां ODI शतक पूरा किया और भारत को 50 गेंदें बाकी रहते 8 विकेट से जीत दिला दी.
विराट ने 15 हजार रन तक पहुंचने के लिए 303 पारियां खेलीं. सचिन तेंदुलकर ने यह आंकड़ा 377 पारियों में हासिल किया था. यानी विराट ने सचिन से 74 पारियां कम खेलकर वही मुकाम हासिल किया. अंतर बड़ा है, लेकिन कहानी सिर्फ इतनी नहीं है.
हर पारी से ज्यादा रन निकालते रहे विराट
दोनों के आंकड़ों को नॉटआउट और औसत से अलग रखकर देखें और सिर्फ कुल रन को पारियों से बांटें, तो विराट की बढ़त साफ नजर आती है. 15 हजार के मुकाम पर विराट ने हर पारी में औसतन 49.77 रन बनाए थे, जबकि सचिन के लिए यह आंकड़ा 39.90 रन था.
यानी विराट ने हर बार बल्लेबाजी का मौका मिलने पर सचिन की तुलना में करीब 25 फीसदी ज्यादा रन बनाए. इससे पता चलता है कि 74 पारियों का अंतर सिर्फ नॉटआउट या औसत का खेल नहीं है. विराट ने अपने बल्लेबाजी मौकों को ज्यादा उत्पादक बनाया.
औसत में भी बड़ा अंतर
बल्लेबाजी औसत की तस्वीर और ज्यादा बड़ी हो जाती है. 303वीं पारी के बाद विराट के 15,080 रन थे और वह 255 बार आउट हुए थे. उनका एवरेज करीब 59.14 रहा.
सचिन के 15,043 रन तक पहुंचने के समय 377 पारियों में 37 नॉटआउट थे और उनका एवरेज 44.24 था.
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है. विराट की करीब 15.8 फीसदी पारियां नॉटआउट रहीं, जबकि सचिन के मामले में यह आंकड़ा करीब 9.8 फीसदी था. नॉटआउट का ज्यादा होना विराट के एवरेज को ऊपर ले जाता है.
लेकिन रन प्रति पारी का आंकड़ा इस प्रभाव को काफी हद तक अलग कर देता है. वहां भी विराट की बढ़त बड़ी है. यानी सिर्फ नॉटआउट की वजह से 15 हजार रन तक पहुंचने की उनकी रफ्तार को समझाया नहीं जा सकता.
शतक में विराट की रफ्तार और ज्यादा चौंकाती है
शतकों का आंकड़ा दोनों के सफर के बीच एक और बड़ा अंतर दिखाता है. विराट के खाते में 303 पारियों के बाद 55 शतक हैं. सचिन ने 15 हजार रन तक पहुंचते समय 377 पारियों में 41 शतक लगाए थे.
यानी विराट ने लगभग हर 5.5 पारियों में एक शतक लगाया, जबकि सचिन के लिए यह अनुपात करीब 9.2 पारियों का था.
यहां विराट की खासियत सिर्फ बड़े स्कोर बनाना नहीं, बल्कि पचास के बाद उसे शतक में बदलने की क्षमता भी रही.
50 प्लस स्कोर में भी विराट आगे
विराट के खाते में इस मुकाम तक 79 अर्धशतक थे. तिरुवनंतपुरम में शतक लगाने के बाद भी उनका अर्धशतक का आंकड़ा 79 ही रहा.
सचिन के 15 हजार रन तक पहुंचने के समय उनके नाम भी 79 अर्धशतक और 41 शतक थे.
यानी 50 या उससे ज्यादा रन के स्कोर को जोड़ें तो विराट के पास 134 50+ स्कोर थे, जबकि सचिन के पास 120. विराट ने 303 पारियों में 50 या उससे ज्यादा रन 134 बार बनाए, सचिन को इसके लिए 377 पारियां लगीं.
विराट का 50+ स्कोर लगभग हर 2.26 पारियों में आया, जबकि सचिन के लिए यह आंकड़ा करीब 3.14 पारियों का था.
और एक और दिलचस्प अंतर है. विराट ने अपने करीब 41 फीसदी 50+ स्कोर को शतक में बदला, जबकि सचिन का आंकड़ा इस मुकाम पर करीब 34 फीसदी था.
गेंदों की गिनती कहानी को और दिलचस्प बनाती है
15 हजार रन तक पहुंचने के लिए विराट ने करीब 15,950 गेंदें खेलीं. सचिन ने इसके लिए 17,528 गेंदें खेली थीं.
यानी विराट ने करीब 1,578 गेंदें कम खेलकर 15 हजार रन बनाए. यह अंतर 263 से ज्यादा ओवर के बराबर है.
लेकिन यहां भी एक दिलचस्प बात सामने आती है. गेंदों का अंतर करीब 9 फीसदी है, जबकि पारियों का अंतर करीब 20 फीसदी.
इसका मतलब यह नहीं है कि विराट ने सिर्फ ज्यादा तेजी से बल्लेबाजी करके यह अंतर बनाया. बड़ी वजह यह है कि उन्होंने अपनी पारियों को लंबा खींचा और हर बल्लेबाजी अवसर से ज्यादा रन निकाले.
सचिन का दौर बिल्कुल अलग था
यहीं से सीधे आंकड़ों की तुलना को थोड़ा रोकना जरूरी हो जाता है. सचिन का ODI करियर 1989 में शुरू हुआ था. वह ऐसे दौर में खेले जब एक ही नई गेंद का इस्तेमाल होता था, फील्डिंग प्रतिबंध अलग थे, डेथ ओवरों की परिस्थितियां अलग थीं और ODI में रन बनाने की गति आज की तुलना में काफी कम थी.
सचिन ने 1994 में ओपनिंग शुरू करने से पहले ही 69 ODI खेल लिए थे. इन मैचों में उन्होंने 30.84 की औसत से 1,758 रन बनाए थे और एक भी शतक नहीं लगाया था.
ओपनिंग पर आने के बाद उनके ODI करियर की दिशा ही बदल गई. लेकिन 15 हजार तक पहुंचने के उनके सफर में शुरुआती 69 मैच भी शामिल हैं. दूसरी ओर विराट ने अपने करियर में अपेक्षाकृत जल्दी नंबर तीन की अपनी भूमिका स्थापित कर ली थी.
इसलिए 74 पारियों का अंतर सिर्फ बल्लेबाजी क्षमता का अंतर नहीं है. इसमें दोनों के करियर की अलग-अलग शुरुआत और अलग-अलग भूमिकाओं का भी योगदान है.
उम्र का आंकड़ा कहानी पलट देता है
अब इसी तुलना को उम्र के पैमाने पर देखें तो तस्वीर बदल जाती है.
सचिन ने 15 हजार ODI रन 34 साल की उम्र में पूरे कर लिए थे. विराट ने यह मुकाम 37 साल की उम्र में हासिल किया.
यानी पारियों के हिसाब से विराट काफी आगे हैं, लेकिन उम्र के हिसाब से सचिन ने यह उपलब्धि कम उम्र में हासिल की थी.
इसके पीछे एक बड़ी वजह यह भी थी कि सचिन के दौर में भारत ने उनके करियर के दौरान बड़ी संख्या में ODI खेले. इसलिए 74 अतिरिक्त पारियां खेलने के बावजूद वह कम उम्र में इस मुकाम तक पहुंच गए. यही वजह है कि 15 हजार रन के रिकॉर्ड को सिर्फ एक पैमाने से देखना पूरी तस्वीर नहीं देता.
139 रनों की पारी ने क्या बताया?
वेस्टइंडीज के खिलाफ विराट की 139 रनों की नाबाद पारी इस पूरी कहानी का सबसे अच्छा उदाहरण बन गई. भारत को 296 रनों का लक्ष्य मिला था. विराट ने पहले 15 हजार का आंकड़ा पार किया, फिर शतक पूरा किया और उसके बाद भी रुके नहीं. वह अंत तक नाबाद रहे और भारत ने 50 गेंद बाकी रहते लक्ष्य हासिल कर लिया.
विराट के ODI करियर की खासियत यही रही है कि वह सिर्फ रन बनाने तक नहीं रुके, बल्कि बड़ी पारी खेलने और मैच को अंजाम तक पहुंचाने में भी आगे रहे.
15 हजार रन का आंकड़ा विराट और सचिन को एक ही क्लब में खड़ा करता है. लेकिन दोनों ने यहां तक पहुंचने के लिए अलग रास्ता तय किया.
सचिन ने 377 पारियों में 15 हजार रन पूरे किए, जबकि विराट ने यह आंकड़ा सिर्फ 303 पारियों में छू लिया. विराट के खाते में ज्यादा शतक और 50+ स्कोर भी हैं.
यानी 15 हजार रन दोनों के खाते में हैं, लेकिन वहां तक पहुंचने की कहानी बिल्कुल अलग है. यही इस रिकॉर्ड को खास बनाती है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क