गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र में तेज बारिश, देखिए ISRO की सैटेलाइट इमेज

ISRO के सैटेलाइट ने गुजरात में भारी बारिश वाले घने बादलों को दिखाया है. दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सक्रिय होने से गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भारी बारिश का अलर्ट है. कई इलाकों में जलभराव और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है.

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इस सैटेलाइट तस्वीर में आप देख सकते हैं कि बादल कहां-कहां हैं. (Photo: Windy) इस सैटेलाइट तस्वीर में आप देख सकते हैं कि बादल कहां-कहां हैं. (Photo: Windy)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 03 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:10 PM IST

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन - इसरो के सैटेलाइट तस्वीरों ने गुजरात में एक बड़े मौसमी सिस्टम की तस्वीर दी है. गुरुवार को अरब सागर और पश्चिम भारत के ऊपर फैले भारी बारिश वाले घने बादलों ने पूरे राज्य को घेर लिया है. यानी यहां मॉनसून एक्टिव फेज में हैं. जिससे गुजरात के कई जिलों में भारी बारिश हो रही है. 

गुजरात में पूरे दिन बारिश होने की संभावना है. सौराष्ट्र, दक्षिण गुजरात, मध्य गुजरात और उत्तरी गुजरात के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. सौराष्ट्र के तटीय जिलों गिर सोमनाथ, जूनागढ़, पोरबंदर और जामनगर में सुबह से ही बारिश शुरू हो चुकी है. दोपहर और शाम तक राजकोट, सुरेंद्रनगर, अमरेली और बोटाद में बारिश तेज होने की उम्मीद है. 

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सूरत, नवसारी, वलसाड, डांग और तापी में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव और यातायात बाधित हो सकता है. उत्तरी गुजरात में दोपहर से बारिश सक्रिय होगी और रात तक जारी रह सकती है. मध्य गुजरात के महिसागर, दाहोद जैसे जिलों में लगातार बारिश का अनुमान है. 

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कच्छ क्षेत्र में सबसे कम प्रभावित रहने वाला है, जहां सिर्फ हल्की-फुल्की बारिश हो सकती है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अरब सागर से लगातार नमी आ रही है, जिससे बारिश का यह सिलसिला जारी रह सकता है.

पड़ोसी राज्यों में मॉनसून की स्थिति

गुजरात के साथ ही पड़ोसी राज्यों में भी मॉनसून ने जोर पकड़ लिया है. राजस्थान के कई हिस्सों में भारी बारिश हो रही है, खासकर पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में. उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ जैसे जिलों में भारी बारिश से नदियां उफान पर हैं. कुछ इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं. 

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मध्य प्रदेश में भी मॉनसून सक्रिय है. पूर्वी और मध्य भागों में अच्छी बारिश हो रही है, जबकि पश्चिमी हिस्से गुजरात के बादलों से प्रभावित हैं. इंदौर, उज्जैन, भोपाल और ग्वालियर संभाग में मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट जारी है. महाराष्ट्र के पश्चिमी तट (कोंकण) और विदर्भ क्षेत्र में भी तेज बारिश हो रही है. मुंबई, रत्नागिरी, पुणे और नासिक जैसे इलाकों में भारी बारिश से यातायात प्रभावित हुआ है. 

मॉनसून की प्रगति और WMO की चेतावनी

इस साल 2026 में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने समय पर शुरुआत की थी, लेकिन बीच में कुछ रुकावट आई. अब जुलाई की शुरुआत में यह पूरे देश में एक्टिव हो रहा है. IMD के अनुसार मॉनसून अब गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में फैल चुका है. 

WMO की हालिया चेतावनी के अनुसार एल नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है, जिसका मॉनसून पर मिश्रित प्रभाव पड़ सकता है. कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश तो कुछ में सूखा पड़ सकता है. पश्चिम भारत में फिलहाल भारी बारिश का दौर चल रहा है, जबकि पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में सामान्य गतिविधि है. 

देश के कई हिस्सों में इस बारिश से किसानों को राहत मिल रही है, लेकिन शहरों में जलभराव, यातायात बाधा और फसल डूबने का खतरा भी है. हिमालयी क्षेत्रों और उत्तराखंड, हिमाचल में भारी बारिश से भूस्खलन का जोखिम बढ़ गया है.

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भारी बारिश की वजह, असर और सावधानियां

इस मौसम तंत्र के पीछे मुख्य कारण अरब सागर से लगातार आ रही नम हवाएं हैं. इन हवाओं के साथ ऊपरी स्तर पर कम दबाव का क्षेत्र भी बन रहा है, जो मेघों को और घना बना रहा है. सैटेलाइट इमेजरी में दिख रहे टावरिंग क्लाउड्स से पता चलता है कि वायुमंडल में काफी अस्थिरता है, जो तेज बारिश और गरज-चमक के साथ वर्षा का कारण बन रही है.

भारी बारिश से निचले इलाकों में पानी भरने, सड़कों पर जाम और बिजली गुल होने की घटनाएं बढ़ सकती हैं. कृषि के लिए यह अच्छा है लेकिन अगर लगातार बारिश हुई तो फसलों को नुकसान भी हो सकता है. नदियों में जल स्तर बढ़ने से बाढ़ की आशंका है. 

सरकारों और प्रशासन को सलाह दी जाती है कि निचले इलाकों में रहने वालों को सतर्क रहने, मछली पकड़ने वालों को समुद्र न जाने और ड्राइविंग करते समय सावधानी बरतने की अपील करें. 

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मॉनसून का भविष्य और जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

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मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मॉनसून के पैटर्न अनियमित हो रहे हैं. कभी भारी बारिश तो कभी सूखा. इस साल अल-नीनो की सक्रियता मॉनसून को और प्रभावित कर सकती है. 

ISRO के सैटेलाइट जैसे आधुनिक उपकरण मौसम पूर्वानुमान को सटीक बना रहे हैं. इससे समय पर चेतावनी जारी की जा सकती है. पूरे पश्चिम भारत में इस बारिश का सिलसिला अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकता है.
 
कुल मिलाकर मॉनसून की यह सक्रियता कृषि के लिए फायदेमंद है, लेकिन शहरों और निचले इलाकों के लिए चुनौती भी है. लोगों को सतर्क रहना चाहिए और प्रशासन को तैयार रहना होगा.

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