इसरो 4 को लॉन्च करेगा GSLV-F17: 36 हजार KM ऊपर से चीन-पाकिस्तान बॉर्डर पर रखेगा नजर

अंतरिक्ष में तैनात होगी भारत की नई आंख 36 हजार KM ऊपर से इसरो का EOS-05 देश के बड़े हिस्से पर नजर रखेगा. चक्रवात, बाढ़, जंगल की आग और सीमा से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी में भी यह सैटेलाइट मदद करेगा.

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इसरो के लॉन्च पैड पर खड़ा जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट. (Photo: ISRO) इसरो के लॉन्च पैड पर खड़ा जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट. (Photo: ISRO)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 01 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:41 PM IST

इसरो 4 सितंबर को EOS-05 सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहा है. इसे GSLV-F17 रॉकेट से सुबह 2:55 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से भेजा जाएगा. EOS-05 भारत का पहला ऐसा सैटेलाइट होगा, जो 36 हजार किलोमीटर ऊपर रहकर भारत के बड़े हिस्से की तस्वीरें लेगा. एक ही इलाके पर कई बार नजर रख सकेगा.

इस सैटेलाइट से चक्रवात, बाढ़, बादल फटने और जंगलों में आग जैसी घटनाओं पर नजर रखने में मदद मिलेगी. इससे बड़े इलाके की तस्वीरें मिलेंगी, जिससे जमीन पर हो रहे बदलावों का पता लगाया जा सकेगा. सीमा के पास होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने में भी इससे मदद मिल सकती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक ही इलाके को बार-बार देख सकेगा.

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36 हजार KM ऊपर से देखेगा भारत

EOS-05 को धरती से करीब 36 हजार किलोमीटर ऊपर भेजा जाएगा. इसे ऐसे ऑर्बिट में रखा जाएगा, जहां यह धरती के साथ उसी गति से घूमेगा. इससे सैटेलाइट लंबे समय तक भारत के बड़े हिस्से पर नजर रख सकेगा. आम तौर पर तस्वीरें लेने वाले सैटेलाइट धरती के काफी करीब घूमते हैं. वे कुछ समय बाद किसी इलाके के ऊपर से दोबारा गुजरते हैं. लेकिन EOS-05 की ऑर्बिट की वजह से भारत के बड़े हिस्से की तस्वीरें बार-बार मिल सकेंगी.

GSLV-F17 रॉकेट कितना बड़ा है?

GSLV-F17 रॉकेट की 19वीं उड़ान है. इसमें GSLV Mk II का इस्तेमाल किया जाएगा. यह रॉकेट करीब 51.7 मीटर लंबा है. लॉन्च के समय इसका वजन करीब 420.5 टन होगा. यह रॉकेट तीन हिस्सों में काम करेगा. पहले यह EOS-05 को धरती के चारों ओर एक शुरुआती ऑर्बिट में पहुंचाएगा. इसके बाद सैटेलाइट को उसकी तय ऑर्बिट तक पहुंचाया जाएगा.

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बाढ़ और जंगल की आग में आएगा काम

EOS-05 से मिलने वाली तस्वीरें चक्रवात और बाढ़ के समय काफी काम आ सकती हैं. इससे पता लगाने में मदद मिल सकती है कि बाढ़ कितने इलाके में फैली है या चक्रवात से कौन से इलाके प्रभावित हुए हैं.

जंगल में आग लगने पर भी सैटेलाइट से प्रभावित इलाके की जानकारी मिल सकती है. यह जानकारी मौसम से जुड़ी एजेंसियों, आपदा से निपटने वाली टीमों और दूसरी सरकारी एजेंसियों के काम आएगी. खेती और जमीन में हो रहे बदलावों पर नजर रखने में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

2021 में ऐसा ही मिशन हुआ था फेल

EOS-05 का यह मिशन 2021 में भेजे गए EOS-03 सैटेलाइट से जुड़ा है. 12 अगस्त 2021 को GSLV-F10 रॉकेट से EOS-03 को लॉन्च किया गया था. लेकिन रॉकेट के आखिरी हिस्से में तकनीकी खराबी आ गई थी. इसके कारण सैटेलाइट अपनी तय ऑर्बिट तक नहीं पहुंच सका था.

अब इसरो EOS-05 के जरिए इस तरह की सैटेलाइट सेवा को फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहा है. अगर मिशन सफल रहता है, तो भारत को अंतरिक्ष से बड़े इलाके पर बार-बार नजर रखने की नई सुविधा मिलेगी.

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