अंतरिक्ष में कचरे की होगी सफाई! भारत-जापान ने मिलाया हाथ, पुराने सैटेलाइट के मलबे को हटाने की तैयारी

अंतरिक्ष में सैटेलाइट भले ही काम करना बंद कर दें, लेकिन उनका मलबा वहीं रह जाता है. अब भारत और जापान की दो कंपनियां इस पुराने कबाड़ से निपटने के लिए हाथ मिला रही हैं.

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भारत की सैमटेल और जापान की बुल कंपनी मिलकर स्पेस से कचरा साफ करने के प्रोजेक्ट में जुटने वाले हैं. (Photo: ITG) भारत की सैमटेल और जापान की बुल कंपनी मिलकर स्पेस से कचरा साफ करने के प्रोजेक्ट में जुटने वाले हैं. (Photo: ITG)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 19 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:52 PM IST

अंतरिक्ष में पुराने सैटेलाइट और उनके टुकड़ों से होने वाले खतरे को कम करने के लिए भारत और जापान की दो कंपनियां साथ काम करेंगी. भारत की सैमटेल एवियोनिक्स और जापान की बुल कंपनी ने इस दिशा में अपनी साझेदारी आगे बढ़ाई है. 15 अक्टूबर 2026 को गुरुग्राम में दोनों कंपनियों के अधिकारियों ने इस योजना पर चर्चा की. इसका मकसद ऐसी तकनीक पर काम करना है, जिससे अंतरिक्ष में पहले से मौजूद मलबे को हटाने और आगे कचरा बढ़ने से रोकने में मदद मिल सके.

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अंतरिक्ष में कई सैटेलाइट काम करते हैं. इनकी मदद से मौसम की जानकारी मिलती है और संचार जैसी जरूरी सेवाएं चलती हैं. लेकिन जब कोई सैटेलाइट काम करना बंद कर देता है, तो उसका मलबा अंतरिक्ष में रह जाता है. इसके टुकड़े दूसरे सैटेलाइट से टकराकर उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसी समस्या को कम करने के लिए दोनों कंपनियां अपनी तकनीक को एक साथ इस्तेमाल करने की योजना पर काम कर रही हैं.

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सितंबर में हुआ था समझौता

सैमटेल एवियोनिक्स और बुल कंपनी के बीच सितंबर 2026 में बेंगलुरु स्पेस एक्सपो के दौरान समझौता हुआ था. अब दोनों कंपनियां अपनी तकनीक को जोड़ने और उसे बेहतर बनाने के तरीकों पर काम कर रही हैं. वे यह भी देख रही हैं कि भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है. सैमटेल एवियोनिक्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ पुनीत कौरा ने कहा कि अंतरिक्ष को सुरक्षित रखना किसी एक कंपनी के लिए आसान नहीं है. इसके लिए अलग-अलग कंपनियों को मिलकर काम करना होगा.

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क्या है जापानी कंपनी की तकनीक?

बुल कंपनी की तकनीक को पोस्ट-मिशन डिस्पोजल (पीएमडी) कहा जाता है. इसका काम सैटेलाइट का मिशन पूरा होने के बाद उसे अंतरिक्ष में बेकार पड़े रहने से रोकने में मदद करना है. इससे आगे चलकर अंतरिक्ष में नया कचरा बनने की समस्या कम हो सकती है. लेकिन यह तकनीक पहले से अंतरिक्ष में मौजूद मलबे को नहीं हटा सकती. इसी वजह से इसे सैमटेल के डेब्रिस रिमूवल व्हीकल (डीआरवी) के साथ जोड़ने की योजना पर विचार किया जा रहा है.

दोनों कंपनियां यह भी देख रही हैं कि बुल के उपकरण की मदद से पहले से अंतरिक्ष में मौजूद मलबे को हटाने में कैसे मदद मिल सकती है. अभी इस योजना पर काम चल रहा है. कंपनियों ने किसी खास मिशन या रॉकेट लॉन्च की तारीख नहीं बताई है.

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अंतरिक्ष में कचरा हटाना क्यों जरूरी?

बुल कंपनी के सीईओ और संस्थापक यासुहितो उटो ने कहा कि अंतरिक्ष पूरी दुनिया के लिए जरूरी है. उनकी कंपनी की तकनीक आगे चलकर नया कचरा बनने से रोकने में मदद कर सकती है. लेकिन पुराने मलबे को हटाने के लिए दूसरी तकनीकों की भी जरूरत है.

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अंतरिक्ष में मौजूद मलबे से काम कर रहे सैटेलाइट को नुकसान पहुंच सकता है. इससे मौसम, संचार और दूसरी सेवाओं पर भी असर पड़ने का खतरा रहता है. इसलिए सैटेलाइट का काम पूरा होने के बाद उसे सही तरीके से हटाना जरूरी है.

सैमटेल और बुल कंपनी इसी समस्या का हल खोजने के लिए साथ काम कर रही हैं. हालांकि, अभी यह शुरुआती तैयारी है. आगे यह देखना होगा कि दोनों कंपनियां अपनी तकनीक को किस तरह इस्तेमाल करती हैं और मलबा हटाने का काम कब शुरू हो पाता है.

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