उत्तर अमेरिका के पूर्वी तट पर चार जुलाई की छुट्टियों से पहले एक शक्तिशाली हीट डोम बना है. इससे वर्ल्ड कप के नॉकआउट चरण के मैच बेहद गर्म और नम मौसम में खेले जा रहे हैं. जलवायु परिवर्तन खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों के स्वास्थ्य को जोखिम में डाल रहा है. टूर्नामेंट के नतीजों पर भी असर डाल सकता है. क्लाइमेट सेंट्रल की नई रिपोर्ट कहती है कि इस लू की तीव्रता जलवायु परिवर्तन की वजह से कम से कम पांच गुना ज्यादा हो गई है. Photo: AFP
मौसम सिर्फ दर्शकों की समस्या नहीं है, बल्कि मैचों की निष्पक्षता पर भी असर डाल रहा है. जिन टीमों के मैच खुले स्टेडियम में हो रहे हैं, उन्हें ज्यादा मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है. न्यूयॉर्क का मेटलाइफ स्टेडियम, मियामी, फिलाडेल्फिया और टोरंटो जैसे खुले मैदानों में खेलने वाली टीमों को गर्मी और नमी का ज्यादा सामना करना पड़ रहा है. वहीं ह्यूस्टन, डलास और अटलांटा जैसे एयर-कंडीशंड स्टेडियमों में बेहतर स्थिति है. Photo: AFP
इस हफ्ते के कुछ महत्वपूर्ण मैचों में खतरा ज्यादा है. टोरंटो में पुर्तगाल बनाम क्रोएशिया का मैच 2 जुलाई को हुआ, जहां तापमान 33.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से 8.7 डिग्री ज्यादा था. क्लाइमेट सेंट्रल के अनुसार नम गर्मी जलवायु परिवर्तन की वजह से सात गुना ज्यादा संभावित हुई. मियामी में अर्जेंटीना बनाम केप वर्डे का मैच 3 जुलाई को 30.3 डिग्री में खेला गया, जहां नमी के साथ गर्मी दस गुना ज्यादा संभावित थी. Photo: AP
फिलाडेल्फिया में पैराग्वे बनाम फ्रांस का मैच 4 जुलाई को 35.7 डिग्री तक पहुंच सकता है. ऐसे में कुछ टीमें जैसे इंग्लैंड और मेक्सिको मेक्सिको सिटी के अपेक्षाकृत ठंडे मौसम का फायदा उठा सकती हैं, जबकि वैंकूवर जैसे ठंडे स्थानों में मैच खेलने वाली टीमें भी लाभ में रहेंगी. वेन्यू आवंटन से टीमों को अलग-अलग शारीरिक फायदा या नुकसान हो रहा है, जो टूर्नामेंट की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है. Photo: Reuters
हीट एंड हेल्थ के विशेषज्ञ और सिडनी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ऑली जे कहते हैं कि आम मौसम रिपोर्ट हकीकत को पूरी तरह नहीं दिखाती. खिलाड़ी सीधी धूप में खेलते हैं और व्यायाम से बहुत गर्मी पैदा करते हैं. नम मौसम में पसीना सूख नहीं पाता, जिससे शरीर ठंडा नहीं हो पाता. इससे शारीरिक तनाव बहुत बढ़ जाता है. Photo: Reuters
वे कहते हैं कि हीट इंडेक्स जैसी सामान्य मापदंड एथलीट्स के लिए सही नहीं हैं, क्योंकि ये सामान्य स्थिति के लिए बने हैं, न कि पूर्ण ताकत से खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए. एयर-कंडीशंड स्टेडियम खिलाड़ियों को कुछ राहत दे सकते हैं, लेकिन फैंस को मैच से पहले और बाद में भी जोखिम है. Photo: Reuters
ह्यूस्टन में ग्रुप स्टेज के दौरान सौ से ज्यादा फैंस को गर्मी से संबंधित बीमारियों का इलाज करवाना पड़ा. नेचर कंजरवेंसी के डॉ. ल्यूक पार्सन्स कहते हैं कि वेट बल्ब ग्लोब तापमान (WBGT) कई मैचों में खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है. फैंस के लिए खतरा मैच के दौरान ही नहीं, बल्कि स्टेडियम पहुंचने, लाइन में खड़े रहने और टेलगेटिंग जैसी गतिविधियों में भी है. बाहर सीधी धूप में लंबे समय तक रहना खतरनाक हो सकता है. Photo: AP
विश्व मौसम एट्रीब्यूशन की डॉ. फ्रेडी ऑटो कहती हैं कि आज हर हीटवेव जलवायु परिवर्तन की वजह से ज्यादा तीव्र हो गई है. टूर्नामेंट के ग्रुप स्टेज में ही इसका असर दिखा. कम से कम दो मैच ऐसे तापमान में खेले गए जहां खिलाड़ियों की यूनियन FIFPRO मैच टालने की सलाह देती है. फ्रांस बनाम इराक का मैच 22 जून को तेज आंधी की वजह से दो घंटे टाला गया, जो 1974 के बाद पहला मौसम संबंधी मैच रद्द हुआ था. Photo: Reuters
ह्यूस्टन और मियामी में सैकड़ों दर्शक गर्मी से प्रभावित हुए और कई फैन फेस्टिवल रद्द कर दिए गए. क्लाइमेट सेंट्रल की रिपोर्ट कहती है कि 25 मैच ऐसे दिन खेले गए जब जलवायु परिवर्तन ने खतरनाक नम गर्मी को ज्यादा संभावित बनाया. इससे साफ है कि अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए चरम मौसम एक बढ़ती चुनौती बनता जा रहा है. Photo: Reuters
वर्ल्ड कप आयोजकों को खिलाड़ियों और फैंस की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी. मैचों के समय में बदलाव, ठंडे पानी और आराम के ब्रेक जैसे उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन लंबे समय में जलवायु परिवर्तन से निपटने की जरूरत है. यह टूर्नामेंट दिखा रहा है कि गर्मी अब सिर्फ एक मौसम की घटना नहीं, बल्कि खेल की निष्पक्षता और मानवीय स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला कारक बन गई है. Photo: Reuters