अमेरिका के दो सबसे बड़े जलाशय लेक मीड (Lake Mead) और लेक पॉवेल (Lake Powell) में पानी का स्तर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है. 12 जुलाई को जारी आंकड़ों के अनुसार, दोनों जलाशयों में मौजूद कुल पानी 1957 के बाद सबसे कम दर्ज किया गया. Photo: AP
इसकी सबसे बड़ी वजह लगातार पड़ रहा सूखा, कम बर्फबारी और बढ़ती गर्मी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो इसका असर करीब 4 करोड़ लोगों की पानी की सप्लाई, खेती और बिजली उत्पादन पर पड़ रहा है. Photo: AP
कोलोराडो नदी अमेरिका के दक्षिण-पश्चिम हिस्से की सबसे अहम नदियों में से एक है. इसी नदी का पानी लेक मीड और लेक पॉवेल तक पहुंचता है. इन दोनों जलाशयों में पूरे कोलोराडो नदी बेसिन का करीब 60% पानी जमा रहता है. लेकिन पिछले कई सालों से पानी लगातार कम हो रहा है. इसलिए वैज्ञानिक इसे फ्यूचर के लिए बड़ा चेतावनी संकेत मान रहे हैं. Photo: AP
लेक मीड और लेक पॉवेल सिर्फ दो झीलें नहीं हैं. इन्हीं से करीब 4 करोड़ लोगों को पानी मिलता है, 50 लाख एकड़ से ज्यादा खेतों की सिंचाई होती है और करीब 7 लाख घरों तक बिजली पहुंचती है. ऐसे में इनका जलस्तर गिरना सिर्फ पर्यावरण का मामला नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा बड़ा मुद्दा है. Photo: AP
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 12 जुलाई को लेक पॉवेल का जलस्तर 3,524 फीट और लेक मीड का जलस्तर 1,043 फीट से कम दर्ज किया गया. दोनों जलाशयों का कुल जलस्तर मार्च 2023 में बने पिछले रिकॉर्ड से भी नीचे पहुंच गया. इससे पहले इतना कम पानी 1957 में था. उस समय ग्लेन कैन्यन डैम बन रहा था और लेक पॉवेल अभी बना भी नहीं था. Photo: AP
अभी लेक पॉवेल अपनी कुल क्षमता का सिर्फ 23% और लेक मीड 27% ही भरा हुआ है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर पानी इसी तरह कम होता रहा, तो अगले साल तक दोनों जलाशय फिर नया रिकॉर्ड बना सकते हैं. Photo: AP
कोलोराडो नदी का पानी रॉकी पर्वत पर पड़ने वाली बर्फ से आता है. सर्दियों में जो बर्फ जमती है, वही गर्मियों में पिघलकर नदी और जलाशयों तक पहुंचती है. लेकिन पिछले साल इस इलाके में सामान्य से काफी कम बर्फ गिरी. इसके साथ लगातार बढ़ती गर्मी और लंबे समय से पड़े सूखे ने पानी की कमी को और बढ़ा दिया. Photo: Reuters
वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले 25 सालों में क्लाइमेट चेंज और बढ़ती पानी की जरूरत की वजह से कोलोराडो नदी में पानी लगातार कम हुआ है. इस समय पूरे नदी बेसिन का करीब 95% हिस्सा सूखे की चपेट में है. Photo: Reuters
लेक पॉवेल पर बना ग्लेन कैन्यन डैम बिजली बनाता है. अगर पानी का स्तर और नीचे गया तो डैम से बिजली बनाना मुश्किल हो जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यही हाल रहा तो 2027 की शुरुआत तक पानी इतना कम हो सकता है कि वहां बिजली उत्पादन रोकना पड़ जाए. Photo: Reuters
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ अच्छी बारिश या ज्यादा बर्फबारी से यह समस्या खत्म नहीं होगी. पानी का सही इस्तेमाल करना, खेती में कम पानी वाली तकनीक अपनाना और पानी बचाने पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी होगा. उनका मानना है कि अगर अभी से सही कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में अमेरिका में पानी और बिजली दोनों का संकट और बढ़ सकता है. Photo: Reuters