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अल-नीनो से तबाही...इंग्लैंड का तीन-चौथाई हिस्सा सूखा, पानी के इस्तेमाल पर पाबंदी

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 13 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:11 PM IST
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इंग्लैंड में लंबे समय से कम बारिश और तेज गर्मी की वजह से सूखे की समस्या बढ़ गई है. सरकार के अनुसार अब देश का करीब 71.3% हिस्सा सूखे से प्रभावित है. जुलाई के अंत में यह आंकड़ा लगभग 50% था, यानी हालात तेजी से खराब हुए हैं. करीब 4.5 करोड़ लोग ऐसे इलाकों में रह रहे हैं जहां सूखा पड़ा हुआ है. Photo: AP

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इसकी सबसे बड़ी वजह कम बारिश और सामान्य से ज्यादा तापमान है. इंग्लैंड और वेल्स में जुलाई 2026 पिछले करीब 190 सालों में सबसे सूखा जुलाई रहा. दक्षिण-पूर्व इंग्लैंड में तो सामान्य बारिश का सिर्फ 1% ही पानी गिरा. इस साल ब्रिटेन पांचवीं हीटवेव भी झेल रहा है. इसी कारण नदियों, तालाबों और जमीन के नीचे पानी का स्तर लगातार कम हो रहा है.  Photo: Reuters

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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, करीब 2.7 करोड़ लोग ऐसे इलाकों में रह रहे हैं जहां पानी के इस्तेमाल पर रोक लगी हुई है. बारिश कम होने से पानी की कमी हो रही है, जबकि गर्मी की वजह से पानी की जरूरत बढ़ गई है. फसलों की सिंचाई के लिए ज्यादा पानी चाहिए, लेकिन पानी की कमी है.  Photo: Reuters

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इसी वजह से सरकार किसानों के लिए सिंचाई के पानी को स्टोर करने के लिए छोटे जलाशय बनाने की प्रक्रिया आसान करने पर काम कर रही है. कम बारिश का असर सिर्फ लोगों पर ही नहीं, बल्कि प्रकृति पर भी पड़ रहा है. नदियों, जलाशयों और भूजल का स्तर लगातार नीचे जा रहा है.  Photo: Reuters

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अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में पानी की सप्लाई पर और दबाव बढ़ सकता है. गर्मी और सूखे की वजह से जंगलों में आग लगने का खतरा भी बढ़ गया है. साथ ही पक्षियों, पानी में रहने वाले जीवों और मछलियों पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है. तेज गर्मी का असर लोगों की सेहत पर भी दिख रहा है.  Photo: Reuters

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रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में अब तक करीब 2,877 लोगों की मौत गर्मी से जुड़ी समस्याओं की वजह से हो चुकी है. बुजुर्ग और कमजोर स्वास्थ्य वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. अल-नीनो दुनिया के मौसम और बारिश के पैटर्न को बदल सकता है.  Photo: Reuters

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इंग्लैंड के इस सूखे की वजह सिर्फ अल-नीनो नहीं है. कम बारिश, लगातार गर्मी और पानी की कमी इन सबने मिलकर हालात खराब किए हैं. फिलहाल सरकार पानी बचाने, किसानों की मदद करने और जल भंडारण बढ़ाने पर काम कर रही है. अगर यही गर्म और सूखा मौसम जारी रहा, तो आने वाले समय में पानी, खेती और पर्यावरण पर और ज्यादा दबाव पड़ सकता है.  Photo: Reuters

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