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किंग कोबरा के जहर पर वैज्ञानिकों का बड़ा एक्सपेरिमेंट, 5 नैनोबॉडी से बना एंटीवेनम

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 11 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:07 PM IST
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भारत में सांप के काटने से होने वाली मौतों को कम करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक नया एंटीवेनम तैयार किया है. यह पांच नैनोबॉडी से बनाया गया है और इसे कोबरा और किंग कोबरा के जहर के खिलाफ तैयार किया गया है. चूहों पर किए गए टेस्ट में इस एंटीवेनम ने कई खतरनाक सांपों के जहर से उनकी जान बचाई. Photo: Getty

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इस रिसर्च की खास बात यह है कि नए एंटीवेनम को भारत के अलग-अलग हिस्सों से लिए गए सांपों के जहर पर टेस्ट किया गया. इनमें मोनोकल्ड कोबरा, स्पेक्टेकल्ड कोबरा और भारत में पाए जाने वाले किंग कोबरा के जहर शामिल थे. वैज्ञानिकों ने वेस्टर्न घाट्स और नॉर्थईस्ट इंडिया जैसे इलाकों से लिए गए जहर के नमूनों का भी इस्तेमाल किया. Photo: Pixabay

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दुनिया में हर साल सांप के जहर से 1 लाख से ज्यादा लोगों की मौत होती है. इनमें करीब आधी मौतें भारत में होती हैं. सांप का जहर शरीर की नसों, मांसपेशियों और टिश्यू को नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे में समय पर सही एंटीवेनम मिलना मरीज की जान बचाने के लिए बहुत जरूरी होता है. Photo: Getty

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वैज्ञानिकों ने पांच खास नैनोबॉडी को मिलाकर यह एंटीवेनम बनाया है. नैनोबॉडी एंटीबॉडी के बहुत छोटे हिस्से होते हैं. इन्हें जहर में मौजूद खास टॉक्सिन को निशाना बनाने के लिए तैयार किया जा सकता है. इस एंटीवेनम को जहर में मौजूद तीन बड़े टॉक्सिन के खिलाफ बनाया गया है. Photo: Unsplash

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इनमें अल्फा-न्यूरोटॉक्सिन, साइटोटॉक्सिन और फॉस्फोलिपेज ए2 शामिल हैं. ये टॉक्सिन शरीर की नसों और मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इससे शरीर के कुछ हिस्सों में लकवा भी हो सकता है और टिश्यू को भी नुकसान पहुंच सकता है. Photo: Getty

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वैज्ञानिकों ने इस एंटीवेनम को भारत के अलग-अलग हिस्सों से लिए गए जहर के नमूनों पर टेस्ट किया. इनमें वेस्टर्न घाट्स और नॉर्थईस्ट इंडिया के नमूने भी शामिल थे. टेस्ट में पांच नैनोबॉडी वाले एंटीवेनम ने मोनोकल्ड कोबरा, स्पेक्टेकल्ड कोबरा और किंग कोबरा के जहर से चूहों को बचाया. इससे वैज्ञानिकों को उम्मीद मिली है कि आगे ऐसा एंटीवेनम बनाया जा सकता है, जो अलग-अलग इलाकों के कई सांपों के जहर पर काम करे. Photo: Pixabay

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अभी सांप के काटने के इलाज में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर एंटीवेनम घोड़ों से मिले एंटीबॉडी की मदद से बनाए जाते हैं. ये एंटीवेनम लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे हैं और लोगों की जान बचाते हैं. लेकिन कुछ मरीजों में इनसे एलर्जी जैसी परेशानी हो सकती है. Photo: Getty

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एक और समस्या यह है कि अलग-अलग इलाकों में रहने वाले सांपों के जहर में अंतर होता है. इसलिए एक जगह का एंटीवेनम दूसरी जगह के सांप के जहर पर उतना असरदार नहीं हो सकता. Photo: Unsplash

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यह नया एंटीवेनम अभी इंसानों के इलाज के लिए तैयार नहीं है. अब तक इसके टेस्ट चूहों पर ही किए गए हैं. इंसानों पर इस्तेमाल से पहले इसकी सेफ्टी और असर की जांच के लिए कई और टेस्ट करने होंगे. इसके बाद ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल किए जाएंगे. Photo: Unsplash

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अगर आगे के टेस्ट सफल रहते हैं, तो पांच नैनोबॉडी वाला यह एंटीवेनम भारत में सांप के काटने के इलाज को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. खासकर उन इलाकों में, जहां सांपों के जहर में काफी अंतर पाया जाता है. Photo: Unsplash

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