'अपने' ही चौधरियों को टार्गेट करने की ताकत कहां से मिल रही JDU प्रवक्ता नीरज कुमार को

जनता दल यू के प्रवक्ता नीरज कुमार अपनी ही पार्टी और गठबंधन के नेताओं को जिस तरह से टार्गेट कर रहे हैं वो सामान्य नहीं है. नीरज कुमार अगर अशोक चौधरी और सम्राट चौधरी पर लग रहे आरोपों पर जिस तरह का सवाल उठा रहे हैं वो बिना किसी ताकतवर की शह के नहीं हो सकता है.

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जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार

संयम श्रीवास्तव

  • नई दिल्ली,
  • 01 अक्टूबर 2025,
  • अपडेटेड 6:43 PM IST

जनता दल यू के प्रवक्ता नीरज कुमार लगातार अपनी पार्टी के कद्दावर मंत्री अशोक चौधरी और प्रदेश के डिप्टी सीएम बीजेपी नेता सम्राट चौधरी को लगातार निशाने पर ले रहे हैं. पार्टी के प्रवक्ता का पद इसलिए बनाया जाता है कि पार्टी और पार्टी नेताओं पर लगने वाले आरोपों का खंडन इस चतुराई से हो कि आम लोगों की अदालत में पार्टी या नेता की छवि पाक साफ बनी रहे. पर यहां तो उल्टा हो रहा है. जनसुराज पार्टी के संस्थापक नेता प्रशांत किशोर ने जेडीयू के एक ऐसे नेता पर भ्रष्टाचार पर सवाल पूछ रहे हैं जिसे नीतीश कुमार का मानस पुत्र कहा जाता है. 

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अशोक चौधरी पिछले कुछ वर्षों से लगातार सीएम नीतीश कुमार के खास बने हुए हैं. इसी तरह बीजेपी नेता सम्राट चौधऱी अगर एनडीए सरकार में बिहार के डिप्टी सीएम बने हुए हैं तो निश्चित है कि उन्हें स्थानीय बीजेपी इकाई , सीएम नीतीश कुमार और सबसे बढ़कर बीजेपी के सबसे ताकतवर मोदी और शाह को आशीर्वाद है. जाहिर है कि ऐसी दशा में विपक्ष के पास तो आरोप लगाने का असीमित अधिकार होता है पर सत्ताधारी पार्टी में रहते हुए अपनी पार्टी और गठबंधन की साथी पार्टियों के नेताओं को निशाने पर लेना आसान नहीं होता है. ऐसी दशा 2 ही परिस्थितियों में संभव होती है . पहला , पार्टी में उस प्रवक्ता की स्थिति बहुत खराब हो चुकी है . उसे पता है कि अब पार्टी में उसे बहुत ज्यादा दिन नहीं रहना है. दूसरी स्थिति तब बनती है जब पार्टी का कोई ताकतवर शख्स किसी को निपटाना चाहता हो. जाहिर है कि पहला कारण यहां फिट नहीं बैठ रहा है. आशंका जताई जा रही है कि दूसरा रिजन यहां काम कर रहा है. आइये देखते हैं ऐसा होने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?

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 JDU में नीतीश सुप्रीम कमांडर

JDU में नीतीश कुमार 'सुप्रीम कमांडर' हैं. उन्होंने अपनी पार्टी की हायर्की में किसी को अपने बराबर तो छोड़िए दूसरे नंबर पर भी नहीं खड़ा किया. यही कारण है कि जेडीयू में उनके बाद कोई दिखाई नहीं देता है. कई नेताओं ने उनके बाद दूसरी पोजिशन हासिल करने की कोशिश की तो उन्हें सांप सीढ़ी के खेल की तरह बहुत नीचे जाना पड़ गया. पार्टी का हर बड़ा फैसला जैसे मंत्रियों को हटाना, टिकट बांटना, या किसी मामले में पार्टी का स्टैंड, पार्टी के पदाधिकारियों संबंधित सभी फैसले उनके इशारे पर होते हैं.

 नीरज कुमार (एमएलसी, पूर्व मंत्री, मुख्य प्रवक्ता) नीतीश के पुराने लॉयलिस्ट हैं, और उनकी 'आक्रामक' बयानबाजी हमेशा पार्टी लाइन को सपोर्ट करती है. 20 सितंबर 2025 को नीरज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अशोक चौधरी पर प्रशांत किशोर (PK) के 200 करोड़ बेनामी संपत्ति के आरोपों को दोहराया और कहा कि नीतीश जी का सुशासन है, जीरो टॉलरेंस. अशोक को जवाब देना होगा. अगर नीतीश इसके खिलाफ होते, तो नीरज को तुरंत 'साइलेंस' का ऑर्डर मिलता, जैसा 2019 में कुछ बागी नेताओं के साथ हुआ था.
अगर सोशल मीडिया साइड X पर ट्रेंड को गौर से देखें तो #NeerajKumarJDU और #AshokChaudharyResign में यूजर्स को क्यों ऐसा लग रहा है कि नीरज नीतीश के मोहरे हैं?  जाहिर है कि इसे देखकर तो ऐसा ही लगता है कि अशोक को सजा देने का प्लान बन चुका है.

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नीतीश की की चुप्पी में छुपा होता है राज

नीतीश की चुप्पी हमेशा से संदिग्ध रही है. PK के 19-20 सितंबर के आरोपों (अशोक पर 200 करोड़, सम्राट पर फर्जी डिग्री) के बाद नीतीश ने न तो अशोक को डिफेंड किया, न नीरज को रोका. 24 सितंबर को नीरज ने X पर लिखा: अशोक चौधरी मंदिर जमीन घोटाले में फंसे, कोर्ट में केस है, जवाब दो.  26 सितंबर को CBI/ED जांच की मांग की.
जाहिर है कि नीरज कुमार की इन बातों पर नीतीश की खामोशी का मतलब है कि उनकी मौन स्वीकृति उन्हें मिल गयी है. एक्स पर एक यूजर लिखता है कि नीतीश ने नीरज को हरी झंडी दी, वरना JDU में कोई 'मानस पुत्र' पर उंगली नहीं उठाता.

नीतीश को जो लोग बहुत नजदीक से जानते हैं उन्हें पता है कि उनकी चुप्पी उनकी स्टाइल है. वो डायरेक्ट नहीं बोलते इसके लिए किसी 'प्रॉक्सी' का इस्तेमाल करते हैं. 2022 में तेजस्वी पर भ्रष्टाचार के आरोपों पर नीतीश ने सरकार तोड़ी, लेकिन पहले अपने नेताओं जैसे RCP सिंह को 'बोलने' दिया. नीरज का अटैक क्या उसी पैटर्न का एक और उदाहरण समझा जाए.

चुनावी गणित और नीतीश का 'लॉन्ग गेम'

नीतीश कुमार लगातार अगर सीएम बने हुए हैं तो उसके पीछे उनका फूंक फूंक कर एक कदम रखना ही है. वो अपने हर कदम के लिए अपने पीछे के समर्थन का आंकलन पहले ही कर लेते हैं. जाहिर है कि इस मुद्दे पर उन्होंने NDA में पहले ही सहयोगियों की तलाश कर लिया है. उपेंद्र कुशवाहा (RLM) ने 26 सितंबर को कहा कि नीरज का स्टैंड सही, नीतीश को सुनना चाहिए. जाहिर है कि उपेंद्र कुशवाहा की आज इतनी हैसियत नहीं है कि वो नीतीश कुमार की इच्छा के विपरीत जाकर बयान दे सकें.एक्स पर एक यूजर लिखता है कि NDA में नीतीश का 'कंट्रोल्ड फायर' चल रहा है. 

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इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि सम्राट चौधरी पर अटैक भी 'स्ट्रैटेजिक'है. BJP के साथ NDA में टेंशन है पर सम्राट चौधरी पर मामला किसी को समझ में नहीं आ रहा है.  नीरज कुमार ने प्रशांत किशोर के आरोपों के बारे में 30 सितंबर को जो सवाल सम्राट चौधरी के बारे में की हैं उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. नीरज कुमार ने एक तरह से प्रशांत किशोर के आरोपों पर मुहर लगाने जैसी बातें की हैं.

सम्राट को टार्गेट करने के पीछे जेडीयू में क्या रणनीति चल रही है. सम्राट की डिग्री और उन पर हत्या जैसे गंभीर आरोपों पर सवाल पूछना विपक्ष के लिए के लिए भी व्यक्तिगत होने जैसा है. जबकि नीरज कुमार तो सम्राट के साथ सत्ता में हिस्सेदार हैं. क्या यह सारी रणनीति JDU की 'क्लीन' इमेज बनाए रखने की रणनीति है या BJP के किसी तरह की नाराजगी है.

या सीट शेयरिंग में अधिक सीट हासिल करने की रणनीति है. वैसे सीट शेयरिंग की रणनीति में भी इस तरह अपने मंत्रिमंडल के डिप्टी सीएम पर इस तरह के आरोपों पर सवाल पूछने की रणनीति कुछ ज्यादा ही हो जा रहा है. तो क्या समझा जाए कि यह बीजेपी और नीतीश की इकट्ठी रणनीति है? कुछ लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि जो प्रशांत किशोर कभी नरेंद्र मोदी या अमित शाह को टार्गेट नहीं करते हैं , वो सम्राट चौधरी पर इस तरह का आरोप कैसे लगा सकते हैं. इसके पीछे किशोर को भी कहीं से ताकत मिल रही है.

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