महिला आरक्षण बिल का श्रेय लेते लेते कांग्रेस अचानक पलट क्यों गयी?

महिला आरक्षण बिल को लेकर जोश से भरी नजर आ रही कांग्रेस यूटर्न ले चुकी है. सोनिया गांधी जिस बिल को अपना बता रही थीं, संसद में पेश किये जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उसे अपनी खुशकिस्मती से जोड़ते ही कांग्रेस नेताओं के स्वर बदल गये - क्या ये महिला आरक्षण का श्रेय न ले पाने की हताशा है?

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महिला आरक्षण बिल पर बीजेपी ने बाजी मार ली है या कांग्रेस ने मैदान छोड़ दिया? महिला आरक्षण बिल पर बीजेपी ने बाजी मार ली है या कांग्रेस ने मैदान छोड़ दिया?

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 19 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 8:30 PM IST

महिला आरक्षण बिल को संसद में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के नाम से पेश किया गया है - और ये नाम लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह रहे हैं, ''महिलाओं को अधिकार देने और उनकी शक्ति का उपयोग करने के इस पवित्र काम के लिए शायद ईश्वर ने मुझे चुना है.'

ये तो पहले से ही मालूम होना चाहिये था कि बीजेपी महिला आरक्षण बिल कब की ला चुकी होती, इंतजार था तो बस ऐसे किसी मौके का जहां से महिला आरक्षण को लेकर पुरानी सरकारों के साथ क्रेडिट न शेयर करना पड़े.

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संसद के रास्ते में महिला आरक्षण बिल को लेकर पूछे जाने पर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी बड़े उत्साह के साथ कह रही थीं, इसमें क्या है... ये हमारा है... ये अपना है. बाद में आखिर क्या हुआ कि कांग्रेस नेता एक स्वर में महिला आरक्षण बिल को धोखे जैसा बताने लगे?

महिला बिल को लेकर कांग्रेस के दावे का क्या हुआ

पहले तो कांग्रेस ये कहते नहीं थक रही थी कि महिला आरक्ष्ण बिल को संसद में पेश किया जाना यूपीए सरकार में शामिल सहयोगी दलों की जीत है - क्योंकि उसी दौरान ये बिल राज्य सभा में पास हुआ था. 

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम भी कह रहे थे, ‘याद रखें कि यूपीए सरकार के दौरान ही ये बिल 9 मार्च, 2010 को राज्य सभा में पास हुआ था.’

कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी के अध्यक्ष रहते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गये पत्र की भी याद दिलायी गयी. 16 जुलाई, 2018 को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में महिला आरक्षण बिल तत्काल पास करने की मांग की गई थी.

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लेकिन अब कांग्रेस ही महिला आरक्षण बिल को देश की महिलाओं के साथ धोखा बताने लगी है. 

संसद में पेश बिल को लेकर संदेह क्यों?

कांग्रेस की तरफ से अब ये समझाने की कोशिश हो रही है कि महिलाओं के साथ धोखा कैसे हुआ है? 
और इसके लिए कांग्रेस की तरफ से सोशल साइट X पर क्रोनोलॉजी समझायी जा रही है. भारतीय राजनीति में एक दूसरे को शिकस्त देने की ये तरकीब भी अक्सर अपनायी जाती रही है. 

कांग्रेस का कहना है कि ये बिल पेश जरूर हुआ है, लेकिन देश की महिलाओं को इसका फायदा मिलता नजर नहीं आ रहा है. 

कांग्रेस की तरफ से सोशल मीडिया पर लिखा है, क्योंकि ये बिल जनगणना के बाद ही लागू होगा… 2021 में ही जनगणना होनी थी, जो आज तक नहीं हो पाई. 

और फिर जनगणना को लेकर ही संदेह जता दिया जा रहा है, आगे ये जनगणना कब होगी इसकी भी कोई जानकारी नहीं है… खबरों में कहीं 2027 तो 2028 की बात कही गई है. 

कांग्रेस का कहना है कि जनगणना के बाद ही परिसीमन का काम होगा, तब जाकर महिला आरक्षण बिल लागू होगा. 

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का दावा है कि महिला आरक्षण बिल में साफ लिखा है कि ये बिल परिसीमन पूरा होने के बाद लागू होगा… लिहाजा किसी भी कीमत पर ये 2029 से पहले लागू नहीं हो सकता. 

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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश कह रहे हैं कि 2024 के चुनाव से पहले जनगणना और परिसीमन होने की उम्मीद नहीं है.

और कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी पूछ रहे हैं, सरकार इसे 2029 से लागू करने की बात कर रही है… इसे 2024 से क्यों लागू क्यों नहीं किया जा रहा?

विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं

विपक्षी गठबंधन INDIA बनने के बाद सनातन धर्म या चुनाव लड़ने के मुद्दे पर भले ही नेताओं के अलग अलग बयान सुनने को मिलते हों, लेकिन महिला बिल पर सभी एक ही छोर पर खड़े नजर आ रहे हैं. 

संसद में बिल पेश किये जाने को लेकर भी सवाल उठा. विपक्ष का कहना था कि बिल की कॉपी सदस्यों को दिये बगैर बिल कैसे पेश कर दिया गया. जवाब में कानून मंत्री का कहना है कि बिल पहले ही वेबसाइट पर अपलोड हो चुका है.

ज्यादातर कांग्रेस नेता जहां महिलाओं को आरक्षण मिलने में देर की बात कर रहे हैं, कार्ति चिदंबरम तो परिसीमन के ही विरोध में खड़े हो गये हैं. 

कार्ति चिदंबरम ने तो सोशल मीडिया पर घोषणा ही कर डाली है, दक्षिण के राज्यों को परेशान करने वाले परिसीमन संबंधी किसी भी दुस्साहस का विरोध किया जाएगा - और उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा.

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लेकिन समझ में ये नहीं आ रहा है कि कांग्रेस का स्टैंड क्यों बदल गया है, वो भी अचानक. सुबह सुबह देखा गया उत्साह, शाम तक हताशा में क्यों तब्दील हो गया. कहीं महिला आरक्षण का श्रेय लेने के मामले में पिछड़ने की आशंका में तो नहीं? 

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