एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी के परिवार को चिराग पासवान से कैसे न्याय मिलेगा?

भरत तिवारी केस की बिहार सरकार न्यायिक जांच करा रही है, लेकिन मामला काफी तूल पकड़ चुका है. केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बिलौटी गांव जाकर भरत तिवारी के परिवार से मिलकर इंसाफ दिलाने का भरोसा दिलाया है - यह सत्ताधारी एनडीए की तरफ से डैमेज कंट्रोल की कोशिश है या चिराग पासवान की कोई और राजनीतिक मंशा?

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केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान बिलौटी गांव पहुंचकर भरत तिवारी की मां को ढाढ़स बंधाते हुए. (Photo: PTI) केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान बिलौटी गांव पहुंचकर भरत तिवारी की मां को ढाढ़स बंधाते हुए. (Photo: PTI)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 03 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:13 PM IST

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बिहार के बिलौटी गांव जाकर भरत तिवारी के परिवार से मुलाकात की है. 17 जून को बिहार पुलिस ने भरत तिवारी को एनकाउंटर में मार गिराने का दावा किया था. रिपोर्ट के मुताबिक, भरत तिवारी के पिस्तौल फेंक कर सरेंडर कर देने के बाद पुलिस ने गोली मार दी थी. मारे जाने से पहले भरत तिवारी फेसबुक लाइव कर रहे थे. 

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चिराग पासवान ने घुटनों पर बैठकर भरत तिवारी की फोटो पर फूल चढ़ाए और श्रद्धांजलि अर्पित की. बेटे को याद करते हुए रो रहीं भरत तिवारी की मां के आंसू भी पोंछे. दिलासा दिलाया, और इंसाफ दिलाने का भरोसा भी. एक दिन पहले ही चिराग पासवान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस सिलसिले में मुलाकात की थी. चिराग पासवान ने सोशल साइट X पर लिखा था, 'बिहार के राजगीर में पासवान समाज के दो युवकों की निर्मम हत्या तथा आरा में पुलिस द्वारा भरत तिवारी की हत्या के संबंध में विस्तृत जानकारी दी. साथ ही दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कर पीड़ित परिजनों को शीघ्र एवं उचित न्याय दिलाने का आग्रह किया.'

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भरत तिवारी एनकाउंटर केस की न्यायिक जांच करा रहे हैं. 22 जून को भरत तिवारी की मां आशा देवी की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसे बाद में हत्या की धाराओं में तब्दील कर दिया गया है. मतलब, अब पुलिस भी मान रही है कि भरत तिवारी की एनकाउंटर के नाम पर हत्या की गई है. 

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असल में भरत तिवारी की हत्या के बाद बिहार में राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है. जातीय महापंचायत बुलाई जा रही है, नेताओं के अलग अलग बयान आ रहे हैं. सवर्ण नेता और मंत्री पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं, तो पिछड़े समाज से आने वाले नेता और कई मंत्री भरत तिवारी को ही कठघरे में खड़ा कर दे रहे हैं - ऐसा लग रहा है जैसे 90 के दशक की तरह अगड़े-पिछड़े की लड़ाई चल रही हो.

ऐसे जातीय राजनीतिक माहौल में चिराग पासवान का भरत तिवारी के घर जाने के क्या मायने हो सकते हैं - क्या चिराग पासवान यह मामला निजी तौर पर उठा रहे हैं, या सत्ता पक्ष की तरफ से डैमेज कंट्रोल की कोई कवायद चल रही है?

भरत तिवारी को इंसाफ दिलाने का चिराग पासवान का वादा

भरत तिवारी के परिवार से मिलने के बाद चिराग पासवान ने कहा, भरत तिवारी जी की जिस तरीके से घटना घटी है, उससे स्पष्ट है कि गलत तो हुआ है. ऐसे में परिवार को न्याय मिले ये हम लोगों की प्राथमिकता है... मैं वहां पर गया कि परिवार अपनी बातों को खुलकर स्पष्ट तरीके से रखे, ताकि उन विषयों को मैं उच्च मंच तक लेकर जाऊं... परिवार को न्याय जरूर मिलेगा , मैं और मेरी पार्टी पूरी तरह पीड़ित परिजनों के साथ मजबूती से खड़ी है.

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस घटना को लेकर पहले ही मुलाकात कर चुके चिराग पासवान ने आश्वस्त किया कि वो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी मिलेंगे. बोले, मुख्यमंत्री जी से बात भी करूंगा, और लिखित तौर पर भी सारी जानकारी दूंगा. और, इस बात को हम लोग सुनिश्चित करेंगे कि परिवार को न्याय मिले. 

भरत तिवारी मामले में पहले तो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने चुप्पी साध ली थी, लेकिन बाद में दोषियों पर कार्रवाई की बात जरूर कही है. जमुई में जब मीडिया ने भरत तिवारी से जुड़े सवाल पूछने शुरू किए तो सम्राट चौधरी हाथ जोड़कर निकल गए थे. बाद में, पटना में एक कार्यक्रम में कहा, भोजपुर की घटना पर सरकार ने तुरंत न्यायिक जांच कमीशन का गठन किया, ताकि न्याय जल्दी मिले. बोले, अगर कोई गलत है तो उस पर कार्रवाई होगी.

बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव तो भरत तिवारी केस में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर ही एनकाउंटर कराने का आरोप लगा रहे हैं. भरत तिवारी केस को लेकर मीडिया के सवाल पर तेजस्वी यादव का कहना था, सरकार दिखावटी कार्रवाई कर रही है... यहां जो भी अपराधी हैं उनको संरक्षण मिलता है. सुनवाई और कार्रवाई नहीं होती. 

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव का आरोप है, हम तो बता रहे हैं… बिना मुख्यमंत्री की अनुमति से किसी की हिम्मत नहीं है… गृह मंत्री वही हैं… बड़े अधिकारी के द्वारा मैसेज भेजा गया तब एनकाउंटर हुआ. 

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तेजस्वी यादव के आरोप को लेकर मीडिया के सवाल पर बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी नाराजगी जताते हैं. कहते हैं, कोई पुलिस का अधिकारी या पुलिस का जवान जाकर आरा में कोई घटना की, एनकाउंटर किया तिवारी का, तो उसमें सम्राट चौधरी कैसे इन्वॉल्व हैं, मुझे बताइए... सम्राट चौधरी ने तो एक दिन पहले कहा था कि लोगों ने कहा है कि वो विक्षिप्त है, तो उसका इलाज कराएंगे.

बिहार सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल, पूर्व सांसद नागमणि और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी जैसे नेता तो भरत तिवारी पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं. नागमणि का कहना है कि भरत तिवारी क्रिमिनल था और मारा गया, बात खत्म. जीतनराम मांझी का कहना है, अगर कोई रिवॉल्वर ताने, तो उसे छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता... पुलिस ने भरत तिवारी का एनकाउंटर किया तो कोई अपराध नहीं किया. 
 
बिलौटी गांव में महापंचायत बुलाकर भरत तिवारी के लिए न्याय की मांग की गई, तो जवाब में 5 जुलाई को पिछड़ी जातियों की तरफ से बहुजन महापंचायत की घोषणा कर दी गई थी. जीतनराम मांझी और नागमणि जैसे नेताओं ने महापंचायत में शामिल होने की घोषणा की थी. लेकिन, बहुजन महापंचायत को स्थगित कर दिया गया है. 

चिराग पासवान के जाने के मायने

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बिहार की राजनीति में भरत तिवारी का मामला काफी तूल पकड़ चुका है. और, चिराग पासवान की तत्परता भी ऐसे ही इशारे कर रही है. एक तरफ पिछड़े समुदाय से आने वाले नेता हैं, जो भरत तिवारी पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर ही सवाल उठा रहे हैं. दूसरी तरफ डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा, पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह, पवन सिंह और अश्विनी चौबे जैसे नेता हैं जो पुलिस कार्रवाई को गलत बता रहे हैं. पुलिस कार्रवाई को गलत बताने का मतलब तो यही है कि निशाने पर सीधे मुख्यमंत्री आ जाते हैं. 

भरत तिवारी की हत्या के ठीक बाद ही बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा था, पुलिस को एनकाउंटर से पहले बहुत कुछ करना चाहिए था. उस बच्चे ने जिसका एनकाउंटर हुआ है, उसने जो व्यवहार सोशल मीडिया पर दिखाया वो अच्छा नहीं था... लेकिन पुलिस को उसके आपराधिक इतिहास का पता लगाना चाहिए था... अगर एनकाउंटर जरूरी भी था, तो हाफ एनकाउंटर करना चाहिए था.

1. बिहार में 90 के दशक को सामाजिक बदलाव का दौर माना जाता है. जब लालू यादव जैसे नेताओं ने सामाजिक न्याय का मुद्दा उठाया और वंचित समूहों की राजनीतिक भागीदारी बढ़ने लगी - लेकिन, साइड इफेक्ट यह भी हुआ कि जातीय तनाव और हिंसा का दौर भी शुरू हो गया. 

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2. नीतीश कुमार के सत्ता संभालने के बाद 2005 से सामाजिक संतुलन की तरफ चीजें बढ़ीं, और ओबीसी, महादलित और सबको साथ लेकर चलने की राजनीति आगे बढ़ी. यह कहना तो ठीक नहीं होगा कि बीते दौर के जातीय विभाजन जैसे हालात होने लगे हैं, लेकिन आशंका तो लग ही रही है. 

जन सुराज नेता प्रशांत किशोर तो भरत तिवारी के मामले को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में लगते हैं. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के बांकीपुर इलाके से उपचुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे प्रशांत किशोर ने सोशल साइट X पर लिखा है, सम्राट चौधरी बिहार में जो पुलिसिया राज कायम करना चाहते हैं, उसका पूरा हिसाब अब बांकीपुर की जनता करेगी.

बांकीपुर चुनाव को लेकर प्रशांत किशोर कहते हैं, निरंकुश सरकार की हार होगी जो गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलवाती है... भरत भूषण तिवारी जैसे युवाओं को गोली मारती है... और महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के सामने आंखें मूंद लेती है.

ऐसे माहौल में जब सत्ता पक्ष के ही नेता आगे बढ़कर अपनी अपनी जाति और समाज के हिसाब से भरत तिवारी केस में बयानबाजी कर रहे हैं. कोई भरत तिवारी के पक्ष में खड़ा है, तो कोई पुलिस एक्शन को सही ठहरा रहा है. वह भी तब जब पुलिस ने खुद एनकाउंटर को हत्या के मामले में तब्दील कर लिया है - चिराग पासवान का बिलौटी दौरा राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण हो जाता है.

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सवाल है कि क्या चिराग पासवान का यह दौरा बिहार की एनडीए सरकार के बचाव में कोई डैमेज कंट्रोल की कवायद है? या फिर, जैसे चिराग पासवान कभी नीतीश कुमार के लिए चुनौती बनकर खड़े हो जाते थे, निजी महत्वाकांक्षा के कारण या हनुमान अवतार में अब सम्राट चौधरी उनके निशाने पर आ गए हैं?

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