'धर्म को सिर्फ मानें नहीं, समझें भी...', बाबा सत्यनारायण ने 'आजतक धर्मसंसद' में बताया सनातन का अर्थ

उज्जैन में आयोजित आजतक धर्म संसद में बाबा सत्यनारायण मौर्य ने कविताओं और चित्रकारी के माध्यम से सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और परंपराओं पर गहन विचार प्रस्तुत किए.

Advertisement
आजतक धर्मसंसद में बाबा सत्यनारायण मौर्य ने की शिरकत आजतक धर्मसंसद में बाबा सत्यनारायण मौर्य ने की शिरकत

aajtak.in

  • उज्जैन,
  • 07 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:06 PM IST

महाकाल की नगरी उज्जैन में शुक्रवार को आजतक का विशेष कार्यक्रम 'आजतक धर्म संसद' आयोजित किया जा रहा है. संत समाज की मौजूदगी में इस कार्यक्रम के दौरान कई खास सत्र आयोजित हो रहे हैं जो न सिर्फ आस्था की कड़ियों से देश को जोड़ते हैं, बल्कि भक्ति से देशभक्ति तक की राह पर ले जाने की प्रेरणा बनते हैं. कार्यक्रमों की इस कड़ी में विशेष सत्र 'बम बम भोले' में प्रसिद्ध कवि, चित्रकार और कथावाचक बाबा सत्यनारायण मौर्य ने भी शिरकत की. 

Advertisement

इस दौरान बाबा सत्यनारायण ने अपनी कविताओं के साथ-साथ चित्रकारी की प्रतिभा को भी सामने रथा. उन्होंने बड़ी ही बारीकी से शब्दों के भाव को चित्र में उकेरा और मंच पर ही सजे कैनवस पर महादेव को उकेर दिया. उनकी भक्ति में रची-बसी सरल कविताओं को सुनकर मौजूद दर्शकों का मन भी भक्ति के रंग में रंग गया.

आजतक धर्म संसद के मंच पर प्रसिद्ध चित्रकार, कवि, लेखक और संगीतकार बाबा सत्यनारायण मौर्य ने सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और परंपराओं पर अपनी बात रखी. भारत भक्ति संस्थान के संस्थापक मौर्य ने कहा कि धर्म को केवल मानने के बजाय उसे जानने और समझने की कोशिश होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में सवाल पूछना और जिज्ञासा रखना महत्वपूर्ण माना गया है.

मध्य प्रदेश के राजगढ़ में जन्मे सत्यनारायण मौर्य ने विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन से ललित कला में स्वर्ण पदक प्राप्त किया है. मंच पर उनका परिचय देते हुए बताया गया कि उनकी करीब 25 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और वह कला, कविता तथा भारत माता की आरती के माध्यम से सांस्कृतिक जागरण का काम करते रहे हैं. मौर्य ने सनातन धर्म की विशेषताओं पर बात करते हुए कहा कि परमात्मा और ज्ञान को समझने की प्रक्रिया का कोई अंत नहीं है. उन्होंने 'नेति-नेति' का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय ऋषियों ने अगली पीढ़ियों को अपने ज्ञान से आगे बढ़कर सत्य की खोज करने की प्रेरणा दी.

Advertisement

उन्होंने भारतीय धार्मिक परंपराओं के पीछे वैज्ञानिक कारण होने का भी दावा किया. मौर्य ने बिंदी, चोटी और सिंदूर जैसी परंपराओं का उदाहरण देते हुए इन्हें शरीर के अलग-अलग हिस्सों और ग्रंथियों से जोड़ा. उन्होंने मंगल ग्रह के लाल रंग और बृहस्पति से पीले रंग को जोड़ने वाली पारंपरिक मान्यताओं का भी उल्लेख किया. मौर्य ने कहा कि त्रिकोणमिति और ज्यामिति जैसे ज्ञान की जड़ें भी प्राचीन भारत में रही हैं. उन्होंने जोर दिया कि नई पीढ़ी जब किसी धार्मिक परंपरा के पीछे का कारण पूछती है तो उसे सवाल करने से रोकने के बजाय उसके पीछे के अर्थ और तर्क को समझाने की जरूरत है. उनके मुताबिक सनातन की मूल भावना ज्ञान की निरंतर खोज में है.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »