मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के गेट के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने कई हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ कर रख दिया है. इस दर्दनाक हादसे में कई लोगों की जान चली गई, जबकि दर्जनों घायल हुए हैं. इस बीच, बड़ागांव खुरेरी निवासी मृतक गौरव परिहार के छोटे भाई सौरभ का एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने इस पूरे हादसे के पीछे के दर्द और प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है. भाई को बचाने के लिए सौरभ की दौड़ और उसकी बेबसी किसी भी इंसान की आंखें नम कर देने के लिए काफी है.
सौरभ अपने भाई गौरव, बहन और कुछ दोस्तों के साथ शीतला माता मंदिर के मेले में शामिल होने गया था. परिवार के कुछ सदस्य गाड़ी में ही रुके थे, जबकि तीनों भाई-बहन दर्शन करने के लिए मंदिर के अंदर जा रहे थे. तभी ढलान पर ब्रेक फेल होने के कारण बेकाबू और तेज रफ्तार ट्रक ने कहर बरपाते हुए भीड़ को कुचल दिया.
सौरभ ने रोते हुए बताया कि जब हादसा हुआ, तो चारों तरफ धूल उड़ने लगी और चीख-पुकार मच गई. उसने किसी तरह खुद को बचाया, लेकिन उसका भाई गौरव और एक अन्य साथी ट्रक के मलबे और पहियों के नीचे फंस चुके थे.
फिर खुद 8 किलोमीटर दौड़कर लाया हाइड्राभाई को ट्रक के नीचे दबा देख सौरभ मदद के लिए पुलिसकर्मियों के पास दौड़ा और क्रेन (हाइड्रा) जल्द से जल्द बुलवाने की विनती की.
सौरभ के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने उसे 5 से 10 मिनट इंतजार करने को कहा, लेकिन गंभीर हालत को देखते हुए सौरभ एक पल भी गंवाना नहीं चाहता था.
नंगे पैर और अकेला भागा
सौरभ ने बिना चप्पल पहने, नंगे पैर ही मदद की तलाश में दौड़ लगा दी. रास्ते में उसने कुछ लोगों से लिफ्ट मांगी और कुछ दूर पैदल भागा. देखें VIDEO:-
800 रुपये देकर बुक की क्रेन
वह दौड़ते-भागते शीतला माता मंदिर से काफी दूर विक्ट्री फैक्ट्री तक पहुंचा. वहां उसने ऑनलाइन 800 रुपये पेमेंट करके खुद हाइड्रा क्रेन बुक की और उसे लेकर तुरंत घटनास्थल पर वापस लौटा. देखें VIDEO:-
'भाई की सांसें चल रही थीं, लेकिन...'
जब क्रेन की मदद से ट्रक को उठाया गया और भाई गौरव को बाहर निकाला गया, तब तक काफी देर हो चुकी थी. सौरभ ने नम आंखों से बताया कि जब उसके भाई को अस्पताल लाया गया, तब तक उसकी सांसें चल रही थीं, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
इस दर्दनाक हादसे और अपनों को खोने के गम के बीच सौरभ का यह संघर्ष और व्यवस्था से उसकी लाचारी यह सोचने पर मजबूर करती है कि अगर समय पर भारी वाहन हटाने के साधन मिल जाते, तो शायद कई बेकसूरों की जान बचाई जा सकती थी.
सर्वेश पुरोहित