ब्राजील, फ्रांस, स्पेन... हर जगह प्रोटेस्ट, किस देश को कौन से मुद्दे झुलसा रहे?

दुनियाभर के कई देशों में अभी प्रोटेस्ट हो रहे हैं. ऐसे में हर देश के हिसाब से जानते हैं कि आखिर वहां प्रोटेस्ट क्यों हो रहे हैं...

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फ्रांस समेत कई देशों में प्रदर्शन हो रहे हैं. (Photo: Reuters) फ्रांस समेत कई देशों में प्रदर्शन हो रहे हैं. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:15 PM IST

दुनियाभर के कई देशों से प्रदर्शन की खबरें और तस्वीरें आ रही हैं. फ्रांस से तो काफी हिंसक प्रदर्शन की तस्वीरें आ रही हैं. लेकिन, सिर्फ फ्रांस ही नहीं, ब्राजील, स्पेन, अल्बानिया, इटली और बेल्जियम में भी ऐसा ही माहौल है.  इनमें से अधिकांश आंदोलन एक-दूसरे का हिस्सा नहीं हैं, हालांकि फ्रांस में हुई हिंसा ने यूरोप के कई देशों के प्रदर्शनकारियों को प्रेरित किया है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर कई देशों में प्रदर्शन क्यों रहे हैं और प्रदर्शन होने की वजह क्या है. तो हर देश के हिसाब से जानते हैं कि वहां क्यों युवा सड़कों पर हैं.

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अल्बानिया

अल्बानिया में प्रधानमंत्री एदी रामा की सरकार के खिलाफ छात्र और दूसरे प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे हैं. उनकी प्रमुख मांगें भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, रोजगार के बेहतर अवसर और शिक्षा व्यवस्था में सुधार हैं. दक्षिणी तट पर लक्जरी रिसॉर्ट बनाने की विवादित योजना ने भी लोगों का गुस्सा बढ़ाया है.

प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा वर्ग प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांग रहा है, जबकि एदी रामा ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है. तिराना में कई दिनों तक प्रदर्शन जारी रहे और कई जगह पुलिस के साथ झड़पें भी हुईं.

इटली

इटली में महंगाई, बढ़ती फ्यूल कीमतों और आम लोगों पर बढ़ते आर्थिक बोझ के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं. उत्तरी शहरों में मुख्य रूप से छात्र सड़कों पर उतरे, जबकि दक्षिणी हिस्सों में किसान, मछुआरे और ट्रक ड्राइवर ईंधन की कीमतों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं.

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प्रदर्शनकारी बेहतर वेतन, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं पर अधिक खर्च तथा सरकार की नीतियों में बदलाव चाहते हैं. मिलान, ट्यूरिन और बोलोन्या जैसे शहरों में कुछ प्रदर्शनों के दौरान पुलिस के साथ झड़पें हुईं. यहां छात्रों और किसान-ट्रक ड्राइवरों के प्रदर्शन अलग-अलग लहरें हैं, हालांकि दोनों का मूल कारण महंगाई और ईंधन की कीमतें हैं.

स्पेन

स्पेन में मुख्य प्रदर्शन मकानों के महंगे किराये और बढ़ते हाउसिंग संकट को लेकर हो रहे हैं. गुस्सा तब और बढ़ा, जब मैड्रिड में 87 साल की मारिया डेल कार्मेन अबास्काल को उनके लंबे समय से रहे घर से निकाल दिया गया. उन्हें उस घर से 23 सितंबर को बेदखल किया गया था, जहां वे लगभग सात दशक से रह रही थीं.

मामले में एक निवेश कंपनी ने किराया काफी बढ़ाने की कोशिश की थी. बाद में महिला को घर लौटने का समझौता हुआ, लेकिन इस घटना ने पूरे देश में किरायेदारों के अधिकारों को लेकर बड़ा विरोध जन्म दिया. छात्र, किरायेदारों के संगठन और आवास अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता किराये पर नियंत्रण और बेदखली रोकने की मांग कर रहे हैं.

बेल्जियम

बेल्जियम में ट्रेड यूनियन, शिक्षक, छात्र, सरकारी कर्मचारी और दूसरे सामाजिक संगठन सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. मुख्य नाराजगी बजट में कटौती, सरकारी सेवाओं पर खर्च घटाने और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े उपायों को लेकर है.

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प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सरकार के आर्थिक सुधारों का बोझ आम कर्मचारियों और कमजोर वर्गों पर न डाला जाए. अक्टूबर में ब्रसेल्स में हजारों लोगों ने रैली निकाली और कुछ प्रदर्शनों के दौरान पुलिस से झड़पें भी हुईं.

फ्रांस

फ्रांस में विरोध की शुरुआत मुख्य रूप से स्कूलों की बदहाल स्थिति, शिक्षकों की कमी, भीड़भाड़ वाली कक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं से हुई. छात्र संगठनों के साथ शिक्षक, ट्रेड यूनियन और दूसरे प्रदर्शनकारी भी इसमें शामिल हो गए.

अब महंगाई, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें, वेतन और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति भी बड़े मुद्दे बन चुके हैं. कई शहरों में प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसमें वाहनों में आग लगाने, सार्वजनिक भवनों को नुकसान पहुंचाने और पुलिस से टकराव की खबरें आईं.

ब्राजील

ब्राजील में अक्टूबर में राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर से पहले छात्र संगठनों और वामपंथी समर्थकों ने दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो के खिलाफ प्रदर्शन किए. फ्लावियो बोल्सोनारो, पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के पुत्र हैं और चुनाव के पहले दौर में शीर्ष पर रहे थे.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दक्षिणपंथ के बढ़ते प्रभाव से लोकतंत्र और सार्वजनिक शिक्षा को नुकसान हो सकता है. छात्र सार्वजनिक शिक्षा के लिए पर्याप्त बजट और मौजूदा राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा की नीतियों के समर्थन में भी सड़कों पर उतरे हैं. राष्ट्रपति चुनाव का दूसरा दौर 25 अक्टूबर को होना है.
 

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