सेवा के 25 साल... गुजरात मॉडल से विकसित भारत के ड्रीम तक, मोदी का संकल्प

7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से लेकर देश के प्रधानमंत्री पद तक, नरेंद्र मोदी का सत्ता में 25 वर्षों का सफर भारतीय राजनीति की दिशा बदलने वाले ऐतिहासिक निर्णयों का दौर रहा है. इस दौरान उन्होंने गुजरात मॉडल, नोटबंदी, जीएसटी, अनुच्छेद 370 के खात्मे और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे कई बड़े व दूरगामी फैसले लेकर देश के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Photo-ITG) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 07 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:22 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में 25 साल का सफर पूरा कर लिया है, जिसे भाजपा ने 'जनसेवा' का नाम दिया है. नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर पहली बार सत्ता की बागडोर संभाली थी. 13 साल मुख्यमंत्री रहने के बाद वह पिछले 12 वर्षों से देश के प्रधानमंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं. तब से लेकर आज तक भारतीय राजनीति में पीएम मोदी का सफर लगातार चर्चा के केंद्र में रहा है.

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साल 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री और उसके बाद देश के प्रधानमंत्री के रूप में अपने 25 वर्षों के लंबे राजनीतिक कार्यकाल में उन्होंने कई ऐसे कठोर, साहसिक और दूरगामी फैसले लिए, जिनसे न केवल उनकी 'एक मजबूत नेता' की छवि गढ़ी बल्कि देश की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दिशा को भी पूरी तरह बदल दिया.

मुख्यमंत्री के रूप में गुजरात से शुरू हुआ नरेंद्र मोदी के सत्ता का सफर प्रधानमंत्री पद तक पहुंच गया. गुजरात के सीएम रहते हुए आर्थिक विकास का उनका 'गुजरात मॉडल' राज्य की कामयाबी में नई इबारत लिखने वाला रहा. प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने दुनिया भर में भारत की साख को और अधिक मजबूत किया है.

नरेंद्र मोदी ने कैसे बदली गुजरात की तस्वीर

गुजरात के भुज में जनवरी 2001 में आए विनाशकारी भूकंप के बाद तत्कालीन सीएम केशुभाई पटेल के गिरते स्वास्थ्य और राजनीतिक परिस्थितियों के बीच पार्टी में नए नेतृत्व की तलाश थी. दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेताओं अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ने नरेंद्र मोदी को गुजरात की जिम्मेदारी देने का निर्णय किया. 7 अक्टूबर 2001 को उन्होंने गुजरात के 14वें सीएम के तौर पर शपथ ली.

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गुजरात का मुख्यमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी के सामने 2001 के विनाशकारी भूकंप से राहत-पुनर्वास और उसके बाद 2002 के दंगों से राज्य को उबारने की चुनौती थी. उन्होंने गुजरात में निवेश लाने और औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए कई अहम कदम उठाए.

साल 2003 में नरेंद्र मोदी ने 'वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट' की शुरुआत की. इसके तहत नियमों को आसान बनाकर वैश्विक कंपनियों को गुजरात में आमंत्रित किया गया. टाटा नैनो प्लांट को पश्चिम बंगाल के सिंगूर से लाकर गुजरात के साणंद में स्थापित कराना उनके इसी आक्रामक विकास मॉडल का बड़ा उदाहरण बना.

24 घंटे बिजली सप्लाई और जल संकट से निजात

साल 2003 में शुरू की गई 'ज्योतिग्राम योजना' ने गुजरात के ग्रामीण बुनियादी ढांचे की तस्वीर बदल दी. इस योजना के तहत कृषि और घरेलू बिजली ग्रिड को अलग-अलग किया गया, जिससे गांवों को 24 घंटे बिजली और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली मिलने लगी. इस फैसले ने न केवल कृषि विकास दर को बढ़ाया बल्कि उनके 'गुड गवर्नेंस' के नैरेटिव को पूरे देश में स्थापित किया. लड़कियों की शिक्षा के लिए 'कन्या केलावणी' और गांवों को कंप्यूटर से जोड़ने के लिए 'ई-ग्राम विश्व ग्राम' योजना लागू कराई.

सूखा प्रभावित गुजरात में जल संकट से निपटने के लिए नरेंद्र मोदी ने नर्मदा नहर नेटवर्क के विस्तार के साथ-साथ चेक डैम निर्माण और माइक्रो-इरिगेशन (सूक्ष्म सिंचाई) पर जोर दिया. हर साल 'कृषि महोत्सव' का आयोजन कर सरकारी अमले को सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाया गया, जिससे गुजरात की कृषि विकास दर दो अंकों में पहुंच गई.

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प्रधानमंत्री के रूप में लिए गए ऐतिहासिक फैसले

गुजरात के विकास मॉडल और हिंदुत्व के प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे नरेंद्र मोदी को भाजपा ने 2013 में पीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया. 2014 में मोदी लहर के बलबूते भाजपा पहली बार अपने पूर्ण बहुमत के दम पर सत्ता में आई. भाजपा ने अकेले 282 सीटें हासिल कीं और 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी देश के 14वें प्रधानमंत्री बने. 2019 और फिर 2024 में जीत दर्ज कर उन्होंने लगातार तीसरी बार सरकार बनाई और जवाहरलाल नेहरू के बाद देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री बने जिन्होंने लगातार तीसरी बार यह पद संभाला.

प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने कई ऐतिहासिक कदम उठाए. अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करना, तीन तलाक की समाप्ति, जनधन योजना, जीएसटी सुधार और आतंकी हमलों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक तथा एयर स्ट्राइक जैसे कड़े कदम इनमें शामिल हैं.

जनधन खाता, नोटबंदी और जीएसटी का फैसला

साल 2014 में प्रधानमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे बड़े वित्तीय समावेशन अभियान 'प्रधानमंत्री जनधन योजना' का ऐलान किया. इसके तहत करोड़ों गरीबों के बैंक खाते खोले गए. इसे 'आधार' और 'मोबाइल' से जोड़कर सीधे जनता के खातों में सब्सिडी (DBT) भेजने की व्यवस्था शुरू की गई. इस कदम ने सरकारी योजनाओं से बिचौलियों और भ्रष्टाचार को खत्म करने में क्रांतिकारी भूमिका निभाई.

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8 नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बंद करने (नोटबंदी) का फैसला मोदी सरकार के सबसे चर्चा में रहने वाले और साहसिक फैसलों में से एक माना जाता है. काले धन, जाली नोटों और आतंकवाद की फंडिंग पर चोट करने के इरादे से लिए गए इस फैसले ने तत्कालीन समय में भले ही असुविधा पैदा की, लेकिन इसने देश में डिजिटल लेनदेन (UPI) की एक नई क्रांति की नींव रखी.

देश में लंबे समय से लंबित 'एक राष्ट्र, एक कर' (One Nation, One Tax) की अवधारणा को साकार करते हुए पीएम मोदी के नेतृत्व में 1 जुलाई 2017 को जीएसटी (GST) लागू किया गया. देश के जटिल टैक्स ढांचे को सुव्यवस्थित करने और राज्यों के बीच व्यापारिक बाधाओं को दूर करने की दिशा में यह आजादी के बाद का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार माना जाता है.

सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक

आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार ने अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत सैन्य रणनीति को नया आयाम दिया. उरी आतंकी हमले (2016) के जवाब में भारतीय सेना ने 28-29 सितंबर 2016 की रात नियंत्रण रेखा (LoC) पार कर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकी लॉन्च पैड्स पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' की. इसके बाद पुलवामा आतंकी हमले के जवाब में 26 फरवरी 2019 को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में 'एयर स्ट्राइक' कर आतंकियों के ठिकानों को तबाह कर दिया.

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इन फैसलों ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को बदलकर रख दिया और दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ केवल रक्षात्मक रहने के बजाय आक्रामक जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है.

अनुच्छेद 370, राम मंदिर और CAA का फैसला

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में लिया गया यह अब तक का सबसे बड़ा और साहसिक राजनीतिक फैसला माना जाता है. 5 अगस्त 2019 को सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रमुख प्रावधानों को समाप्त कर दिया और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में विभाजित किया. इस फैसले ने घाटी की सियासत और सुरक्षा व्यवस्था का परिदृश्य बदल दिया, जिससे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का 'एक देश, एक विधान' का संकल्प साकार हुआ.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होना और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू करना मोदी सरकार के वैचारिक एजेंडे के प्रमुख स्तंभ बने. जनवरी 2024 में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह ने देश के सांस्कृतिक और सामाजिक परिदृश्य पर अपनी छाप छोड़ी.

महिला आरक्षण और ईडब्ल्यूएस आरक्षण

मोदी सरकार ने संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पारित कराया, जो तीन दशकों से लंबित था. इस फैसले ने भारतीय राजनीति में महिलाओं की विधायी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर स्थापित किया.

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इसी तरह, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षण की मांग लंबे समय से हो रही थी. मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल के अंत में जनवरी 2019 में सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए आर्थिक आधार पर 10 फीसदी (EWS) आरक्षण का प्रावधान किया. इस संविधान संशोधन को संसद से पास कराकर लागू किया गया, जिससे अब आर्थिक रूप से पिछड़े लोग सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं.

मुख्यमंत्री के रूप में गुजरात से शुरू हुआ नरेंद्र मोदी का प्रशासनिक सफर आज प्रधानमंत्री के रूप में वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को मजबूत करने तक पहुंचा है. 25 वर्षों के इस सफर में उनके प्रशासनिक व आर्थिक फैसलों का मुख्य ध्यान कड़े नियंत्रण, राष्ट्रीय सुरक्षा, और बड़े पैमाने पर जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर रहा है. ये फैसले भारतीय राजनीति के इतिहास में हमेशा महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखे जाएंगे.

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