संसद में पेट्रोल-डीजल पर रार, GST के दायरे में लाने पर अभी नहीं जीएसटी परिषद को ऐतबार

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बेहताशा वृद्धि को लेकर जहां संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही लगातार दो दिन बाधित रही. वहीं अभी इन्हें जीएसटी के दायरे में लाने का रास्ता भी नहीं दिख रहा. जानें क्या कहना है इस बारे में वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर का...

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वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर (फाइल फोटो) वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 6:50 PM IST
  • पेट्रोल-डीजल से होने वाली राज्यों की आय राह में रोड़ा
  • ईंधन की बढ़ती कीमतों पर विपक्ष का संसद में विरोध
  • दो दिन से नहीं चल पा रही लोकसभा-राज्यसभा

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बेहताशा वृद्धि को लेकर जहां संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही लगातार दो दिन बाधित रही. वहीं अभी इन्हें जीएसटी के दायरे में लाने का रास्ता भी नहीं दिख रहा. जानें क्या कहना है इस बारे में वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर का.

जीएसटी के दायरे में नहीं पेट्रोल-डीजल
राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए जीएसटी परिषद की सिफारिश अनिवार्य है. अभी तक जीएसटी परिषद ने ऐसी कोई अनुशंसा नहीं की है.

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पेट्रोल-डीजल को लेकर विपक्ष सरकार पर भारी
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बेहताशा वृद्धि को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष सरकार पर हावी बना हुआ है. संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण कल से शुरू हुआ लेकिन लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विपक्ष के महंगाई के मुद्दे पर बहस कराए जाने को लेकर सत्तापक्ष और प्रतिपक्ष के बीच रार बनी रही और सुलह का कोई रास्ता नहीं निकाला जा सका. सदनों में दो दिन से विपक्ष का हंगामा और नारेबाजी जारी है जिसके वजह से संसद की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी है.

जीएसटी परिषद में सभी राज्य
किसी भी वस्तु पर जीएसटी लगाने या हटाने या उनकी दरों में परिवर्तन करने के लिए जीएसटी परिषद में फैसला लिया जाता है. इसमें सभी राज्यों के वित्त मंत्री शामिल होते हैं और देश के वित्त मंत्री इसकी अध्यक्षता करते हैं. 

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पेट्रोल-डीजल से राज्यों की आय
पेट्रोल और डीजल को जीएसटी दायरे में नहीं लाने की एक बड़ी वजह राज्यों की इससे होनी वाली आय है. केंद्र सरकार ईंधन पर जहां उत्पाद शुल्क, उपकर और सीमाशुल्क जैसे अप्रत्यक्ष कर लगाती है तो वहीं राज्य सरकारें भी वैट इत्यादि लगाकर पेट्रोल-डीजल से आय करती हैं. इसलिए जीएसटी परिषद में कई बार मुद्दा उठने के बावजूद इसे लेकर राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पायी है.

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