कांग्रेस ने मंगलवार को ऐसा राजनीतिक दांव चला जिसने सभी को चौंका दिया. इसकी भनक न मीडिया को थी और न ही सुरक्षा एजेंसियों को. मौका तो था कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के 84वें जन्मदिन का, लेकिन इस बहाने पार्टी के शीर्ष नेताओं की बैठक बुलाई गई और फिर अचानक पूरी लीडरशिप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकारी आवास 7, लोक कल्याण मार्ग की ओर कूच कर गई.
राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस सांसदों और वरिष्ठ नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की.
खड़गे के आवास पर जन्मदिन मनाने पहुंचे थे नेता
दरअसल, मंगलवार दोपहर जब राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के 10, राजाजी मार्ग स्थित आवास पहुंचे तो सभी को यही लगा कि वे कांग्रेस अध्यक्ष का जन्मदिन मनाने आए हैं. खड़गे मंगलवार को 84 वर्ष के हो गए, लेकिन कुछ ही देर बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला अचानक प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ गया. खड़गे के आवास से प्रधानमंत्री आवास की दूरी करीब 2.3 किलोमीटर है. इस अचानक हुए घटनाक्रम से मीडिया और सुरक्षा एजेंसियां दोनों हैरान रह गईं.
कांग्रेस अध्यक्ष के निवास से पीएम आवास 2.3 किमी दूर
प्रधानमंत्री आवास के पास पहुंचकर कांग्रेस नेताओं ने धरना शुरू कर दिया और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. कांग्रेस ने सोमवार को संसद मार्च के दौरान छात्र संगठन सीजेपी (Cockroach Janta Party) के प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग उठाई. पार्टी का आरोप था कि छात्रों और युवाओं की आवाज को दबाया जा रहा है.
सरकार की ओर से स्थिति संभालने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को मौके पर भेजा गया. उन्होंने राहुल गांधी से धरना समाप्त करने की अपील की, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने प्रदर्शन जारी रखा. बाद में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन भी वहां पहुंचे.
जन्मदिन के बहाने बनी रणनीति
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने इस प्रदर्शन की योजना बेहद गोपनीय तरीके से तैयार की थी. शुरुआत में पार्टी की योजना संसद की कार्यवाही स्थगित होने के बाद विजय चौक तक मार्च निकालने की थी, लेकिन यह योजना पहले ही लीक हो गई. कांग्रेस को आशंका थी कि पुलिस पहले से ही बैरिकेडिंग कर नेताओं को रोक देगी.
इसी बीच पार्टी नेतृत्व ने रणनीति बदल दी. तय किया गया कि मल्लिकार्जुन खड़गे के जन्मदिन के लंच के बहाने वरिष्ठ नेताओं को उनके आवास पर बुलाया जाएगा, जिससे किसी को शक नहीं होगा. दोपहर करीब तीन बजे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, सांसद और अन्य वरिष्ठ नेता खड़गे के आवास पहुंचे. सुरक्षा एजेंसियों को लगा कि यह सिर्फ जन्मदिन का कार्यक्रम है.
जैसे ही सभी प्रमुख नेता एकत्र हुए, वे एक साथ प्रधानमंत्री आवास की ओर रवाना हो गए. कांग्रेस का उद्देश्य प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचकर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराना था. हालांकि सुरक्षा बलों ने उन्हें प्रधानमंत्री आवास से कुछ दूरी पहले ही रोक दिया.
पुलिस भी रह गई हैरान
कांग्रेस के इस अचानक प्रदर्शन ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया. सोमवार को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद मंगलवार को सेंट्रल दिल्ली में पहले से भारी पुलिस बल तैनात था और पूरे इलाके को सुरक्षा के लिहाज से किले में तब्दील कर दिया गया था. इसके बावजूद कांग्रेस के इस गुप्त अभियान की जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को पहले से नहीं मिल सकी. जब नेताओं का काफिला प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ा तो पुलिस को तत्काल अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ी.
कांग्रेस ने क्यों चुना प्रधानमंत्री आवास?
पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस इस प्रदर्शन के जरिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाना चाहती थी. कांग्रेस लगातार आरोप लगा रही है कि संसद में नीट-यूजी पेपर लीक समेत छात्रों से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा नहीं कराई जा रही है. विपक्ष का कहना है कि सरकार इन मुद्दों से बच रही है.
कांग्रेस ने अपने धरने के दौरान पांच प्रमुख मांगें भी रखीं. पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की. साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री से संसद के पटल पर बयान देने, पूरे मामले पर संसद में चर्चा कराने, छात्रों से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से सुने जाने और सोमवार को प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की.
छात्रों के मुद्दे पर सक्रिय दिखने की कोशिश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस इस प्रदर्शन के जरिए छात्रों और युवाओं के मुद्दे पर अपनी सक्रियता का संदेश देना चाहती थी. हाल के दिनों में परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे पर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक लगातार आंदोलन कर रहे हैं. कांग्रेस ने उनके आंदोलन के प्रति समर्थन तो जताया था, लेकिन पार्टी लीडरशिप प्रत्यक्ष रूप से उस आंदोलन में सक्रिय नजर नहीं आया. ऐसे में कांग्रेस नहीं चाहती थी कि छात्रों और युवाओं के मुद्दे पर उसकी छवि कमजोर दिखाई दे.
इसी रणनीति के तहत पार्टी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर अचानक धरना देकर सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की. कांग्रेस का मानना है कि इस प्रदर्शन के जरिए वह संसद के भीतर और बाहर छात्रों से जुड़े मुद्दों को अधिक मजबूती से उठा सकेगी. मंगलवार का यह घटनाक्रम कांग्रेस की हाल के वर्षों की सबसे गोपनीय और अचानक की गई राजनीतिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है.
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