राहुल गांधी पर FIR की मांग: इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अमेरिका में 2024 में दिए गए बयान को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है. याचिका वाराणसी निवासी नागेश्वर मिश्रा और अन्य की ओर से दाखिल की गई है.

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राहुल गांधी के खिलाफ FIR की मांग वाली याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी.( File Photo: PTI) राहुल गांधी के खिलाफ FIR की मांग वाली याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी.( File Photo: PTI)

आनंद राज

  • इलाहाबाद,
  • 16 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:50 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अमेरिका में 2024 में दिए गए बयान को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है. कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. यह याचिका वाराणसी निवासी नागेश्वर मिश्रा और अन्य की ओर से दाखिल की गई है.

याचिका में राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच कराने की मांग की गई है. यह याचिका भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत दाखिल की गई है. मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने की.

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याचिका में राहुल गांधी के 10 सितंबर 2024 को अमेरिका में दिए गए बयान को आधार बनाया गया है. आरोप है कि राहुल गांधी ने भारत में रहने वाले सिखों, उनकी पगड़ी और कड़ा पहनने के अधिकार के साथ गुरुद्वारे जाने को लेकर बयान दिया था. याचिकाकर्ता ने इस बयान को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है.

राहुल गांधी ने क्या कहा था?

अमेरिका दौरे के दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि भारत में सिख समुदाय के बीच इस बात को लेकर चिंता है कि क्या उन्हें पगड़ी और कड़ा पहनने की अनुमति होगी और क्या वे गुरुद्वारे जा सकेंगे. उन्होंने कहा था कि यह चिंता केवल सिख समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी धर्मों से जुड़ी है.

राहुल गांधी ने आगे कहा था कि बीजेपी यह स्वीकार नहीं करती कि देश सभी का है. उन्होंने भारत को संविधान में परिभाषित एक 'Union' बताते हुए कहा था कि देश में अलग-अलग इतिहास, परंपराएं, संगीत और नृत्य हैं. उन्होंने आरोप लगाया था कि बीजेपी इस विचार को स्वीकार नहीं करती.

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राहुल गांधी ने RSS पर भी निशाना साधते हुए कहा था कि RSS भारत को नहीं समझता. उन्होंने आरोप लगाया था कि RSS की सोच में कुछ राज्य, भाषाएं, धर्म और समुदाय दूसरों से कमतर माने जाते हैं. उन्होंने तमिल, मराठी, बंगाली और मणिपुरी जैसी भाषाओं का भी जिक्र किया था.

वाराणसी कोर्ट से हाईकोर्ट पहुंचा मामला

नागेश्वर मिश्रा ने सारनाथ थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने कोर्ट का रुख किया. 28 नवंबर 2024 को ACJM-II ने मामले को खारिज करते हुए कहा था कि कथित बयान अमेरिका में दिया गया था और यह अदालत के क्षेत्राधिकार से बाहर है.

इसके बाद नागेश्वर मिश्रा ने रिवीजन याचिका दाखिल की. मामले में आगे की सुनवाई हुई और राहुल गांधी ने भी अपना पक्ष रखा. 25 अगस्त को राहुल गांधी ने लिखित जवाब में याचिका को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और कहा कि उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का कोई कानूनी आधार नहीं है. उन्होंने खुद को 'सच्चा देशभक्त' बताते हुए सभी धर्मों और समुदायों, खासकर सिख समुदाय के प्रति सम्मान की बात कही. अब हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है.

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