'राहुल गांधी के धरने में महिला पुलिसकर्मियों से छेड़छाड़', SC में सरकार का आरोप

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि दिल्ली में राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी और मारपीट हुई. वहीं, अदालत ने प्रदर्शन के अधिकार और आम लोगों की सुविधाओं के बीच संतुलन बनाने की जरूरत बताई.

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राहुल गांधी के प्रदर्शन पर महिला पुलिसकर्मियों से बदसलूकी का आरोप. (File Photo- PTI) राहुल गांधी के प्रदर्शन पर महिला पुलिसकर्मियों से बदसलूकी का आरोप. (File Photo- PTI)

अनीषा माथुर / संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 09 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 6:26 PM IST

दिल्ली में राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी और उनके घायल होने का आरोप सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में लगाया. उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज भी की गई, लेकिन उन्होंने जिम्मेदारी से काम किया. मेहता ने कहा कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी, इसलिए यह गैरकानूनी था.

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तुषार मेहता ने ये बातें 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बुलाए गए प्रदर्शन से पहले दिल्ली में लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कहीं. इससे दो दिन पहले विपक्षी INDIA गठबंधन के सांसदों को कथित वोट चोरी के खिलाफ प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर जंतर-मंतर जाने से पुलिस ने रोक दिया था.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि प्रदर्शन करने के अधिकार और दूसरे नागरिकों के स्वतंत्र रूप से आने-जाने और जरूरी सुविधाओं तक पहुंचने के अधिकार के बीच संतुलन होना चाहिए. वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, प्रशांत भूषण और वृंदा ग्रोवर ने प्रतिबंधों के दायरे पर सवाल उठाए. उन्होंने मेट्रो स्टेशन बंद करने, ट्रेनें रद्द करने, दिल्ली की सीमाओं पर जांच और होटलों को नई बुकिंग नहीं लेने के कथित निर्देशों का मुद्दा उठाया.

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कानून व्यवस्था के लिए जरूरी कदम

सरकार की ओर से पेश मेहता ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ये कदम जरूरी थे. न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि प्रदर्शनकारियों और आम नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन जरूरी है. उन्होंने अदालत के सामने रखी गई सामग्री के आधार पर पुलिस की कार्रवाई को जरूरत से ज्यादा बताया. पीठ ने प्रतिबंधों की सीमा और वैधता की जांच के लिए पुलिस का वास्तविक आदेश भी मांगा.

वृंदा ग्रोवर ने बताया कि CJP के प्रदर्शन की अनुमति मांगने वाले दो आवेदन खारिज किए गए थे. उन्होंने कहा कि आयोजकों ने पहले ही प्रदर्शन की घोषणा कर दी थी और एक तय जगह मांगी थी. पीठ ने संकेत दिया कि प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या सीमित करके और यह सुनिश्चित करके कि कोई हथियार लेकर न आए, प्रदर्शन को नियंत्रित किया जा सकता है. साथ ही, अदालत ने साफ किया कि हाईवे जाम नहीं किए जा सकते.

राहुल गांधी पर बीजेपी के आरोप

बुधवार को हुए प्रदर्शन के बाद बीजेपी ने आरोप लगाया था कि अशोक रोड पर टकराव के दौरान राहुल गांधी ने एक महिला पुलिस अधिकारी को धक्का देने की कोशिश की और उन्हें अनुचित तरीके से छुआ. उस समय पुलिस धरने पर बैठी एक महिला प्रदर्शनकारी को हटाने की कोशिश कर रही थी. बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने X पर वीडियो साझा कर राहुल गांधी पर महिला अधिकारी को धक्का देने की कोशिश का आरोप लगाया. पार्टी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने उनसे माफी मांगने की मांग की. इन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी.

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पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और INDIA गठबंधन के कई अन्य नेताओं को बसों के जंतर-मंतर की ओर जाने से रोकने के बाद जबरन हटाकर हिरासत में लिया था. इससे एक दिन पहले विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयुक्तों से मुलाकात की मांग को लेकर आठ घंटे तक धरना दिया था.
 

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