नीलेकणि की टीम कैसे नॉर्मल कमेटीज से अलग? सुझाव नहीं, पेपरलीक का जड़ से खात्मा भी करेगी

देश के युवाओं और अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले पेपर माफियाओं पर मोदी सरकार ने नकेल कसने की पूरी तैयारी कर ली है. मोदी सरकार ने पेपर लीक को जड़ से खत्म करने के लिए टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में हाई पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है. ये टास्क फोर्स सुझाव नहीं देगी बल्कि एक मजबूत सिस्टम स्थापित करेगा.

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पीएम मोदी ने टीम नीलेकणि' का किया गठन (Photo-ITG) पीएम मोदी ने टीम नीलेकणि' का किया गठन (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 27 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:04 PM IST

देश की प्रतियोगी परिक्षाओं में होने वाली धांधली और पेपर लीक को जड़ से समाप्त करने के लिए मोदी सरकार ने एक हाई सुपर टास्क फोर्स का गठन किया है. पीएम मोदी ने कहा कि हमारी परीक्षा पद्धति ट्रांसपेरेंट हो और टेक्नोलॉजी का उपयोग हो, इसलिए टेक्नो एक्सपर्ट नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में हाई पावर्ड टास्क फोर्स बनाने का फैसला लिया है.

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बता दें कि 2024 में भी नीट पेपर लीक होने के आरोपों के बाद सरकार ने ISRO के पूर्व चेयरमैन डा. के राधाकृष्णन की अगुवाई में एक कमेटी गठित हुई थी. इस कमेटी ने पेपर लीक रोकने और एग्जाम प्रक्रिया में सुधार के लिए 101 सिफारिशें दी थीं, लेकिन इन्हें लागू नहीं किया गया है. सुप्रीम कोर्ट के राधाकृष्णन कमेटी के लागू किए जाने के सवाल पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि सरकार राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों से आगे बढ़कर काम कर रही है.

मोदी सरकार ने नंदन नीलेकणी की अगुवाई में हाई-पावर्ड टीम का गठन किया है, जो नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) का कायाकल्प करेगी. यह छह सदस्यीय टास्क फोर्स नॉर्मल कमेटियों से अलग है  ये समिति सिर्फ सुझाव ही नहीं देगी बल्कि एग्जाम रिफॉर्म पर फोकस करेगी और पेपर लीक को जड़ से खात्मा करने के लिए परीक्षा की व्यवस्था तैयार करके देगी.

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कैसे नॉर्मल कमेटी से अलग है हाई-पावर्ड टीम
भारतीय परीक्षा प्रणाली में बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों और Gen-Z युवाओं के तीखे आंदोलनों के बाद केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम लीक से हटकर किया गया है. इंफोसिस के सह-संस्थापक और 'आधार' के मुख्य शिल्पकार रहे नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक हाई टास्क फोर्स का गठन किया गया है. 

पुरानी कमेटियों में अमूमन एक ही विभाग या शिक्षा क्षेत्र के लोग होते थे। लेकिन 'टीम नीलेकणि' एक 'मल्टीडिसिप्लिनरी' कमांडो यूनिट की तरह है, जिसमें देश के सबसे बड़े विशेषज्ञ शामिल हैं. वहीं, इससे पहले वाली राधाकृष्णन की अगुवाई में कमेटी में टेक्नोक्रेट से ज्यादा शिक्षाविद थे. ऐसे में पीएम मोदी ने ज‍िस नई हाई-लेवल टास्क फोर्स/कमेटी का ऐलान क‍िया है,उसका दायरा टेक्‍न‍िकल होने के साथ-साथ कहीं अधिक मॉडर्न रखा गया है.

यह समिति पारंपरिक सरकारी कमेटियों से मीलों दूर है. पारंपरिक समितियां अमूल्य सुझाव देती हैं जैसे, सुरक्षा बढ़ाई जानी चाहिए या  निगरानी सख्त होनी चाहिए. इसके विपरीत नंदन नीलेकणि की पहचान एक ऐसे 'डेटा मैन' और टेक्नोक्रेट के रूप में है,जिन्होंने सिर्फ सलाह नहीं दी, बल्कि आधार और यूपीआई (UPI) जैसे विशाल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जमीन पर उतारकर दिखाए हैं. 

माना जा रहा है कि टास्क फोर्स टीम परीक्षा प्रक्रिया के हर चरण, प्रश्नपत्र के डिजिटल ट्रांसमिशन से लेकर ओएमआरऔर ऑनलाइन मूल्यांकन तक में एक फुल-प्रूफ डिजिटल शील्ड तैयार करने का काम करेगी. इस हाई टास्क समिति का जोर सिर्फ तकनीक पर नहीं,बल्कि मजबूत संस्थागत सुधारों पर भी होगा. इस पूरी टीम में शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, सुरक्षा और प्रशासन से जुड़ी शीर्ष हस्तियों को शामिल किया गया है, ताकि एक बेहद मजबूत परीक्षा ढांचा तैयार किया जा सके.

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'टीम नीलेकणि' एक 'मल्टीडिसिप्लिनरी' ' कमांडे
नंदन नीलेकणि तकनीक और डिजिटल स्केल के उस्ताद हैं.  डॉ एस सोमनाथ इसरो के पूर्व प्रमुख  हैं, जोलॉजिस्टिक्स, स्पेस-ग्रेड सुरक्षा और जटिल प्रणालियों के विशेषज्ञ हैं.  तपन डेका खुफिया ब्यूरो (IB) के निदेशक रहे हैं, जो सुरक्षा, साइबर थ्रेट और लूपहोल की थाह लेने वाले हैं. कामकोटि आईआईटी मद्रास के निदेशक हैं, जो एडवांस साइबर सिक्योरिटी और कंप्यूटर आर्किटेक्चर के जानकार हैं. इसी तरह से अनीता करवाल और अमृत लाल मीणा स्कूली शिक्षा, नीति निर्माण और बड़े प्रशासनिक लॉजिस्टिक्स के दिग्गज हैं. 

 नई टीम का पूरा ढांचा 'टेक्‍नोलॉजी, डेटा स‍िक्‍योर‍िटी, पेपर लीक के लूप होल्‍स ढूंढने और बड़े पैमाने पर सिस्टम स्केलिंग'पर आधारित है. नीलेकणी जैसे तकनीकी विशेषज्ञ जहां 'आधार' और 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' के मास्टरमाइंड रहे हैं, वहीं पूर्व आईबी चीफ की मौजूदगी स‍िक्‍योर‍िटी लेप्‍स रोकने पर केंद्रित है. जहां पहली टास्क फोर्स का उद्देश्य यह पता लगाना था कि 'सिस्टम में क्या गलत हुआ', वहीं नई टास्क फोर्स का टारगेट 'भविष्य के लिए एक ऐसा सिस्टम बनाना है जिसे हैक या लीक न किया जा सके.'

टास्क फोर्स चार बिंदुओं पर तैयार करेगा रोडमैप
नंदन नीलेकणि के अगुवाई में बनी समिति  नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की पूरी परीक्षा प्रणाली की नए सिरे से समीक्षा करेगी. साथ यह टास्क फोर्स परीक्षा की हर प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए सिर्फ अपने सुझाव ही नहीं सौंपेगी बल्कि उसे मजबूती के साथ जमीन पर उतारने का काम करेगी. 

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टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन: फुलप्रूफ टेस्ट डिलीवरी और प्रोसेस मैनेजमेंट के लिए आधुनिक टेक समाधान का सुझाव देगी, जिससे पेपर लीक की संभावना को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके. 
पेपर लीक पर लगाम: पेपर लीक और संगाठित रूप से परीक्षा धोखाधड़ी को रोकने के लिए मजबूत प्रणाली बनाने का तरीका सुझाना.
डिजिटल सुरक्षा: डाटा एवं साइबर सुरक्षा और अभ्यार्थियों की सत्यापन प्रणाली को अपग्रेड करना. 
सिस्टमिक ट्रांसप्रेरेसी: परिक्षाओं में छात्रों व लोगों का भरोसा फिर से कायम करना करने के लिए प्रक्रिया को पुनागठित करना है. 

हाई-पावर्ड टीम का मुख्य टास्क और जिम्मेदारी 

नीलेकणि कमेटी का मुख्य टास्क और जिम्मेदारी है- AI-संचालित डिजिटल परीक्षा मॉडल तैयार करना, एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन, बायोमेट्रिक-इंटेलिजेंस सिक्योरिटी और जीरो-लीकेज आर्किटेक्चर विकसित करना.


जबकि 2024 में बनी राधाकृष्णन कमेटी को सिर्फ NTA के SOPs, डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल, पेपर-सेटिंग प्रक्रिया की समीक्षा करना और NTA के आंतरिक ढांचे का पुनर्गठन करने को ही कहा गया था.


छात्रों-युवाओं के कड़े विरोध और Gen-Z आंदोलन के बाद केंद्र सरकार पर जिस तरह का दबाव बना था, उसने यह साफ कर दिया था कि अब लीपापोती से काम नहीं चलेगा. पारंपरिक कमेटियों के उलट टीम नीलेकणि को केवल एक 'सलाहकार समिति' के रूप में नहीं, बल्कि देश के परीक्षा व्यवस्था के 'पुनर्निर्माण और कोडिंग' के रूप में देखा जा रहा है.

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यह टास्क फोर्स अपनी योजना को जमीन पर उतारने में सफल रही,तो यह परीक्षा सुधारों के इतिहास में वह टर्निंग पॉइंट साबित होगी.

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