INDIA ब्लॉक की बैठकों में पहले अक्सर असहमति, बहस और कभी-कभी बैठक से निकलकर बाहर आने जैसी घटनाएं हुई हैं. लेकिन बुधवार को हुई INDIA गठबंधन की बैठक में माहौल बिल्कुल अलग था. इस बैठक में ज्यादा एकता दिखाई दी. तीन घंटे से ज्यादा समय तक चली इस बैठक में चुनाव आयोग और SIR के खिलाफ आंदोलन करने से लेकर कई मुद्दों पर चर्चा हुई.
बैठक में नेताओं ने एक-एक करके अपनी बात को रखा और फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. बैठक में SIR, चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार समेत तमाम मुद्दों पर बात हुई. इस बैठक में एक आम सहमति बनी और आगे की राजनीतिक लड़ाई को लेकर नेताओं में उत्साह दिखा.
बैठक में सभी नेता इस बात को लेकर सहमत हुए कि अब विरोध प्रदर्शनों और कार्यक्रमों का एक स्पष्ट शेड्यूल तैयार होना चाहिए और चुनाव आयोग पर दबाव बनाने के लिए गति बढ़ानी चाहिए.
एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि बैठक में SIR को लेकर राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष शुरू से ही इस मुद्दे को उठाता रहा है. नेता ने बताया कि बैठक में राहुल गांधी ने कहा, 'हम शुरू से ही यह मुद्दा उठा रहे हैं. यह कोई आम लड़ाई नहीं है. लोकतंत्र को बचाने के लिए हमें एकजुट होकर अब लड़ना होगा.' हालांकि, बैठक में राहुल गांधी ने यह भी माना कि राज्य स्तर पर राजनीतिक हालात अलग-अलग होते हैं.
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नेताजी ने आगे बताया कि बैठक में राहुल गांधी ने कहा, 'INDIA गठबंधन के भीतर ही कुछ पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रही हैं. राज्य स्तर पर कंपटीशन है और हो सकता है कि इस मुद्दे पर एक साथ विरोध प्रदर्शन करना संभव न हो. जैसे केरल में. मुद्दा एक ही हो सकता है लेकिन वे एक ही नारे के तहत अलग-अलग विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं.'
PM अब पहले जैसे नहीं रहे: राहुल गांधी
नेता ने यह भी बताया कि बैठक में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर हमला करते हुए कहा कि वे घबराहट की स्थिति में हैं. अपना नाम न बताने की शर्त पर उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने कहा, 'वे अब पहले जैसे नहीं रहे हैं, वे बस अपनी पुरानी छवि की परछाईं बनकर रह गए हैं. वे दिशाहीन हो गए हैं. जल्द ही और खुलासे होने वाले हैं. वे इसका सामना नहीं कर पाएंगे.'
प्रधानमंत्री आवास के बाहर अपने विरोध प्रदर्शन पर बात करते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि उस दौरान अंदर से घबराहट भरी कॉल की जा रही थी.
बैठक में मौजूद एक नेता के मुताबिक, राहुल गांधी ने कहा, 'जब मैं प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ विरोध कर रहा था, तो वे अपने घर में थे. NSA अजीत डोभाल को घबराहट में फोन किए जा रहे थे. वे घबराए हुए थे. वे एक कमजोर व्यक्ति हैं. मुझे सभी एजेंसियों और जगहों से जानकारी मिल रही है. अभी और भी बातें सामने आने वाली हैं. कुछ बड़ा होने वाला है.'
'साथ मिलकर लड़ना चाहिए'
सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन पार्टियों से भी संपर्क करने की बात की, जो बीजेपी के खिलाफ हैं. सूत्रों के मुताबिक, ममता ने लेफ्ट के साथ अपनी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि मतभेदों के बावजूद, वे इस मुद्दे पर उनके साथ तालमेल बैठा रही हैं.
बैठक में मौजूद नेता ने के मुताबिक, ममता बनर्जी ने बैठक में मौजूद MA बेबी की ओर इशारा करते हुए कहा, 'वे यहां बैठे हैं. उन्होंने मुझे फ़ोन किया और मैंने तुरंत उन्हें वापस फ़ोन किया. मुझे इस बात से फ़र्क नहीं पड़ता कि वे मेरे दुश्मन थे या नहीं, लेकिन हमें इस लड़ाई में साथ मिलकर लड़ना चाहिए.'
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सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी ने प्रस्ताव दिया कि INDIA ब्लॉक को अन्य समूहों और राजनीतिक दलों तक पहुंचना चाहिए. ममता बनर्जी ने BJD से बातचीत का भी जिक्र किया और कहा कि वह भी लोकतंत्र को कमजोर करने के खिलाफ लड़ाई की जरूरत से सहमत हैं. बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि NDA में शामिल कुछ दल इस मु्द्दे पर बीजेपी के रुख से असहमत हो सकते हैं.
उमर अब्दुल्ला ने चुनावी बहिष्कार पर की बात
बैठक की जानकारी रखने वाले एक अन्य वरिष्ठ नेता ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की बातों का समर्थन किया. उन्होंने एक प्रेजेंटेशन दिया और बताया कि कैसे उनके पिता हमेशा लोगों से चुनाव का बहिष्कार नहीं करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेने की अपील करते रहे हैं.
बैठक में मौजूद नेता के मुताबिक, उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'मेरे पिता ने जीवन भर लोगों से कहा, ‘चुनावों का बहिष्कार न करें. यह लोकतंत्र है, चुनावों में हिस्सा लें. लेकिन आज संदेह है. क्या मुझे लोगों से यह कहना होगा कि वे हिस्सा न लें, कि यह चुनाव एक दिखावा है?'
मिलकर चुनाव लड़ने पर सहमति
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में मिलकर चुनाव लड़ने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए दबाव बनाने पर आम सहमति बनी. साथ ही, इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर भी निशाना साधा गया.
बातचीत के दौरान, कांग्रेस की ओर से CWC की उस मांग का भी जिक्र किया गया जिसमें प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई थी. कांग्रेस का तर्क था कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें अपने पदों पर नहीं बने रहना चाहिए.
मौसमी सिंह