अक्टूबर का दूसरा पखवाड़ा शुरू होते ही देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के कई रंग देखने को मिल रहे हैं. कहीं भारी बारिश की चेतावनी है, तो कहीं गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने का अनुमान है. दक्षिण भारत में बारिश का दौर तेज हो सकता है, जबकि अरब सागर में बना कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) समुद्र में मौसम को और सक्रिय कर रहा है. दूसरी ओर, दिल्ली समेत उत्तर भारत के राज्यों में सुबह, शाम और रात के वक्त ठंडक बढ़ गई है.
दिल्ली में सोमवार सुबह इस महीने की अब तक की सबसे ठंडी रात दर्ज की गई. सफदरजंग मौसम केंद्र में न्यूनतम तापमान 17.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जो औसत से 1.3 डिग्री कम है. वहीं, दिन का अधिकतम तापमान 31.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, सफदरजंग में दर्ज न्यूनतम तापमान इस महीने अब तक का सबसे कम तापमान है. दिल्ली के साथ अन्य उत्तर भारतीय राज्यों में भी सुबह, शाम और रात के समय हल्की ठंडक महसूस होने लगी है.
दिल्ली-NCR में बढ़ सकता है प्रदूषण
आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण की चुनौती बढ़ सकती है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, सोमवार शाम 4 बजे दिल्ली का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 139 रहा, जो मध्यम श्रेणी में आता है. आंकड़े देने वाले 58 निगरानी केंद्रों में से दो पर हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में रही, जबकि छह केंद्रों पर यह संतोषजनक दर्ज की गई. बाकी केंद्रों पर AQI मध्यम श्रेणी में रहा. पूसा में सबसे खराब स्थिति दर्ज की गई, जहां AQI 281 रहा.
एयर क्वालिटी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम के अनुमान के मुताबिक, 20 अक्टूबर को दिल्ली की हवा मध्यम श्रेणी में रह सकती है. इसके बाद 21 और 22 अक्टूबर को प्रदूषण बढ़कर खराब श्रेणी में पहुंच सकता है. अगले छह दिनों के पूर्वानुमान में भी हवा की गुणवत्ता खराब रहने की आशंका जताई गई है. मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां प्रदूषकों को फैलने से रोक सकती हैं. वेंटिलेशन इंडेक्स 6,000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड से नीचे और औसत हवा की रफ्तार 10 किलोमीटर प्रति घंटे से कम रहने पर प्रदूषण हवा में जमा हो सकता है.
दिल्ली-NCR में पराली जलाने का कितना असर
दिल्ली की हवा की चिंता के बीच पराली जलाने की घटनाएं भी दर्ज की गई हैं. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI) की CREAMS प्रयोगशाला के सैटेलाइट आंकड़ों के अनुसार, 19 अक्टूबर को छह राज्यों में पराली जलाने की 98 घटनाएं दर्ज की गईं.
इनमें उत्तर प्रदेश में 27, पंजाब में 25, राजस्थान में 24, उत्तराखंड में 18 और मध्य प्रदेश में चार घटनाएं सामने आईं. हरियाणा और दिल्ली में सोमवार को पराली जलाने की कोई घटना दर्ज नहीं की गई.
15 सितंबर से 19 अक्टूबर तक कुल 1,171 घटनाएं दर्ज हुईं. इनमें मध्य प्रदेश में 370, पंजाब में 368, राजस्थान में 197, उत्तर प्रदेश में 175, उत्तराखंड में 51, हरियाणा में 9 और दिल्ली में 1 घटना शामिल है. CPCB के मुताबिक, AQI 0-50 तक अच्छा, 51-100 संतोषजनक, 101-200 मध्यम, 201-300 खराब, 301-400 बेहद खराब और 401-500 गंभीर श्रेणी में आता है.
उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल में मौसम का हाल
उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश और आसपास के इलाकों में समुद्र तल से करीब 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) बना हुआ है. हालांकि, मौसम विभाग ने इस सप्ताह उत्तर-पश्चिम भारत में अलग-अलग राज्यों के लिए बताए गए पूर्वानुमान से इतर किसी बड़े मौसमी बदलाव का संकेत नहीं दिया है. हिमाचल प्रदेश और उससे सटे पंजाब के ऊपर समुद्र तल से करीब 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) से जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है.
इससे संबंधित ट्रफ लाइन मिड-ट्रोपोस्फेरिक (मध्य क्षोभमंडल) में करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर फैली है. दक्षिण राजस्थान और आसपास के इलाकों में भी ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है. दक्षिण-पश्चिम राजस्थान से उत्तर-पूर्व अरब सागर तक एक ट्रफ लाइन बनी हुई है. इन वेदर सिस्टम्स के बावजूद मौसम विभाग ने उत्तर भारत के लिए व्यापक स्तर पर किसी बड़ी मौसमी गतिविधि का अनुमान नहीं जताया है.
मध्य-पश्चिम गरज-चमक के साथ तेज हवाएं
उत्तर भारत के बाद मध्य और पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में मौसम करवट ले सकता है. मध्य प्रदेश में 20 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है. हवा के झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं. कोंकण और गोवा में मंगलवार को गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है. मध्य महाराष्ट्र में भी इसी तरह का मौसम रह सकता है.
दक्षिण भारत में भारी बारिश का अलर्ट
दक्षिण भारत में बारिश की गतिविधियां तेज होने का अनुमान है. IMD ने 20 अक्टूबर को तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है. केरल, माहे और तटीय आंध्र प्रदेश में भी भारी बारिश हो सकती है. तमिलनाडु के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री केए सेंगोट्टैयन ने बताया कि छह जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. इनमें तिरुवरूर, मयिलादुथुरई, तंजावुर, पुदुकोट्टई, कोयंबटूर और नीलगिरि शामिल हैं.
चेन्नई के एझिलागम स्थित आपात नियंत्रण केंद्र में पत्रकारों से बातचीत में मंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन को भारी बारिश से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं. जिलाधिकारी और संबंधित विभागों के अधिकारी हालात पर नजर रख रहे हैं और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार हैं. तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 20 से 25 अक्टूबर के दौरान कई जगहों पर बारिश हो सकती है.
22 से 25 अक्टूबर के बीच भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है. इस अवधि में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जबकि झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं. तमिलनाडु तट से दूर दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, जो समुद्र तल से करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला है. इससे जुड़ी द्रोणिका दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी से तमिलनाडु तट होते हुए उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है.
केरल, कर्नाटक और लक्षद्वीप में भी बारिश
केरल और माहे में 20 से 25 अक्टूबर के दौरान कई स्थानों पर बारिश होने की संभावना है. इस दौरान कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. 20 अक्टूबर को 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है. 21 से 23 अक्टूबर के बीच हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे और झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है.
लक्षद्वीप में भी 20 से 25 अक्टूबर के बीच कई जगहों पर बारिश हो सकती है. 22 से 25 अक्टूबर के दौरान कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है. यहां गरज-चमक और तेज हवाओं को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत है. कर्नाटक के तटीय इलाकों में 20 से 22 अक्टूबर और फिर 25 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है. 23 और 24 अक्टूबर को कई जगहों पर बारिश का अनुमान है. 20 से 23 अक्टूबर के दौरान कुछ स्थानों पर बिजली गिरने की आशंका है.
उत्तर अंदरूनी कर्नाटक में 20 अक्टूबर और 22 से 24 अक्टूबर के बीच कुछ जगहों पर बारिश हो सकती है. 22 और 23 अक्टूबर को 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं और झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं. दक्षिण अंदरूनी कर्नाटक में 20 अक्टूबर और 25 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर बारिश होने की संभावना है. 21 से 24 अक्टूबर के दौरान कई जगहों पर बारिश और कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है.
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बदलेगा मौसम
तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 20 से 25 अक्टूबर तक कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है. 20 से 21 अक्टूबर के दौरान कुछ जगहों पर भारी बारिश का अनुमान है. 20 और 21 अक्टूबर को 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिनके झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं. रायलसीमा में 20 से 25 अक्टूबर तक कुछ स्थानों पर बारिश होने की संभावना है.
21 अक्टूबर को कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. 20 से 23 अक्टूबर के दौरान गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है. तेलंगाना में 20 से 21 अक्टूबर के बीच कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है. इस दौरान गरज-चमक और बिजली गिरने के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. झोंकों की रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है.
अंडमान-निकोबार और ओडिशा में भी बारिश
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 20 से 25 अक्टूबर के दौरान कई जगहों पर बारिश हो सकती है. 20 अक्टूबर और 23 से 25 अक्टूबर के बीच कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है. 20 अक्टूबर को गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. ओडिशा में 20 से 22 अक्टूबर के दौरान कुछ जगहों पर बारिश होने की संभावना है. 20 अक्टूबर को गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं.
उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 20अक्टूबर को कुछ स्थानों पर बारिश का अनुमान है. वहीं, दक्षिण-पूर्व बांग्लादेश और उससे सटे त्रिपुरा के ऊपर समुद्र तल से करीब 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है. थाईलैंड की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में भी करीब 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है.
अरब सागर में बना है कम दबाव का क्षेत्र
दक्षिण-पश्चिम अरब सागर में बना स्पष्ट कम दबाव का क्षेत्र भी मौसम विभाग की निगरानी में है. 19 अक्टूबर को भारतीय समयानुसार शाम 5.30 बजे तक पिछले 12 घंटों के दौरान यह लगभग स्थिर रहा. इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से करीब 9.4 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला है. IMD के मुताबिक, यह सिस्टम 20 अक्टूबर की शाम तक स्पष्ट कम दबाव वाले क्षेत्र के रूप में बना रह सकता है और पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकता है.
21 अक्टूबर तक इसके कम दबाव वाले क्षेत्र के रूप में आगे बढ़ने का अनुमान है. 22 अक्टूबर को इसके पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम दिशा में मुड़कर सोमालिया तट की ओर बढ़ने की संभावना है. इस वेदर सिस्टम के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम अरब सागर में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. मछुआरों के लिए दक्षिण-पश्चिम अरब सागर और उससे सटे समुद्री क्षेत्रों में 20 से 22 अक्टूबर तक चेतावनी जारी की गई है. केरल और कर्नाटक के तटों तथा लक्षद्वीप क्षेत्र के लिए 22 और 24 अक्टूबर को भी चेतावनी दी गई है.
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